क्या है दिल्ली का नया मास्टर प्लान 2047, सस्ते घरों से यमुना संरक्षण तक, जानें सब कुछ

यह प्लान दिल्ली की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि लोगों को रहने के लिए बेहतर घर मिलें, कागजी कार्रवाई आसान हो और साथ ही पर्यावरण व यमुना नदी का बचाव भी हो सके.

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यमुना बाढ़ क्षेत्र में कंक्रीट निर्माण बैन (Photo-ITG) यमुना बाढ़ क्षेत्र में कंक्रीट निर्माण बैन (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:18 AM IST

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' को मंजूरी दे दी है, जिससे सस्ते मकानों की उच्च आपूर्ति और यमुना के मुख्य बाढ़ वाले इलाके में कंक्रीट के ढांचों पर प्रतिबंध का रास्ता साफ हो गया है. यह प्लान, जिस पर पहले MPD 2021 के खत्म होने के बाद MPD 2041 के रूप में काम किया जा रहा था, अब केंद्र सरकार के 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण के साथ तालमेल बिठाने के लिए फिर से तैयार किया गया है.

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संधू की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बिल्डिंग प्लान की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए 'यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज, 2016' में बदलावों को भी मंजूरी दी. अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य अनुपालन का बोझ कम करना, प्रक्रियात्मक देरी को घटाना और परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देना है.

अधिकारियों ने कहा कि संशोधनों के तहत, आवेदकों को अब बिल्डिंग परमिट के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, मुख्य कारखाना निरीक्षक, दिल्ली जल बोर्ड और वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की आवश्यकता नहीं होगी. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में सुधार करना था।

आवास आपूर्ति और TOD पॉलिसी

अगले 20 वर्षों में राजधानी को आकार देने के लिए, नए मास्टर प्लान से 'ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) नीति के तहत आवास की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जो मेट्रो और रेल गलियारों के साथ ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति देती है. सूत्रों ने कहा, "2047 तक दिल्ली की आबादी में काफी वृद्धि होने का अनुमान है, TOD नीति के तहत 10 वर्षों में लगभग 17 लाख आवासीय इकाइयां विकसित की जाएंगी.

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लैंड पूलिंग मॉडल का उपयोग करके शहर के ग्रीनफील्ड क्षेत्रों में नए सेक्टरों का बड़े पैमाने पर विकास नए MPD का हिस्सा होगा." जुलाई में, DDA ने अपनी TOD नीति के तहत डेवलपर संस्थाओं के लिए आवेदन खोले थे. इसका कॉरिडोर-आधारित दृष्टिकोण 207 वर्ग किलोमीटर को कवर करता है, जिसमें मुख्य रूप से किफायती आवास के लिए मेट्रो कॉरिडोर के दोनों तरफ 500 मीटर और RRTS व रेलवे स्टेशनों के आसपास 500 मीटर का दायरा शामिल है.

अतिरिक्त आवास और यूईआर-II

आवासीय इकाइयों के अंतर को और कम करने के लिए, अर्बन एक्सटेंशन रोड II (UER II) के दोनों तरफ 250 मीटर के क्षेत्र में आवासीय ऊंची इमारतों को भी MPD 2047 में शामिल किया जा सकता है.

यमुना ओ-जोन (O-Zone) का विभाजन

DDA ने यमुना ओ-जोन में विभाजन को भी मंजूरी दी. बाढ़ के मैदान के मुख्य क्षेत्र में किसी भी कंक्रीट के ढांचे की अनुमति नहीं होगी, जबकि शेष क्षेत्र में, जिसे भाग दो के रूप में वर्णित किया गया है, केवल मनोरंजक गतिविधियों की अनुमति होगी.
एक अधिकारी ने कहा, "MPD 2047 के अनुसार, ओ-जोन में एक विभाजन होगा, फ्लडप्लेन के मुख्य क्षेत्र में किसी भी कंक्रीट के ढांचे की अनुमति नहीं होगी, और भाग 2 में पार्कों जैसी कुछ मनोरंजक संरचनाओं की अनुमति होगी."

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अधिकारी ने आगे कहा कि लैंड पूलिंग नीति के तहत, DDA उन जगहों पर सड़क नेटवर्क विकसित करेगा जहां 30 मीटर या उससे अधिक का राइट-ऑफ-वे है. सूत्रों ने यह भी कहा कि MPD 2047 के तहत राष्ट्रीय राजधानी के 174 गांवों में अधिक हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे.

उपराज्यपाल का बयान और पुराना इतिहास

संधू ने कहा कि नया मास्टर प्लान "अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ईज ऑफ लिविंग, और सभी के लिए एक स्वच्छ, हरित राजधानी के साथ टिकाऊ और समावेशी शहरी विकास के लिए एक रोडमैप तैयार करेगा. इस यात्रा को आकार देने में दिल्ली की महत्वपूर्ण भूमिका है." उन्होंने कहा कि इस सुधार का उद्देश्य प्रक्रियात्मक देरी को कम करना और तेजी से परियोजना की मंजूरी देना था. इसी बैठक में, संधू ने DDA द्वारा निर्मित पुराने दो-मंजिला आवासीय मकानों के पुनर्विकास के लिए एक समान नीति लाने का भी निर्णय लिया.

DDA ने कहा, "MPD-1962 के तहत विकसित, कई पुरानी DDA आवास योजनाओं में अलग-अलग भूखंडों पर बने दो-मंजिला मकान शामिल हैं जो 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं और ढांचागत रूप से कमजोर हैं. जबकि खाली आवासीय भूखंडों के पास प्रचलित MPD मानदंडों के तहत स्पष्ट पुनर्विकास दिशानिर्देश थे, निर्मित दो-मंजिला इकाइयों में एक समान ढांचे का अभाव था."

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अधिकारियों ने कहा कि पुनर्विकास परियोजनाओं के हिस्से के रूप में ऐसी आवासीय सोसायटियों में फ्लैटों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है. DDA ने कहा कि मंजूरी के साथ, निर्मित दो-मंजिला इकाइयों को अब खाली आवासीय भूखंडों के बराबर पुनर्विकास का अधिकार दिया गया है.

इस प्लान को अब अंतिम मंजूरी और अधिसूचना के लिए केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय को भेजा जाएगा. दिल्ली का पहला मास्टर प्लान 1962 में दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 के तहत प्रख्यापित किया गया था, इसके बाद 2001 और 2021 के मास्टर प्लान आए, जिन्होंने 20-वर्ष की अवधि में राजधानी के नियोजित विकास के लिए एक ढांचा प्रदान किया. 

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