चंडीगढ़ पुलिस के SI और ASI पर एक्शन, इलाज से बहाने विक्रम वाधवा को जेल से ले गया था होटल

IDFC First Bank से जुड़े 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के प्रमुख आरोपी विक्रम वाधवा को मेडिकल इलाज के बहाने बुड़ैल जेल से बाहर निकालकर कथित तौर पर होटल ले जाने का मामला सामने आया है.

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IDFC First Bank घोटाले से जुड़े विक्रम वाधवा को जेल से निकालकर कथित तौर पर होटल ले जाने का मामला सामने आया.(Photo: ITG) IDFC First Bank घोटाले से जुड़े विक्रम वाधवा को जेल से निकालकर कथित तौर पर होटल ले जाने का मामला सामने आया.(Photo: ITG)

कमलजीत संधू

  • चंडीगढ़,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:16 PM IST

IDFC First Bank से जुड़े 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के प्रमुख आरोपियों में शामिल विक्रम वाधवा को लेकर नया विवाद सामने आया है. आरोप है कि मेडिकल इलाज के बहाने वाधवा को बुड़ैल जेल से बाहर निकाला गया, लेकिन उनके साथ मौजूद चंडीगढ़ पुलिसकर्मी उन्हें अस्पताल के बजाय कथित तौर पर एक होटल ले गए. मामले की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचने के बाद तुरंत कार्रवाई की गई. इस मामले में SI जगमेहर सिंह (नंबर 1778/CHG) और ASI सुरेंद्र (नंबर 3331/CP) के नाम सामने आए हैं.

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इस मामले में विक्रम वाधवा के साथ उनके बेटे करण वाधवा और कुणाल वाधवा के नाम भी सामने आए हैं. करण वाधवा की उम्र 27 साल और कुणाल वाधवा की उम्र 24 साल बताई गई है.

विक्रम वाधवा चंडीगढ़ के रियल एस्टेट डेवलपर और होटल कारोबारी हैं. वह सेक्टर-22 स्थित होटल लैंडमार्क के मालिक भी हैं. वाधवा IDFC First Bank से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित फ्रॉड के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं. यह मामला हरियाणा सरकार के विभागों, चंडीगढ़ UT प्रशासन और नगर निगम, CREST, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के खातों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के सरकारी पैसों के कथित गबन से जुड़ा है.

क्या है घोटाले का मामला

इस मामले में CBI ने 7 जून को भी बड़ी कार्रवाई की थी. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 661 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के कथित गबन से जुड़े मामले में चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-NCR में छह स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था. यह मामला IDFC फर्स्ट बैंक और AU फाइनेंस बैंक से जुड़े लेनदेन से संबंधित बताया गया था. CBI ने हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकानों पर छापेमारी की थी. जांच एजेंसी को आशंका थी कि सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी धन के खातों का संचालन किया गया, धनराशि ट्रांसफर की गई और बाद में उसे अवैध लाभ के लिए डायवर्ट किया गया.

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CBI के अनुसार, इस कथित घोटाले से हरियाणा सरकार के आठ विभाग और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के दो विभाग प्रभावित हुए थे. इनमें चंडीगढ़ नगर निगम (Municipal Corporation Chandigarh) और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST Chandigarh) भी शामिल थे. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि सरकारी धन की हेराफेरी एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई, जिसमें बैंक अधिकारियों और लोक सेवकों की अहम भूमिका थी.

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