झारखंड में मानवता शर्मसार! नवजात की डेडबॉडी कागज के डिब्बे में भरकर घर ले गया विवश पिता

पश्चिमी सिंहभूमि जिले के चाईबासा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां एक पिता को नवजात के शव को डिब्बे में लेकर घर लौटने को मजबूर होना पड़ा. इस घटना ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं.

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कागज के बॉक्स में बच्चे का शव लिए परिजन.(Photo: Satyajit/ITG) कागज के बॉक्स में बच्चे का शव लिए परिजन.(Photo: Satyajit/ITG)

सत्यजीत कुमार

  • पश्चिमी सिंहभूमि,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:49 AM IST

पश्चिमी सिंहभूमि जिले के चाईबासा में अनुमंडल अस्पताल से एक ऐसी दिल को कचोटने वाली घटना सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और असंवेदनशील रवैये के कारण एक गरीब पिता को अपने नवजात शिशु के शव को कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा. इस घटना की तस्वीर सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश और पीड़ा का माहौल है.

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परिजनों ने अस्पताल पर लगाया मदद नहीं करने का आरोप

जानकारी के अनुसार कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम ने तीन दिन पहले अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था. शनिवार को रीता तिरिया ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद नवजात की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण ही बच्चे की जान नहीं बच सकी.

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परिजनों का कहना है कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिवार को कोई सहयोग या सहानुभूति देने के बजाय शव को तुरंत अस्पताल से हटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब पिता ने शव को घर तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस की मांग की, तो अस्पताल की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई.

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जिसने भी देखा, आंखें हो गईं नम

गरीबी और बेबसी के बीच पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम ने अंततः एक खाली कार्डबोर्ड के डिब्बे में अपने नवजात के शव को रखा और उसी हालत में उसे लेकर घर के लिए रवाना हो गए. अपने ही बच्चे के शव को डिब्बे में लेकर जाते पिता का यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं.
घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के गांवों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में ग्रामीण और गरीब मरीजों के साथ अक्सर उपेक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है.

यदि अस्पताल प्रशासन चाहता तो मानवता के नाते एम्बुलेंस से शव को घर तक पहुंचाया जा सकता था. ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है. साथ ही दोषी स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने व पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई है. ताकि भविष्य में किसी गरीब परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े.

पीड़ित परिवार ने शव ले जाने की परेशानी की कोई जानकारी नहीं दी: डॉ. अंशुमन

इस मामले में चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अंशुमन शर्मा ने कहा है कि पीड़ित परिवार द्वारा उनसे संपर्क कर शव ले जाने के लिए किसी तरह की सहायता की मांग नहीं की गई थी. अगर मांग की जाती तो व्यवस्था उपलब्ध थी. ममता वाहन में बच्चे के शव को ले जाने के लिए उन्हें सुविधा दी जा सकती थी. लेकिन दुर्भाग्य से पीड़ित परिवार अपनी समस्या से उस वक्त अस्पताल प्रबंधन को सूचित नहीं कर पाई.

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जानकारी के अभाव में यह समस्या उत्पन्न हुई है. उनके द्वारा सभी मरीज को हर संभव मदद की जाती है ताकि मरीज को उचित इलाज मिल सके और उन्हें कोई परेशानी ना हो. इस मामले के सामने आने के बाद वे भी दुखी हैं. डॉ. अंशुमन ने सभी मरीजों और उनके परिजनों से यही अपील की है कि अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर से अपनी परेशानी जरूर बताएं, ताकि समय रहते अस्पताल त्वरित संभव मदद कर सके और ऐसी परिस्थिति से किसी को भी गुजरना ना पड़े.

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