आमतौर पर घर में बच्चे के जन्म की खबर आती है तो मिठाई बंटती है. ढोल बजते हैं. रिश्तेदार आते हैं, लेकिन अगर किसी परिवार में दूसरी बेटी पैदा हो जाए तो? समाज के कुछ हिस्सों में यहां कहानी थोड़ी बदल जाती है. सवाल शुरू हो जाते हैं- अब तो बेटा हो जाए. लेकिन गुजरात के मेहसाणा में एक कारोबारी परिवार ने इस सोच को ही उल्टा कर दिया.
यहां घर में दूसरी बेटी आई तो परिवार ने कहा कि अब जश्न ऐसा होगा कि सबको पता चलेगा कि बेटी आई है. फिर क्या था. घर सजाया गया. आतिशबाजी हुई. केक काटा गया. परिवार के लोग नाचे. बेटी के जन्म की खुशी में बाकायदा भव्य वरघोड़ा निकाला गया. ऊपर से म्यूजिकल नाइट का भी आयोजन हुआ.
ये कहानी है मेहसाणा के बारोट परिवार की. परिवार में दूसरी बेटी का जन्म हुआ है. बेटी के आने से उसके माता-पिता सौरभ और अंकिता बारोट बेहद खुश हैं. इस खुशी की एक खास वजह और है- इस परिवार ने बेटी के जन्म को समाज के सामने एक संदेश की तरह रखा. सौरभ बारोट कारोबारी परिवार से आते हैं. उनका कहना है कि जब दूसरी संतान होने वाली थी तो आसपास के लोगों को उम्मीद थी कि अब बेटा होगा.
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यानी वही सोच कि एक बेटी हो गई, अब बेटा होना चाहिए. लेकिन सौरभ और उनके परिवार ने इस सोच को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. दूसरी बेटी के जन्म के बाद परिवार ने साफ कर दिया कि उनके लिए बेटा और बेटी बराबर हैं. बल्कि बेटी के आने की खुशी में ऐसा समारोह किया गया, जिसे देखने वाले भी चर्चा करने लगे.
अंकिता बारोट बताती हैं कि अक्सर एक बेटी के बाद परिवार में बेटे की चाह देखी जाती है. लेकिन उनके ससुराल वालों ने दूसरी बेटी के जन्म को जिस तरह सेलिब्रेट किया, वह उनके लिए बेहद खास है. अंकिता के लिए उनकी दोनों बेटियां सिर्फ बेटियां नहीं हैं, वह उन्हें अपनी जिंदगी की दो सबसे अच्छी सहेलियां मानती हैं.
दादा बोले- बेटा-बेटी में फर्क ही क्यों?
बच्ची के दादा अनिल बारोट मेहसाणा में केमिकल का कारोबार करते हैं. पोती के जन्म पर उन्होंने पूरे परिवार को साथ लेकर इसे एक बड़े उत्सव में बदल दिया. उनकी सोच बिल्कुल सीधी है- जब खुशी बच्चा आने की है, तो फिर बेटा-बेटी में फर्क क्यों? अनिल बारोट कहते हैं कि समाज में आज भी बेटे और बेटी के जन्म को अलग-अलग नजर से देखने की आदत है. कहीं बेटी पैदा होने पर जलेबी बांटी जाती है और बेटे के जन्म पर पेड़े. बारोट परिवार ने इस फर्क को ही खत्म करने की कोशिश की.
परिवार ने पहले से तय कर रखा था कि अगर बेटी आएगी तो उसका स्वागत पूरे सम्मान और धूमधाम से किया जाएगा. और जब बच्ची आई तो जश्न मना. घर सजा. परिवार जुटा. केक कटा. आतिशबाजी हुई. लोग नाचे और फिर बेटी के स्वागत में वरघोड़ा निकाला गया.
परिवार ने बेटी के जन्म पर पटाखे चलाए, जुलूस निकाला. परिजनों का कहना है कि दोनों बेटियों को अच्छी और उच्च शिक्षा दिलाएंगे. उसके भविष्य की तैयारी का संकल्प भी लिया गया है. परिवार चाहता है कि उनकी बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने पैरों पर खड़ी हों.
मनीष मिस्त्री