भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने रविवार को लेह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की स्थायी लद्दाख बेंच का उद्घाटन किया. इससे लद्दाख के लोगों को न्यायिक सेवाएं उनके करीब मिल सकेंगी. इस मौके पर हाईकोर्ट की एक औपचारिक बैठक भी हुई.
इस बैठक की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने की. उन्होंने कहा कि लद्दाख में स्थायी बेंच की स्थापना से लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है.
दुर्गम रास्तों और मौसम से मिलेगी राहत
जस्टिस भाटी ने कहा कि लद्दाख के लोगों को अपने मामलों के लिए पहले श्रीनगर और जम्मू जाना पड़ता था. दुर्गम रास्तों, कठिन मौसम और लंबी यात्रा के कारण उन्हें काफी परेशानी और खर्च उठाना पड़ता था. उन्होंने कहा कि स्थायी बेंच से दूरी के कारण लोगों को न्याय पाने में होने वाली मुश्किलें कम होंगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लद्दाख की भौगोलिक स्थिति लोगों को न्यायिक व्यवस्था से दूर न करे.
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जस्टिस भाटी ने CJI सूर्यकांत के नेतृत्व की सराहना की. उन्होंने केंद्र सरकार, कानून एवं न्याय मंत्रालय और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के प्रयासों का भी जिक्र किया. जस्टिस भाटी ने कहा कि बेंच और वकीलों की जिम्मेदारी है कि वे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखें. साथ ही कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करें और लद्दाख के नाजुक पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका निभाएं.
वहीं भारत सरकार के उप सॉलिसिटर जनरल विशाल शर्मा ने कहा कि स्थायी बेंच की स्थापना न्याय तक पहुंच के संवैधानिक वादे को मजबूत करती है. इससे कानून का शासन मजबूत होगा और लोगों को संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालत जाने में आसानी होगी.
दूसरी ओर बैठक में श्रीनगर विंग के उप सॉलिसिटर जनरल ताहिर मजीद शम्सी ने 2019 के बाद लद्दाख में न्यायिक संस्थानों के विकास का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नियमित सुनवाई, डिजिटल सुविधाओं और कानूनी सहायता से लोगों की मुश्किलें कम हो सकती हैं.
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लेह और कारगिल बार एसोसिएशन ने बताया अहम कदम
लेह बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गोंबो स्तोबग्याल ने स्थायी बेंच की स्थापना को लद्दाख के लोगों की लंबे समय से चली आ रही इच्छा की पूर्ति बताया. उन्होंने न्याय व्यवस्था के संचालन में बार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया. कारगिल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रियाज अहमद खान ने भी इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. उन्होंने न्यायिक नेतृत्व के उन प्रयासों का जिक्र किया, जिनका उद्देश्य लोगों तक न्याय को पहुंचाना है.
इस मौके पर हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने लड़कियों की शिक्षा तक बेहतर पहुंच और उनके लिए सुरक्षित, सुलभ और किफायती आवास की व्यवस्था सुधारने की जरूरत पर प्रस्ताव पारित किया. प्रस्ताव में खास तौर पर लद्दाख के दूरदराज इलाकों से आने वाली छात्राओं की मुश्किलों का जिक्र किया गया. लंबी दूरी और पर्याप्त आवास की कमी के कारण उन्हें शिक्षा हासिल करने में परेशानी हो सकती है.
हाईकोर्ट ने कानूनी जागरूकता बढ़ाने और शिक्षण संस्थानों, कानूनी सेवा प्राधिकरणों तथा अन्य संबंधित पक्षों के बीच तालमेल की जरूरत बताई. प्रस्ताव में इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए नियमित बेंच से कदम उठाने का अनुरोध किया गया.
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लद्दाख की स्थायी बेंच का उद्देश्य मामलों की सुनवाई के लिए लोगों की यात्रा और खर्च का बोझ कम करना है. इससे केंद्रशासित प्रदेश के लोगों को न्यायिक सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होने की उम्मीद है. स्थायी बेंच की स्थापना को लद्दाख में न्यायिक व्यवस्था को लोगों के करीब लाने की दिशा में अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है.
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