उमर अब्दुल्ला ने रखा पूर्ण राज्य का प्रस्ताव, फिर हाथापाई तक पहुंच गया हंगामा, आखिर ऐसा क्या हुआ?

सीएम उमर ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव रखा. इसमें 26 जून 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव के संदर्भ का बीजेपी ने विरोध किया. इस पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ. देखते ही देखते नौबत हाथापाई तक पहुंच गई.

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विधानसभा में बीजेपी विधायकों का हंगामा. विधानसभा में बीजेपी विधायकों का हंगामा.

सुनील जी भट्ट

  • श्रीनगर,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:47 PM IST

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को भारी हंगामा हुआ. सीएम उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश को तत्काल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया तो बीजेपी विधायकों ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने 2000 में तत्कालीन राज्य विधानसभा द्वारा पारित एक विवादास्पद प्रस्ताव पर आपत्ति जताई. 

विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए. एनसी (नेशनल कॉन्फ्रेंस) विधायकों से उनकी तीखी बहस हुई. नौबत हाथापाई की आ गई. अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीट पर लौटने के लिए कहा लेकिन उन्हें अनसुना किया गया. हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष ने सदन को 30 मिनट के लिए स्थगित किया. 

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पुराने प्रस्ताव से बवाल मच गया

सीएम अब्दुल्ला की ओर से पेश प्रस्ताव में कहा गया है, इस सदन द्वारा 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पारित प्रस्तावों के अतिरिक्त सदन केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को तत्काल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की अपील करती है. साथ ही यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाए.

मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर स्वागत किया. हालांकि, 2000 के प्रस्ताव के संदर्भ में बीजेपी विधायकों ने विरोध किया. विक्रम रंधावा ने जमकर हंगामा किया. इस वजह से उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया गया.

फारूक सरकार लाई थी ये प्रस्ताव

बीजेपी सदस्यों ने जून 2000 में एनसी सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर आपत्ति जाहिर की. बता दें कि फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने 26 जून 2000 को प्रस्ताव पारित किया था. इसमें 9 अगस्त 1953 से पहले मौजूद अधिक स्वायत्तता की बहाली की मांग की गई थी.

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बीजेपी विधायक पठानिया क्या बोले?

इसके बाद 6 नवंबर 2024 को सदन ने विशेष दर्जा बहाल करने की मांग करते हुए एक और प्रस्ताव पारित किया. बीजेपी विधायक आरएस पठानिया का कहना है कि हम सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे क्योंकि नियमों का उल्लंघन हुआ. मुख्यमंत्री ने सदन में प्रस्ताव पेश करने से पहले ही उसे पढ़कर सुनाया और उन्होंने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ दीं.

बीजेपी के हंगामे पर सीएम ने क्या कहा?

इस हंगामे के बाद मुख्यमंत्री ने बीजेपी विधायकों पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के पक्ष में मतदान करने से बचने के लिए विधानसभा में हंगामा करने का आरोप लगाया. मुख्यमंत्री ने कहा, आज सबने देखा है कि बीजेपी ने इस प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया दी है. वे राज्य के दर्जे पर मतदान नहीं करना चाहते. वे किसी न किसी बहाने से इस मतदान से पीछे हटना चाहते हैं. वहीं, हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही 28 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई.

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