झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के निदेशक डॉ राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा सीआईडी की छापेमारी के ठीक बाद आया है. बुधवार को सीआईडी की टीम ने रिम्स के निदेशक दफ्तर, डाटा सेंटर, डीन ऑफिस और एडमिन बिल्डिंग में छापा मारा था.
इस छापेमारी के बाद से ही पूरे रिम्स कैंपस में हड़कंप मचा हुआ था और अब डॉ राजकुमार ने खुद ही अपने पद को छोड़ दिया है.
सीआईडी ने रिम्स में करीब 7 घंटे तक छापेमारी की और इस दौरान निदेशक और दूसरे अधिकारियों से लंबी पूछताछ भी की गई. यह जांच राज्य सरकार के आदेश पर की जा रही है और इसके पीछे दो बड़े मामले हैं.
पहला मामला है साल 2025 में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में हुए एडमिशन का. आरोप है कि कुछ स्टूडेंट्स ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र, फर्जी आवासीय प्रमाण पत्र और फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन लिया था.
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सबसे बड़ी बात यह है कि जो सर्टिफिकेट दिए गए थे उनको एक साल बीत जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने वेरिफाई नहीं किया था. यानी फर्जी कागजों पर एडमिशन हो गए और किसी ने इसे चेक तक नहीं किया.
दूसरा मामला है रिम्स में सफाई के टेंडर में गड़बड़ी का. इसमें भी अनियमितता बरतने के आरोप लगे हैं.
इस मसले पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उनके पास यह जानकारी आई थी कि यूजी और पीजी कोर्स की काउंसलिंग के दौरान फर्जी जातीय, आवासीय और विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन हुए हैं.
मंत्री अंसारी ने इसे बर्दाश्त नहीं करने वाली बात बताई. उन्होंने साफ कहा कि प्राइवेट और सरकारी, दोनों तरह के कॉलेजों में हुए नामांकन की जांच की सिफारिश पहले ही की गई थी और इसी सिफारिश के आधार पर अब सीआईडी कार्रवाई कर रही है.
सत्यजीत कुमार