अहमदाबाद के हंसपुरा क्षेत्र की एक दुकान बाहर से आम नजर आती थी, लेकिन इसके अंदर बैठकर अमेरिकी नागरिकों को ठगने का खेल चल रहा था. लैपटॉप पर बैठे सात लोग अमेरिकी नागरिकों को बैंक का वकील बनकर ईमेल भेजते थे.
ये लोग लोन सस्ता कराने का झांसा देकर पहले भरोसा जीतते और फिर क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर बैंक खातों से पैसे निकालते. नरोडा पुलिस ने छापा मारकर इस फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है.
कैसे करते थे ठगी?
पुलिस ने इस मामले में दो युवतियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर का संचालन जिग्नेश झालाहर कर रहा था. उसे अमेरिकी नागरिकों के ईमेल पते और बैंक से जुड़े डेटा दिए जाते थे. इसके बाद पहले से तैयार स्क्रिप्ट के जरिए लोगों को ईमेल भेजे जाते थे. इन संदेशों में खुद को बैंक का वकील बताकर कम कीमत में लोन सेटलमेंट कराने का ऑफर दिया जाता था.
पुलिस के मुताबिक, जैसे ही कोई व्यक्ति ईमेल का जवाब देता, जिग्नेश खुद उससे बातचीत करता था. सस्ते लोन सेटलमेंट का लालच देकर उससे क्रेडिट कार्ड की पूरी जानकारी हासिल की जाती थी. इसके बाद यह जानकारी टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए अलग-अलग वेंडरों को भेजी जाती थी. इसके बाद अमेरिकी नागरिकों के बैंक खातों से तय रकम काटी जाती थी.
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ठगी की रकम को सीधे भारतीय रुपये में लाने के बजाय बिटकॉइन के जरिए जिग्नेश के क्रिप्टो वॉलेट में भेजा जाता था. बाद में बिटकॉइन को भारतीय मुद्रा में बदला जाता और ‘आंगड़िया प्रणाली’ के जरिए रकम हासिल की जाती थी. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब 10 लाख लोगों को बल्क मैसेज भेजे थे. इनमें से 200 से ज्यादा लोगों के ठगी का शिकार होने की आशंका है और करीब 38 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आशंका है.
आंगड़िया प्रणाली क्या है?
आंगड़िया भारत का एक सदियों पुराना और अनौपचारिक समानान्तर बैंकिंग या कूरियर नेटवर्क है, जो मुख्य रूप से गुजरात और महाराष्ट्र (विशेषकर मुंबई) के व्यापारियों के बीच काम करता है. रकम को बिना किसी कानूनी रिकॉर्ड या बैंकिंग ट्रेल के गंतव्य तक पहुंचाने के लिए आंगड़िया प्रणाली यानी Angadiya System का सहारा लिया जाता है.
2.60 लाख रुपये का सामान जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने सात लैपटॉप और आठ मोबाइल फोन समेत करीब 2.60 लाख रुपये का सामान जब्त किया. पुलिस के अनुसार, यह कॉल सेंटर पिछले पांच से छह महीनों से चल रहा था और आरोपियों को करीब 10 हजार रुपये महीने की सैलरी दी जाती थी. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अमेरिकी नागरिकों का डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. टेलीग्राम ग्रुप और क्रिप्टो वॉलेट की भी जांच की जा रही है.
ब्रिजेश दोशी