दिल्ली में 1300 से ज्यादा PG का हुआ सर्वे, सिर्फ 3 इमारते मिलीं खतरनाक

दिल्ली नगर निगम ने PG इमारतों की सुरक्षा के लिए व्यापक सर्वे किया गया. इसमें 1355 इमारतों की जांच की गई. केवल 3 इमारतें खतरनाक पाई गईं जिनमें 69 लोग रह रहे हैं. 9 इमारतों में बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है. वहीं 39 में छोटी मरम्मत की है. सत्य निकेतन हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है.

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सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में MCD का एक्शन तेज हो गया है. (Photo-ITG) सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में MCD का एक्शन तेज हो गया है. (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:56 PM IST

दिल्ली में PG इमारतों की सुरक्षा को लेकर चल रहे सर्वे में बड़ा खुलासा हुआ है. नगर निगम की अब तक की जांच में 1355 PG इमारतों को शामिल किया गया है. इनमें सिर्फ 3 इमारतें ऐसी मिली हैं, जिन्हें देखने में ही खतरनाक माना गया है. इन तीनों इमारतों में कुल 69 लोग रह रहे हैं. वहीं 9 दूसरी इमारतों में बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत मिली है.

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यह सर्वे साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG बिल्डिंग गिरने के बाद शुरू किया गया था. इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद दिल्ली में PG और दूसरी इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे. अब MCD ने अलग-अलग इलाकों में इमारतों की जांच तेज कर दी है.

MCD के अधिकारियों ने बताया कि सर्वे में अब तक 1304 PG इमारतें देखने में सुरक्षित पाई गई हैं. इन इमारतों में करीब 26 हजार 917 लोग रह रहे हैं. वहीं 3 इमारतों को देखने में खतरनाक पाया गया है. इन तीनों में 69 लोग रहते हैं.

ये तीनों खतरनाक इमारतें साउथ जोन-1 में मिली हैं. इस इलाके में अभी सर्वे का काम जारी है. ऐसे में आने वाले दिनों में आंकड़ों में बदलाव हो सकता है.

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सर्वे के दौरान 9 PG इमारतों को ऐसी भी पाया गया है, जिनमें बड़े लेवल पर मरम्मत की जरूरत है. इन इमारतों में कुल 140 लोग रहते हैं. इनमें 5 इमारतें केशव पुरम में हैं. इनमें 36 लोग रहते हैं. नजफगढ़ में 2 इमारतें मिली हैं, जिनमें 38 लोग रहते हैं. वहीं साउथ जोन-2 में 2 इमारतों में 66 लोग रह रहे हैं.

39 इमारतों में छोटी मरम्मत की जरूरत

MCD के सर्वे में 39 और PG इमारतें ऐसी मिली हैं, जहां छोटी-मोटी मरम्मत की जरूरत है. इन इमारतों में कुल 664 लोग रहते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसी इमारतों की भी पहचान की गई है, जिन्हें भविष्य के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है.

सिविल लाइंस में G+4 से ज्यादा ऊंची 21 ऐसी इमारतें मिली हैं. इनमें करीब 420 लोग रहते हैं. शाहदरा साउथ जोन-2 में ऐसी 57 इमारतें मिली हैं. इनमें 2036 लोग रह रहे हैं. करोल बाग में 7 इमारतों में 106 लोग रहते हैं. शाहदरा साउथ जोन-1 में 5 और नजफगढ़ में 2 ऐसी इमारतों की पहचान हुई है.

MCD ने सर्वे के साथ कार्रवाई भी तेज कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि 7 सितंबर को 7 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई हुई. 8 सितंबर को 17 और 9 सितंबर को 46 संपत्तियों पर कार्रवाई की गई. 10 सितंबर को 41 संपत्तियों पर कार्रवाई हुई. यानी चार दिनों में कुल 111 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई.

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इसी दौरान 88 प्रॉपर्टीज को सील भी किया गया. 7 सितंबर को 2, 8 सितंबर को 5, 9 सितंबर को 20 और 10 सितंबर को 61 संपत्तियां सील की गईं. MCD ने अवैध निर्माण को लेकर 91 कारण बताओ नोटिस जारी किए. सीलिंग कार्रवाई से जुड़े 69 नोटिस भी दिए गए. इसके अलावा 34 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ के आदेश जारी किए गए.

सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी सख्ती

MCD का यह अभियान सत्य निकेतन हादसे के बाद तेज हुआ है. पांच मंजिला PG इमारत गिरने से 7 लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद राजधानी में PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे.

अधिकारियों का कहना है कि सर्वे अभी कई इलाकों में जारी है. कुछ जगहों के आंकड़े फिलहाल शुरुआती हैं. जांच पूरी होने के बाद स्थिति और साफ होगी. फिलहाल MCD का फोकस ऐसी इमारतों की पहचान करने पर है, जहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है.
 

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