Exclusive: दिल्ली में चली पैलेट गन... घायल प्रदर्शनकारी के जख्म-मेडिकल रिपोर्ट दे रहे गवाही

20 जुलाई को दिल्ली में CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन पर पेलेट गन से फायरिंग की गई. आजतक डिजिटल से बात करने वाले एक प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि उसके मेडिकल दस्तावेजों में पेलेट इंजरी दर्ज है. वहीं दिल्ली पुलिस और पीआईबी ने पेलेट गन इस्तेमाल करने के दावों को पूरी तरह गलत बताया है.

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दिल्ली में पेलेट गन चलने का दावा. (Photo: ITG) दिल्ली में पेलेट गन चलने का दावा. (Photo: ITG)

आनंद सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

क्या दिल्ली के जंतर-मंतर पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया. 20 जुलाई को दिल्ली में हुए CJP के चलो संसद मार्च के बाद उठे सवाल इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं. कुछ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जंतर-मंतर के पास पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के दौरान उन पर पेलेट गन से फायरिंग की गई. आजतक डिजिटल ने ऐसे ही एक 25 वर्षीय प्रदर्शनकारी से बात की, जिसने दावा किया कि उसके मेडिकल-लीगल दस्तावेजों में भी पेलेट इंजरी दर्ज है.

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प्रदर्शनकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि वह 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने गया था. उसका कहना है कि उसे कभी उम्मीद नहीं थी कि दिल्ली में पेलेट गन का इस्तेमाल होगा. उसके मुताबिक, अब तक वह यही जानता था कि पेलेट गन का इस्तेमाल मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में होता है. साथ ही उसने बताया कि जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया था. वहां आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे थे. इसी दौरान उसे गोली जैसी किसी चीज से चोट लगी. बाद में अस्पताल में पता चला कि उसके शरीर में पेलेट लगे थे.

प्रदर्शनकारी ने बताया कि घटना के बाद उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. वह एक दिन अस्पताल में भर्ती रहा, जिसके बाद उसे छुट्टी दे दी गई. उसके मुताबिक, डॉक्टरों ने उसके शरीर से सभी पेलेट निकाल दिए हैं और अब वह घर पर आराम कर रहा है. हालांकि सभी प्रदर्शनकारियों की स्थिति इतनी बेहतर नहीं रही. रिपोर्टों के अनुसार, एक 19 वर्षीय युवक की एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है. वहीं एक अन्य व्यक्ति के गले की मुख्य रक्त वाहिका के बेहद पास एक पेलेट फंसा हुआ बताया गया है.

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एमएलसी में 'पेलेट गन' का जिक्र

ये सभी लोग 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की तरफ निकाले गए मार्च में शामिल थे. आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया. इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है. बुधवार को अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि 20 जुलाई की घटना से जुड़े सभी वीडियो साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए. 

20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी की पीठ पर भी पेलेट लगे.

आजतक डिजिटल से बातचीत में 25 वर्षीय प्रदर्शनकारी ने बताया कि वह प्रदर्शन स्थल के अलग-अलग हिस्सों में घूम रहा था. उसके मुताबिक, जंतर-मंतर के पास एक जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो रहा था. वहां पत्थरबाजी भी हो रही थी और पुलिस लगातार आंसू गैस के गोले छोड़ रही थी. उसने कहा कि उसे यह नहीं पता कि झड़प किसने शुरू की. लेकिन उसने जो देखा, उसके अनुसार पुलिस लगातार आंसू गैस के गोले दाग रही थी. उसके बगल में खड़े एक व्यक्ति की आंख के ऊपर आंसू गैस का गोला लगा.

प्रदर्शनकारी का दावा है कि शुरुआत में आंसू गैस के गोले हवा में छोड़े जा रहे थे. लेकिन जब झड़प तेज हो गई तो पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने बंदूकें सीधे भीड़ की ओर तानकर फायरिंग शुरू कर दी. उसका कहना है कि उसने कभी नहीं सोचा था कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल किया जाएगा. प्रदर्शनकारी ने बताया कि इसी दौरान उसने देखा कि एक पुलिसकर्मी उसकी तरफ बंदूक तान रहा है. वह तुरंत वहां से भागने लगा. तभी उसकी पीठ और दाहिनी कोहनी के आसपास चोट लगी.

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उसने कहा कि अगर वह समय रहते भागने की कोशिश नहीं करता तो शायद उसके चेहरे पर भी पेलेट लग सकते थे. उसके मुताबिक, शुरुआत में उसे दर्द महसूस नहीं हुआ. संभव है कि उस समय अफरा-तफरी और शरीर में बढ़े एड्रेनालिन की वजह से दर्द का अहसास नहीं हुआ. बाद में जब उसने अपनी पीठ देखी तो वहां से खून बह रहा था. उसने बताया कि पहले उसे लगा कि शायद आंसू गैस का असर है. लेकिन कुछ मिनट बाद ऐसा महसूस हुआ जैसे गर्म धातु उसके शरीर को चीर रही हो. उसकी पीठ में तेज जलन हो रही थी.

