पश्चिमी दिल्ली की साइबर वेस्ट थाना पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के तार बांग्लादेश से जुड़े होने के संकेत मिले हैं. मामले में पुलिस ने कोलकाता निवासी 21 वर्षीय मोहम्मद राशिद नियाज उर्फ दानिश और 29 वर्षीय मोहम्मद आसिफ को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 50 मोबाइल फोन बरामद किए हैं. इनमें 45 बिल्कुल नए हाई-वैल्यू मोबाइल फोन हैं, जिनमें आईफोन भी शामिल हैं. इनकी कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई गई है. इसके अलावा आरोपियों के इस्तेमाल के पांच मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं.
पुलिस के अनुसार इस सिंडिकेट का खुलासा उस समय हुआ, जब 7 अगस्त को एक शख्स ने अपने साथ हुई साइबर ठगी की शिकायत पुलिस से की. पीड़ित को Instagram पर एक बड़े बैंक का विज्ञापन दिखाई दिया था. विज्ञापन देखने के बाद पीड़ित ने उसमें दिए गए नंबर पर संपर्क किया. इसके बाद WhatsApp पर बातचीत शुरू हुई. सामने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया और पीड़ित को भरोसे में ले लिया.
फर्जी ऐप डाउनलोड करवाकर हासिल की जानकारी
पुलिस के मुताबिक कथित बैंककर्मी ने पीड़ित को उसके मोबाइल फोन में ऐमएक्स इंडिया ऐप डाउनलोड करवाया. इसके जरिए पीड़ित की व्यक्तिगत और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली गई. इसके बाद पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से 2.68 लाख रुपये की खरीदारी कर ली गई. पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को खंगालना शुरू किया. जांच के दौरान आरोपियों के तार बांग्लादेश से जुड़े होने के संकेत मिले.
जांच में पुलिस को पता चला कि फ्रॉड की रकम से खरीदे गए मोबाइल फोन की डिलीवरी लखनऊ, कोलकाता और धनबाद में हुई थी. वहीं, फर्जी सिम कार्ड के लिंक 24 परगना, पश्चिम बंगाल से जुड़े मिले. इसके बाद पुलिस ने लखनऊ के एक होटल में छापा मारा. यहां से राशिद नियाज उर्फ दानिश को 19 मोबाइल फोन के साथ गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में राशिद ने पुलिस को बताया कि वह अपने साथी आसिफ के साथ कोलकाता से लखनऊ आया था. दोनों सिंडिकेट के दूसरे सदस्यों के निर्देश पर नए मोबाइल फोन लेने वाले थे.
राशिद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले में आगे की कड़ियां जोड़ीं. कोलकाता पुलिस टीम के साथ समन्वय कर मोहम्मद आसिफ को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया. उसके कब्जे से 31 नए मोबाइल फोन बरामद हुए. इस तरह पुलिस की अंतरराज्यीय कार्रवाई में दोनों आरोपियों से कुल 50 मोबाइल फोन बरामद किए गए. पुलिस को जब्त किए गए मोबाइल फोन से विदेशी गैंग के सदस्यों के साथ बातचीत से जुड़े आपत्तिजनक चैट भी मिले हैं.
पुलिस के मुताबिक यह सिंडिकेट सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए लोगों को क्रेडिट कार्ड के नाम पर निशाना बनाता था. आरोपी फर्जी बैंक प्रतिनिधि बनकर WhatsApp पर लोगों से संपर्क करते थे. बातचीत के दौरान पहले पीड़ित का भरोसा जीता जाता था. इसके बाद उसे एक फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था. ऐप के जरिए क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत जानकारी हासिल की जाती थी.
पुलिस के अनुसार इसी दौरान पीड़ित को फोन कॉल पर व्यस्त रखा जाता था और उसके क्रेडिट कार्ड से महंगे मोबाइल फोन खरीद लिए जाते थे. पुलिस की जांच में सामने आया कि ठगी से खरीदे गए मोबाइल फोन को अलग-अलग राज्यों के जरिए आगे भेजा जाता था. पुलिस के मुताबिक कमीशन के बदले इन मोबाइल फोन को बांग्लादेश सप्लाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.
कोलकाता से पकड़ा गया दूसरा आरोपी
पुलिस फिलहाल इस एंगल से भी जांच कर रही है. तकनीकी जांच, मनी ट्रेल और बरामद मोबाइल फोन से मिले चैट के आधार पर सिंडिकेट से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है. इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर दिखने वाले बैंक और क्रेडिट कार्ड से जुड़े विज्ञापनों को लेकर सावधानी की जरूरत सामने रखी है. इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बरामद 50 मोबाइल फोन के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियों की जांच की जा रही है.
हिमांशु मिश्रा