22 साल के बेटे की मौत के बाद मां ने लिया ऐसा फैसला, पहली बार 'धड़कते दिल' को लेकर दौड़ी वंदे भारत

भरूच जिले में ब्रेन डेड घोषित 22 वर्षीय अतुल पटेल के अंगदान ने कई लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद दी. पहली बार देश में वंदे भारत एक्सप्रेस को अंकलेश्वर स्टेशन पर विशेष स्टॉपेज देकर उनके दिल को अहमदाबाद पहुंचाया गया. ग्रीन कॉरिडोर, रेलवे और पुलिस के समन्वय से यह पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई.

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सड़क हादसे के बाद डॉक्टरों ने किया ब्रेन डेड घोषित. (Photo: Screengrab) सड़क हादसे के बाद डॉक्टरों ने किया ब्रेन डेड घोषित. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • भरूच,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:52 PM IST

गुजरात के भरूच जिले के हांसोट तालुका स्थित अलवा गांव के 22 वर्षीय अतुल भावेशभाई पटेल की जिंदगी एक सड़क हादसे के बाद भले ही खत्म हो गई, लेकिन उनके अंगों ने कई लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद दे दी. इस पूरे घटनाक्रम में एक ऐसा ऐतिहासिक पल भी दर्ज हुआ, जब पहली बार देश में वंदे भारत एक्सप्रेस को किसी अंग प्रत्यारोपण के लिए विशेष स्टॉपेज दिया गया. इस व्यवस्था की बदौलत अतुल का दिल समय पर अहमदाबाद पहुंचाया जा सका, जहां एक जरूरतमंद मरीज के प्रत्यारोपण के लिए इसका उपयोग किया जाएगा.

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अतुल भावेशभाई पटेल भरूच जिले के अंकलेश्वर स्थित शक्तिकेम कंपनी में हेल्पर के तौर पर काम करते थे. 29 जुलाई को वह अपनी नौकरी से वापस लौट रहे थे, तभी रास्ते में उनका गंभीर सड़क हादसा हो गया. हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं. उन्हें तुरंत इलाज के लिए अंकलेश्वर के जयाबेन मोदी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनका इलाज करती रही.

डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. आखिरकार 1 अगस्त को डॉक्टरों की टीम ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया. यह खबर परिवार के लिए बेहद दुखद थी. ऐसे कठिन समय में अस्पताल और डोनेट लाइफ संस्था की टीम ने अतुल के परिवार से अंगदान के बारे में बातचीत की और उन्हें इसका महत्व समझाया.

अस्पताल और डोनेट लाइफ संस्था के प्रयासों के बाद अतुल की मां रंजनबेन, भाई दीपक और अन्य परिजनों ने दुख की इस घड़ी में भी बड़ा फैसला लिया और अंगदान के लिए अपनी सहमति दे दी. बेटे को खोने का दर्द सह रही मां रंजनबेन ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि शरीर तो आखिर राख ही हो जाना है. अगर मेरे बेटे के अंगों से किसी को नया जीवन मिलता है तो इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं हो सकता.

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परिजनों की सहमति के बाद अंगदान की पूरी प्रक्रिया शुरू की गई. इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती अतुल के दिल को समय पर अहमदाबाद पहुंचाने की थी ताकि उसका प्रत्यारोपण निर्धारित समय के भीतर किया जा सके. इसके लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया.

देश में पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस को अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन पर विशेष स्टॉपेज दिया गया. रेलवे प्रशासन के सहयोग से अतुल के दिल को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जयाबेन मोदी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल से अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया गया. वहां से दिल को सुरक्षित तरीके से वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से अहमदाबाद रवाना किया गया. इस विशेष व्यवस्था ने समय बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंग को तय समय के भीतर गंतव्य तक पहुंचाना संभव हो सका.

पूरी प्रक्रिया के दौरान भरूच जिला पुलिस और राज्य पुलिस ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अंगों को सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए दो अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए थे. पहला ग्रीन कॉरिडोर अतुल के दिल के लिए तैयार किया गया. यह कॉरिडोर जयाबेन मोदी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल से अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन तक बनाया गया था, ताकि दिल को बिना किसी रुकावट के स्टेशन तक पहुंचाया जा सके.

दूसरा ग्रीन कॉरिडोर अस्पताल से अहमदाबाद स्थित आईकेडीआरसी तक सड़क मार्ग पर बनाया गया. इस कॉरिडोर के जरिए किडनी, लीवर और अग्न्याशय को सुरक्षित रूप से अहमदाबाद भेजा गया. अतुल के अंगदान से कई जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिलने जा रही है. उनके दिल का प्रत्यारोपण अहमदाबाद के 25 वर्षीय एक युवक में किया जाएगा. वहीं लीवर, किडनी और अग्न्याशय का प्रत्यारोपण अन्य जरूरतमंद मरीजों को किया जाएगा. इसके अलावा अतुल की आंखों का दान अंकलेश्वर की जी.सी. नाहर रोटरी आई बैंक ने स्वीकार किया है.

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इस पूरे अंगदान अभियान को सफल बनाने में डोनेट लाइफ संस्था की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. संस्था के संस्थापक और अध्यक्ष नीलेश मांडलेवाला के मार्गदर्शन में पूरी प्रक्रिया को समन्वित किया गया. डॉक्टरों की टीम ने चिकित्सा संबंधी सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी कीं, जबकि पुलिस और रेलवे प्रशासन ने अंगों को बिना देरी के गंतव्य तक पहुंचाने में पूरा सहयोग दिया.

इस अभियान में डीवायएसपी डॉ. कुशल ओझा, पुलिस प्रशासन, मंत्री ईश्वरसिंह पटेल, विधायक रमेश मिस्त्री, डीएचओ डॉ. मुनीरा शुक्ला और रेलवे प्रशासन का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा. सभी विभागों के समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई के कारण अंगदान की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो सकी.

22 वर्षीय अतुल पटेल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका लिया गया अंतिम निर्णय और उनके परिवार का साहस कई लोगों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन गया. साथ ही, वंदे भारत एक्सप्रेस को विशेष स्टॉपेज देकर दिल को समय पर अहमदाबाद पहुंचाने की यह पहल देश में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उदाहरण बन गई.

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रिपोर्ट- विक्की जोशी

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