हरियाणा के फरीदाबाद में प्राइवेट स्कूल की टीचर संध्या की 27 बार चाकू मारकर हत्या करने के मामले में अब एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी अमित और संध्या की पहचान करीब एक साल पुरानी थी. आरोपी पहले भी उन्हें लगातार परेशान करता था. मामला इतना बढ़ गया था कि गांव में दो बार पंचायत तक बुलाई गई और आरोपी ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी. इसके बावजूद उसने अपनी हरकतें नहीं छोड़ीं और आखिरकार स्कूल परिसर में घुसकर वारदात को अंजाम दे दिया.
पुराने स्कूल में हुई थी पहचान
जांच और स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, संध्या करीब एक वर्ष पहले पास के गांव कोट में एक स्कूल में पढ़ाती थीं. यह स्कूल एक किराए में संचालित होता था. जिस व्यक्ति की इमारत में स्कूल चल रहा था, आरोपी अमित उसका भतीजा बताया गया है. इसी दौरान अमित और संध्या की पहचान हुई. शुरुआत में सामान्य परिचय था, लेकिन कुछ समय बाद अमित ने संध्या को परेशान करना शुरू कर दिया. लगातार हो रही इस हरकत से परेशान होकर संध्या ने अपने परिवार और ससुराल वालों को पूरी बात बताई.
दो बार पंचायत, आरोपी ने मांगी थी माफी
मामला बढ़ने पर गांव में पंचायत बुलाई गई. पंचायत के दौरान आरोपी अमित ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी. इसके बाद कुछ समय तक मामला शांत रहा. हालांकि, परिवार के लोगों का कहना है कि इसके बावजूद संध्या ने एहतियात के तौर पर कोट गांव का स्कूल छोड़ दिया और सिकरौना स्थित दूसरे स्कूल में नौकरी शुरू कर दी. बताया जा रहा है कि इस पूरे विवाद को लेकर गांव में दो बार पंचायत हुई थी. हर बार आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन उसके व्यवहार में स्थायी बदलाव नहीं आया.
नई नौकरी, लेकिन पीछा नहीं छोड़ा
स्कूल संचालक तेजपाल शर्मा के मुताबिक, संध्या पिछले करीब एक साल से सिकरौना स्थित उनके स्कूल में पढ़ा रही थीं. उन्होंने बताया कि संध्या बेहद शांत स्वभाव की थीं. वह हमेशा मर्यादित व्यवहार करती थीं, सिर ढंककर रहती थीं और अपना पूरा ध्यान केवल पढ़ाने पर देती थीं. स्कूल में किसी से अनावश्यक बातचीत नहीं करती थीं. स्कूल प्रबंधन के अनुसार, किसी को अंदाजा भी नहीं था कि पुराना विवाद इस तरह जानलेवा रूप ले लेगा.
पति बनकर स्कूल पहुंचा आरोपी
जांच में यह भी सामने आया है कि संध्या के पति अक्सर किसी न किसी काम से स्कूल आ जाया करते थे. कभी लंच देने, कभी घर की चाबी पहुंचाने या किसी अन्य जरूरी काम से उनका स्कूल आना सामान्य बात थी. इसी बात का फायदा आरोपी अमित ने उठाया. घटना वाले दिन स्कूल के आसपास सड़क निर्माण का काम चल रहा था. धूल से बचने के लिए अधिकांश लोग चेहरा कपड़े से ढंककर चलते थे. आरोपी भी चेहरा ढंककर स्कूल पहुंचा और खुद को संध्या का पति 'विक्की' बताया. चूंकि पति का पहले भी स्कूल आना-जाना होता था, इसलिए किसी को उस पर शक नहीं हुआ. स्कूल स्टाफ ने संध्या को बाहर बुला दिया.
बाहर आते ही शुरू कर दिया हमला
जैसे ही संध्या स्कूल परिसर से बाहर आईं, आरोपी ने उन पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया. सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देता है कि आरोपी लगातार वार करता रहा. शिक्षिका बचाव के लिए चीखती रहीं. उनकी आवाज सुनकर एक व्यक्ति मदद के लिए आगे बढ़ा, लेकिन आरोपी ने उसे भी चाकू दिखाकर पीछे हटा दिया. इसके बाद आरोपी तब तक हमला करता रहा, जब तक संध्या की मौके पर ही मौत नहीं हो गई.
27 बार किए चाकू से वार
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने संध्या पर 27 बार चाकू से वार किए. वारदात के बाद वह मौके से फरार हो गया. इस पूरी घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है. वीडियो की भयावहता ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. वारदात के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी अमित को हिरासत में ले लिया. उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने हत्या की योजना कब बनाई और क्या वह पहले से स्कूल की रेकी कर रहा था.
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस घटना ने निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्कूल परिसर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान का सत्यापन किया जाता, तो शायद इस वारदात को रोका जा सकता था. संध्या की मौत के बाद उनके परिवार के साथ-साथ स्कूल में भी शोक का माहौल है. छात्र-छात्राएं और शिक्षक इस घटना से सदमे में हैं. स्कूल संचालक का कहना है कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि एक पुराना विवाद इस तरह भयावह अंजाम तक पहुंच जाएगा.
जांच में जुटी पुलिस
फरीदाबाद पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है. आरोपी से पूछताछ के अलावा उसके मोबाइल, कॉल डिटेल और पिछले गतिविधियों की भी जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने स्कूल पहुंचने और वारदात को अंजाम देने की योजना पहले से बनाई थी या नहीं. फिलहाल, इस हत्याकांड ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, पीछा करने (स्टॉकिंग) जैसे मामलों को गंभीरता से लेने और समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सचिन गौड़