जंतर-मंतर प्रोटेस्ट: 2,873 ‘क्रिमिनल रिकॉर्ड’ वाले लोग रडार पर, क्या बस मौजूदगी से तय होगा अपराध?

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन में फेस रिकग्निशन तकनीक से 2873 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनके खिलाफ हत्या, डकैती, रेप, किडनैपिंग समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर छात्रों ने बड़ा आंदोलन किया था. (Photo.PTI) पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर छात्रों ने बड़ा आंदोलन किया था. (Photo.PTI)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:22 PM IST

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है. पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारी भीड़ में फेस रिकग्निशन सिस्टम की सहायता से ऐसे 2,873 लोगों की पहचान की गई, जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड है.

दिल्ली पुलिस से मिले आंकड़ों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पहचाने गए लोगों में हत्या के मामलों से जुड़े 101 और हत्या के प्रयास के मामलों से जुड़े 62 लोग शामिल थे. इसके अलावा डकैती और लूट के 284, रेप केस के 61, पॉक्सो के छह, आर्म्स एक्ट के 229, स्नैचिंग के 135 और किडनैपिंग के 19 आरोपी भी भीड़ में दिखाई दिए. बता दें कि यह प्रदर्शन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा था.

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क्या हिंसा में शामिल थे ये 2,873 लोग?
दिल्ली पुलिस फिलहाल यह सीधा दावा नहीं कर रही है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले ये 2,873 लोग 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर हुई किसी हिंसा या उपद्रव में शामिल थे. पुलिस का कहना है कि इस पहलू की जांच की जाएगी. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसी प्रदर्शन में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे लोगों की मौजूदगी मात्र से पूरी भीड़ या आंदोलन की प्रकृति तय की जा सकती है?

कैसे काम करता है फेस रिकग्निशन सिस्टम?
फेस रिकग्निशन सिस्टम एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिये पुलिस किसी स्थान पर मौजूद लोगों के चेहरों का अपने डेटाबेस में उपलब्ध क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले लोगों की तस्वीरों से मिलान करती है. जंतर-मंतर प्रदर्शन में इसी टेक्नोलॉजी की सहायता से 2,873 चेहरों की पहचान करने का दावा किया गया है. हालांकि, किसी व्यक्ति की भीड़ में मौजूदगी और उसके किसी अपराध या हिंसा में शामिल होने के बीच अंतर करना जरूरी है.

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यह भी सवाल है कि क्या इस डेटा के जरिए यह नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है कि जंतर-मंतर पहुंचने वाले प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या आपराधिक मामलों का सामना कर रहे लोगों की थी?

अगर संसद के बाहर लगे फेस रिकग्निशन सिस्टम तो?

जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के आपराधिक रिकॉर्ड का डेटा सामने आने के बाद यही पैमाना देश की संसद पर लागू करने का सवाल भी उठता है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR के आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा के 251 सांसदों यानी करीब 46 प्रतिशत सदस्यों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.
इनमें 170 सांसद यानी करीब 31 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास समेत दूसरे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

ADR के अनुसार-

1. 16 लोकसभा सांसदों के खिलाफ महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामले हैं.
2. इनमें दो सांसदों के खिलाफ रेप के मामले दर्ज हैं.
3. चार सांसदों के खिलाफ किडनैपिंग के मामले हैं.
4. 43 सांसदों के खिलाफ हेट स्पीच के मामले दर्ज हैं.

राज्यसभा में 73 सांसदों पर आपराधिक मामले

ADR के आंकड़ों के मुताबिक, राज्यसभा के 73 सांसदों के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें 36 सांसदों यानी करीब 16 प्रतिशत के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप हैं.

1. एक राज्यसभा सांसद के खिलाफ हत्या का मामला है.
2. चार सांसदों के खिलाफ हत्या के प्रयास के मामले हैं.
3. तीन सांसदों के खिलाफ महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामले दर्ज हैं.

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आपराधिक मामला और अपराध साबित होना अलग

जंतर-मंतर पर दिखाई दिए लोगों और सांसदों से जुड़े ये आंकड़े दर्ज मामलों तथा आरोपों को दिखाते हैं. किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना और अदालत में उसका दोषी साबित होना अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं. इसलिए असल सवाल केवल यह नहीं है कि फेस रिकग्निशन सिस्टम ने भीड़ में कितने आपराधिक रिकॉर्ड वाले चेहरों को पहचाना. सवाल यह भी है कि उनमें से कितने लोग हिंसा या उपद्रव में शामिल थे और पुलिस जांच में उनके खिलाफ क्या ठोस सबूत सामने आते हैं.

*सोर्स: दिल्ली पुलिस और ADR*

रिपोर्ट- नृपेंद्र सिंह

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