'PoK वाले आज भारत में शामिल होने को लड़ रहे होते, अगर...', जम्मू-कश्मीर CM उमर अब्दुल्ला का दावा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दावा किया कि 2019 में अगर जम्मू-कश्मीर के हालात बदले न होते तो आज पाक अधिकृत कश्मीर के लोग भारत में शामिल होने के लिए सड़क पर आंदोलन कर रहे होते.

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सीएम उमर अबदुल्ला ने दावा किया कि 2019 में हालात न बदले होते तो आज Pok भारत में शामिल होने के लिए लड़ रहा होता. (फोटो-PTI) सीएम उमर अबदुल्ला ने दावा किया कि 2019 में हालात न बदले होते तो आज Pok भारत में शामिल होने के लिए लड़ रहा होता. (फोटो-PTI)

aajtak.in

  • श्रीनगर,
  • 15 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम हुआ. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्टेडियम में तिरंगा फहराया. इस मौके पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर 2019 में जम्मू-कश्मीर के हालात न बदले जाते, तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK के लोग आज भारत के साथ फिर से जुड़ने के लिए खुद सड़कों पर आंदोलन कर रहे होते.

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मुख्यमंत्री ने यह बात पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में चल रहे हालिया विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में कही. उन्होंने कहा कि आज उस पार के हालात देखकर साफ पता चलता है कि हमारे पुरखों का फैसला बिल्कुल सही था. 1947 में जब पाकिस्तान समर्थित कबाइलियों ने हमला किया था, तब हमारे बुजुर्गों ने 'हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार' का नारा देकर उनका डटकर मुकाबला किया था.

उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि वह हिस्सा आज भी हमारा है और हम उसे अपना मानते हैं. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आज भी उनके लिए सीटें खाली छोड़ी गई हैं. इस उम्मीद के साथ कि एक दिन वे लोग फिर से हमारे साथ आकर जुड़ सकेंगे. अपने इस भाषण में उन्होंने राज्य का पुराना दर्जा वापस पाने और लोकतंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई.

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दरअसल, 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हमेशा के लिए हटा दिया था. इस फैसले के बाद राज्य का विशेष दर्जा खत्म हो गया और वहां देश का संविधान वहां पूरी तरह लागू हो गया. इससे कश्मीर का अलग झंडा और अलग कानून का सिस्टम खत्म हो गया. सरकार ने इस क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम से दो नए केंद्र शासित प्रदेश बना दिए. इसके बाद यह पूरा इलाका भारत के मुख्य हिस्से से सीधे तौर पर जुड़ गया.

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'राज्य का पुराना और विदेष दर्जा वापस लाने के लिए कर रहे काम'

मुख्यमंत्री ने अपनी स्पीच में जनता को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ा बयान दिया. उन्होंने साफ कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है. सरकार राज्य का पुराना और विशेष दर्जा वापस लाने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि हम जनता के हर हक और अधिकार की रक्षा करेंगे.

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से जो संवैधानिक गारंटी और विशेष अधिकार छीने गए थे, उन्हें वापस पाना हमारा मुख्य लक्ष्य है. उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि सरकार उन लोगों के सपनों को जरूर पूरा करेगी जो आजादी की लड़ाई में शहीद हुए थे.

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 उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि राज्य का पुराना रुतबा और पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल हो. सरकार लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इससे राज्य में तरक्की और खुशहाली का एक नया दौर शुरू होगा.

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत हमारा लोकतंत्र और संघवाद यानी फेडरलिज्म है. लोकतंत्र को हर कीमत पर जिंदा रखना हमारी बड़ी जिम्मेदारी है.

उन्होंने केंद्र सरकार पर बात करते हुए कहा कि भारत केवल कागजों पर नहीं बल्कि दिल से राज्यों का संघ है. जब हम संघवाद को मजबूत करने की बात करते हैं, तो इसकी शुरुआत जम्मू-कश्मीर से होनी चाहिए. जो कुछ भी हमसे छीना गया है, वह हमें वापस मिलना चाहिए.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि संघवाद का मतलब सिर्फ किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य बनाना नहीं है, बल्कि राज्यों को अधिक मजबूत करना है. जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों के कामों में दखल देती हैं, तो संघीय ढांचा कमजोर होता है.

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परीक्षा प्रणालियों और युवाओं के प्रदर्शन पर भी की बात

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उमर अब्दुल्ला ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के बदलते स्वरूप को लेकर भी बड़ी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि नीट, एनटीए और जेईई जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं के आने से राज्यों के अधिकार कम हुए हैं.

पहले मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन देने का पूरा अधिकार राज्यों के पास होता था. अब इस व्यवस्था के बदलने से छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसी वजह से देश की राजधानी दिल्ली और अन्य जगहों पर छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा.

उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के कारण हमारे युवाओं को भी सड़कों पर आना पड़ा. किसी भी व्यवस्था की साख को मिटाना बहुत आसान होता है, लेकिन उसे वापस बनाने में सालों की मेहनत लगती है.

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अपनी स्पीच के आखिर में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र में सरकार, विपक्ष और मीडिया, तीनों की भूमिका बहुत अहम होती है. सरकार की मुख्य जिम्मेदारी जनता के हित में ईमानदारी से काम करना है. 

उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार से तीखे सवाल पूछना और उसे पूरी तरह जवाबदेह बनाना है. मीडिया का काम इन सबकी निष्पक्ष और सटीक खबर जनता तक पहुंचाना है. सभी को अपनी यह जिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि मैदान में पूरी ईमानदारी से निभानी चाहिए ताकि जनता का विश्वास हमेशा बना रहे.

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