गुजरात के कच्छ जिले में बच्चों की देखभाल के लिए बनाए गए शेल्टर होम से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने वहां रहने वाले मासूमों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भुज तालुका के गड़ा गांव में भुजोड़ी ओवरब्रिज के पास स्थित एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज (SOS Children's Village) में एक हाउस मदर पर आठ नाबालिग लड़कों के साथ कथित तौर पर मारपीट करने, गालियां देने और उनके चेहरों पर मानव मल लगाने का आरोप लगा है. सभी बच्चे 14 साल से कम उम्र के बताए गए हैं. मामले की शिकायत मिलने के बाद जांच की गई और अब पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. शेल्टर होम प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं.
आरोपों के मुताबिक, शेल्टर होम में बच्चों की रोजाना देखभाल की जिम्मेदारी संभालने वाली हाउस मदर लतीफा बेगम छोटी-छोटी बातों पर बच्चों को पीटती थी और उन्हें अपशब्द कहती थी. इतना ही नहीं, आरोप है कि उसने आठ बच्चों के चेहरों पर मानव मल भी लगाया. यह कथित घटना मई महीने की बताई जा रही है. शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों को देखभाल और सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन इस मामले में उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की बात सामने आई है. शिकायत में कहा गया है कि इस व्यवहार से बच्चे गहरे सदमे और मानसिक तनाव में थे. मामले की जांच के दौरान बच्चों के बयान दर्ज किए गए, जिनके आधार पर कथित घटना से जुड़ी जानकारी सामने आई.
5 अक्टूबर को ईमेल से मिली शिकायत
जिला बाल संरक्षण इकाई, कच्छ-भुज के जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) विपुल डोरिया को 5 अक्टूबर को ईमेल के जरिए इस मामले की शिकायत मिली थी. शिकायत मिलने के बाद उन्होंने मामले की जांच शुरू की. इस दौरान पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज किए गए. जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कथित अमानवीय व्यवहार मई महीने में हुआ था. शिकायत के आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को इसकी जानकारी दी गई. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बच्चों के साथ वास्तव में क्या हुआ और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार है.
इस मामले में केवल हाउस मदर के व्यवहार पर ही नहीं, बल्कि शेल्टर होम प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि प्रबंधन को घटना की जानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय आरोपी महिला का तबादला कर दिया गया. इसके साथ ही आंतरिक जांच शुरू की गई, लेकिन शिकायत के मुताबिक उसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया. इन आरोपों के बाद यह सवाल भी जांच का हिस्सा है कि घटना की जानकारी मिलने पर प्रबंधन ने क्या कदम उठाए और क्या बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कार्रवाई की गई. हालांकि, प्रबंधन की भूमिका और कथित लापरवाही से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
पश्चिम कच्छ के एसपी विकास सुंडा के मुताबिक, जिला बाल संरक्षण अधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर माधपर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है. इसमें हाउस मदर लतीफा बेगम और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है. पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत दर्ज किया है, जो स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, सार्वजनिक स्थल पर अश्लील कृत्य या शब्दों के इस्तेमाल और आपराधिक बल प्रयोग से संबंधित हैं. इसके अलावा किशोर न्याय (जुवेनाइल जस्टिस) अधिनियम के तहत बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों के प्रति क्रूरता और शारीरिक दंड से संबंधित प्रावधान भी लगाए गए हैं.
बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदारी की जांच
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है. जांच में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार, घटना की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न किए जाने के आरोप और शेल्टर होम प्रबंधन की भूमिका की पड़ताल की जाएगी. साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि इस मामले में अन्य कौन लोग जिम्मेदार हो सकते हैं. शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों की देखभाल और सुरक्षा इस मामले का सबसे अहम पहलू है. आठ बच्चों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार की शिकायत के बाद अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना कैसे हुई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है.
कौशिक कांठेचा