'प्रदर्शन ठीक था, लेकिन पापा को पीटना गलत', जंतर-मंतर हिंसा पर पहली बार बोली घायल इंस्पेक्टर नंद किशोर की बेटी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार पहली बार सामने आए हैं. इंस्पेक्टर नंद किशोर की बेटी ने कहा कि प्रदर्शन सही था, लेकिन पुलिस की पिटाई गलत थी. वहीं एसआई अशोक मीणा के परिवार ने कहा कि ड्यूटी निभाने वाले पुलिसकर्मी उनके लिए हीरो हैं और हिंसक प्रदर्शन समाज को गलत संदेश देते हैं.

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जंतर-मंतर हिंसा में घायल हुए इंस्पेक्टर नंद किशोर ने बताई आपबीती. (Photo: Screengrab) जंतर-मंतर हिंसा में घायल हुए इंस्पेक्टर नंद किशोर ने बताई आपबीती. (Photo: Screengrab)

हिमांशु मिश्रा / हर्षित मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:58 PM IST

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन को खत्म हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन उस दिन हुई हिंसा के जख्म अब भी कई पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए ताजा हैं. प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार अब पहली बार सामने आए हैं और उन्होंने उस दिन की दहशत, डर और दर्द को साझा किया है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे. किसी के सिर पर गंभीर चोट लगी तो किसी को भीड़ ने घेरकर पीटा. अब उन पुलिसकर्मियों के परिवारों का कहना है कि ड्यूटी निभाने के दौरान हुई ऐसी घटनाओं का असर सिर्फ घायल पुलिसकर्मी पर नहीं बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है.

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घायल पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर नंद किशोर भी शामिल थे. 22 जुलाई की रात करीब आठ बजे वह अपनी कार पार्क करके ड्यूटी पर जा रहे थे. इसी दौरान भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनकी पिटाई कर दी. घटना के अगले दिन 23 जुलाई को उनका इंटरव्यू लिया गया था, तब उनके सिर पर पट्टी बंधी हुई थी और वह इलाज करा रहे थे. अब पहली बार इंस्पेक्टर नंद किशोर के परिवार ने इस घटना पर खुलकर अपनी बात रखी है. उनकी बेटी का कहना है कि प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है और जो आंदोलन चल रहा था, वह सही हो सकता है. लेकिन प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ जिस तरह की मारपीट की गई, वह बिल्कुल गलत थी.

 भीड़ ने इंस्पेक्टर नंद किशोर को घेरकर पीटा

नंद किशोर की पत्नी का कहना है कि उस घटना के बाद अब हर बार डर लगता है. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए. परिवार के लिए यह घटना किसी बड़े सदमे से कम नहीं रही. ऐसी ही कहानी बुराड़ी निवासी एसआई अशोक मीणा के परिवार की भी है. अशोक मीणा प्रदर्शन के पहले दिन से ही संसद मार्ग थाना क्षेत्र में जंतर-मंतर के पास ड्यूटी पर तैनात थे. प्रदर्शन के दौरान जब कुछ प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इसी दौरान पुलिस पर हमला हुआ.

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परिवार के मुताबिक किसी ईंट या भारी वस्तु से अशोक मीणा के सिर पर हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई. इस हमले के बाद उनका पूरा परिवार सदमे में आ गया. परिवार का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाने वाले अशोक मीणा को इस तरह के हमले का सामना करना पड़ेगा. अशोक मीणा की पत्नी का कहना है कि लोग चाहे पुलिस को किसी भी नजरिए से देखें, लेकिन उनके बच्चों और पूरे परिवार के लिए उनके पति हमेशा हीरो हैं और आगे भी हीरो ही रहेंगे. उन्होंने कहा कि ड्यूटी निभाते समय घायल होने वाले पुलिसकर्मियों के पीछे एक पूरा परिवार होता है, जो हर दिन उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार करता है.

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के हिंसक प्रदर्शन समाज में गलत संदेश देते हैं. उनके अनुसार भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इस तरह के प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की हिंसा की जांच अभी जारी है. इस मामले में कई पहलुओं की जांच की जा रही है. हालांकि इस घटना ने पुलिसकर्मियों के परिवारों के सामने कई मुश्किल सवाल खड़े कर दिए हैं. 

इंस्पेक्टर नंद किशोर और एसआई अशोक मीणा के परिवारों का कहना है कि पुलिसकर्मी हर दिन अपनी ड्यूटी निभाने के लिए घर से निकलते हैं. ऐसे में परिवार को हमेशा उनकी सुरक्षा की चिंता रहती है. जब ड्यूटी के दौरान उन पर हमला होता है तो उसका दर्द सिर्फ घायल पुलिसकर्मी तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरा परिवार मानसिक रूप से प्रभावित होता है.

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पुलिसकर्मियों के परिवार अब भी सदमे से नहीं उबरे

परिजनों का कहना है कि विरोध और प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन किसी भी हाल में हिंसा सही नहीं मानी जा सकती. उनका मानना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हमला नहीं होना चाहिए क्योंकि पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं. जंतर-मंतर की घटना के बाद घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की बातें इस पूरे मामले का एक दूसरा पक्ष सामने लाती हैं. उनका कहना है कि हिंसा की हर घटना के पीछे कई ऐसे परिवार भी होते हैं, जिनकी चिंता और पीड़ा अक्सर चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाती.
 

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