मध्य प्रदेश ई-टेंडरिंग घोटाला: पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के 2 करीबी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित ई टेंडरिंग घोटाले की छानबीन में जुटी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया है. दोनों लोग भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के करीबी हैं.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित ई-टेंडरिंग घोटाले की छानबीन में जुटी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया है. दोनों लोग भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के करीबी हैं.

ईओडब्ल्यू के सूत्रों ने बताया कि राज्य में जल संसाधन विभाग के टेंडरों में हुई छेड़छाड़ और गड़बड़ी के मामले में निर्मल अवस्थी और वीरेंद्र पांडे को हिरासत में लिया है. इन दोनों से ईओडब्ल्यू कई बार पूछताछ भी  कर चुकी थी. ये दोनों नरोत्तम मिश्रा के करीबी हैं. नरोत्तम मिश्रा पिछली शिवराज सिंह चौहान की सरकार में जल संसाधन मंत्री रह चुके है. 

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जानकारी के मुताबिक शिवराज सरकार के कार्यकाल में ई-टेंडरिंग में लगभग 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले की आंशका है और कांग्रेस ने अपने विधानसभा चुनाव के वचन-पत्र में ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच और दोषियों को सजा दिलाने का वादा भी किया था. इस घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू को दी गई थी. इस मामले में ईओडब्ल्यू ने कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी) से भी मदद ली थी. सीईआरटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ई-टेंडरिंग में काफी छेड़छाड़ हुई है. इसी रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने पांच विभागों, सात कंपनियों और अज्ञात अधिकारियों और राजनेताओं के खिलाफ जून में मामला दर्ज किया था.

पोर्टल में छेड़छाड़

ईओडब्ल्यू की टीम को लगभग 3000 करोड़ के ई-टेंडरिंग घोटाले के साक्ष्य तकनीकी जांच में मिले हैं. मामले में ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ करके 3 जल निगम के, 2 लोक निर्माण विभाग के, 2 जल संसाधन विभाग के, 1 मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के और 1 लोक निर्माण की परियोजना कार्यान्वयन इकाई (पीआईयू) टेंडर को मिला कर कुल 9 टेंडर में सॉफ्टवेयर के जरिए छेड़छाड़ की गई थी. इसके जरिए नौ कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया था.

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ई-टेंडरिंग की जांच प्रक्रिया के दौरान एक अधिकारी ने इस बात का खुलासा किया था कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ से उन कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया, जिन्होंने टेंडर डाले थे. जिन नौ टेंडरों में गड़बड़ी की बात सीईआरटी की जांच में पुष्टि हुई है, वे लगभग 900 करोड़ रुपये के हैं.

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