'वो हमारा फैमिली मेंबर है, उसके खोने से हम सदमे में थे...' पेट डॉग और मालिक के रिश्ते की ये कहानी दिल छू लेगी

गुजरात के बनासकांठा से जानवर से लगाव की अद्भुत और दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है. यहां एक होटल से लैब्राडोर डॉग साढ़े तीन महीने पहले गायब हो गया था. इस बात से परेशान मालिक ने मां अंबाजी से मन्नत मांगी थी. अब वह डॉग अचानक वापस आ गया है. डॉग को देखते ही होटल मालिक और स्टाफ भावुक हो गया. अब सभी ने लैब्राडोर के साथ अंबाजी धाम की पदयात्रा शुरू कर दी है.

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पेट डॉग के लिए होटल मालिक ने अंबाजी से मांगी थी मन्नत. (Photo: Screengrab) पेट डॉग के लिए होटल मालिक ने अंबाजी से मांगी थी मन्नत. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • अंबाजी,
  • 02 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST

कहते हैं, जानवर बोल नहीं सकते... लेकिन उन्हें अपना घर, अपने लोग याद रहते हैं. गुजरात के बनासकांठा से आई यह कहानी इसी भरोसे की कहानी है. एक लैब्राडोर डॉग साढ़े तीन महीने पहले गायब हो गया. मालिक ने हर जगह तलाश की, फिर मां अंबाजी से मन्नत मांगी. वक्त बीता... उम्मीद भी लगभग खत्म हो गई. लेकिन एक दिन होटल के सामने एक लोडिंग रिक्शा रुका और अगले कुछ सेकेंड में ऐसा हुआ कि वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया.

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पालनपुर-सिद्धपुर हाइवे पर होटल है. यहां आने वाले पुराने ग्राहक सिर्फ होटल के खाने को ही नहीं, बल्कि वहां घूमते एक लैब्राडोर को भी पहचानते थे. उसका नाम था- टाइगर. चार साल पहले होटल मालिक कल्पेश पटेल उसे अपने साथ लाए थे. धीरे-धीरे वह होटल की पहचान बन गया. स्टाफ उसे डॉग नहीं, परिवार का सदस्य कहता था. फिर एक दिन टाइगर अचानक गायब हो गया.

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होटल मालिक का कहना है कि कुछ अज्ञात लोग उसे कार में बैठाकर ले गए थे. मालिक और कर्मचारियों ने कई दिनों तक तलाश की. आसपास के इलाकों में खोजा, लोगों से पूछा, लेकिन टाइगर का कोई पता नहीं चला. करीब साढ़े तीन महीने बीत चुके थे.

एक दिन होटल के सामने से एक लोडिंग रिक्शा गुजर रहा था. उसमें बंधे एक डॉग पर होटल कर्मचारियों की नजर पड़ी. किसी ने सहज ही आवाज लगाई- टाइगर... बस... अगले ही पल कहानी बदल गई. डॉग ने आवाज पहचान ली. वह तुरंत रिक्शे से उतरकर होटल की तरफ दौड़ा और जाकर उसी जगह बैठ गया, जहां वह पहले बैठा करता था. इतने महीनों बाद अपने साथी को सामने देखकर होटल मालिक और स्टाफ की आंखें भर आईं.

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टाइगर के लापता होने के बाद कल्पेश पटेल ने मां अंबाजी से मन्नत मांगी थी कि अगर टाइगर सही-सलामत लौट आया, तो वह उसके साथ पैदल अंबाजी धाम जाएंगे. और जब टाइगर वापस आया, तो उन्होंने इंतजार नहीं किया. अपनी तीनों होटल कुछ समय के लिए बंद किए. पूरा स्टाफ साथ लिया. टाइगर को भी साथ चलाया और पालनपुर से अंबाजी तक करीब 60 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू कर दी.

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रास्ते में भजन गूंजे, गरबा हुआ और इस अनोखी यात्रा को देखने के लिए लोग रुक-रुककर वीडियो बनाते रहे. कई लोगों के लिए यह सिर्फ यात्रा नहीं, इंसान और उसके पालतू साथी के बीच भरोसे की मिसाल थी. होटल मालिक कहते हैं कि टाइगर हमारे परिवार का सदस्य है. उसके वापस आने को हम मां अंबाजी का आशीर्वाद मानते हैं. होटल मैनेजर सनथ पटेल बताते हैं कि जैसे ही टाइगर मिला, पूरे स्टाफ ने तय कर लिया कि अब मन्नत पूरी करनी ही है. इसलिए सभी लोग उसके साथ अंबाजी निकल पड़े.

होटल मैनेजर ने कहा कि यह हमारे होटल की शान है. जब से अनजान लोग इसे कार में ले गए थे, हम सदमे में थे. मां अंबे ने हमारी प्रार्थना सुनी और टाइगर वापस आ गया. इसीलिए हम नाचते-गाते माताजी के दर पर अपनी मन्नत पूरी करने आए हैं. होटल मालिक कल्पेश पटेल ने कहा कि हमने हमारे प्यारे डॉग के लिए मन्नत मांगी थी, हम इसे 4 साल पहले लाए थे.

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एक तरफ वह डॉग, जिसने महीनों बाद भी अपने लोगों की आवाज पहचान ली. दूसरी तरफ वे लोग, जिन्होंने उसे कभी 'जानवर' नहीं समझा, बल्कि परिवार का हिस्सा माना. यह कहानी लैब्राडोर के साथ उस रिश्ते की कहानी है, जिसमें न कोई भाषा है, न कोई शर्त... सिर्फ अपनापन है.

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(रिपोर्ट: शक्तिसिंह परमार जगतसिंह)

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