उसने कहा कि उसे इस बात पर भी हैरानी हुई कि गोली चलाने वाले का निशाना इतना सटीक कैसे था. उसके आसपास मौजूद कई अन्य लोग भी घायल हुए थे. लेकिन वहां इतनी अफरा-तफरी थी कि उसे समझने में 10 से 15 मिनट लग गए कि आखिर उसके साथ क्या हुआ है. इसके बाद वह खुद ही सफदरजंग अस्पताल पहुंचा, जहां उसका इलाज किया गया. उसने दावा किया कि अस्पताल के रिकॉर्ड में उसकी चोट को पेलेट वाउंड के रूप में दर्ज किया गया है.

उसने यह भी कहा कि घटनास्थल पर कई तरह की सुरक्षा एजेंसियां मौजूद थीं, जिनमें दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स शामिल थीं. लेकिन घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि उसे यह याद नहीं कि जिस व्यक्ति ने उस पर फायरिंग की, उसने किस तरह की वर्दी पहन रखी थी. दिल्ली में पेलेट इंजरी के कई अन्य मामले भी सामने आने का दावा किया गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी 20 जुलाई की झड़प में कई पेलेट लगने से घायल हो गए थे और उन्हें लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों ने उनके चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से से कई पेलेट निकाल दिए. हालांकि एक पेलेट अब भी उनकी गर्दन की एक बड़ी खून की नस के पास फंसा हुआ है. उनके साथ मौजूद एक मित्र ने आरोप लगाया कि पालिका बाजार के पास रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने उन पर फायरिंग की.

प्रदर्शनकारी की एमएलसी में पेलेट से लगी चोटों के निशान का विवरण

इंडियन एक्सप्रेस ने 25 वर्षीय इरशाद शेख का भी जिक्र किया है. गुरुग्राम में नौकरी करने वाले एमबीए स्नातक इरशाद शेख ने दावा किया कि उनके चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से में कई पेलेट लगे. सर्जरी के बाद लेडी हार्डिंग अस्पताल से उन्होंने बताया कि उनकी आंख, गाल, नाक, ठुड्डी, गर्दन, कंधे और सीने में पेलेट लगे थे.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 19 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी की दाहिनी आंख में पेलेट लगने के बाद उसकी आंख की रोशनी जाने की आशंका है. परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने उसके ठीक होने की संभावना केवल एक प्रतिशत बताई है. इन दावों के बीच दिल्ली पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि उसने प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया.

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया. पुलिस ने कहा कि दिल्ली पुलिस के पास पेलेट गन होती ही नहीं है और न ही प्रदर्शन के दौरान उनका इस्तेमाल किया गया. लोगों से अपील की गई कि वे बिना पुष्टि की गई या भ्रामक जानकारी साझा न करें.

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प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को फर्जी बताया. पीआईबी ने कहा कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया जा रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाई गई. यह दावा फर्जी है. लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की गई.

पेलेट गन क्या होती है.

पेलेट गन को पंप एक्शन गन या रायट शॉटगन भी कहा जाता है. इसमें इस्तेमाल होने वाले कारतूस से एक साथ कई छोटे धातु के छर्रे निकलते हैं. सामान्य गोली की तरह इसमें केवल एक प्रोजेक्टाइल नहीं होता, बल्कि दर्जनों छोटे-छोटे पेलेट फैलकर निकलते हैं. भारत में पेलेट गन का इस्तेमाल मुख्य रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कम घातक हथियार के रूप में किया जाता रहा है. इन्हें वर्ष 2010 में जम्मू-कश्मीर में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तेमाल में लाया गया था. उस समय पुलिस फायरिंग में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद जानलेवा गोलियों के विकल्प के रूप में पेलेट गन को शामिल किया गया.

पेलेट गन के इस्तेमाल के लिए तय मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, इसका उपयोग अंतिम विकल्प के तौर पर किया जाना चाहिए. इससे पहले समझाइश, चेतावनी, पानी की बौछार, आंसू गैस और अन्य कम घातक उपाय अपनाए जाने चाहिए. दिशानिर्देशों के अनुसार, पेलेट गन से उचित दूरी बनाकर फायर किया जाना चाहिए. निशाना कमर के नीचे होना चाहिए. बाद में जारी दिशा-निर्देशों में डिफ्लेक्टर का इस्तेमाल कर अधिकांश पेलेट नीचे की ओर भेजने की भी बात कही गई. पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो सहित संबंधित प्रोटोकॉल न्यूनतम बल प्रयोग और संयम बरतने पर जोर देते हैं.

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प्रदर्शनकारी की कोहनी पर पेलेट से लगी चोटों का क्लोज़-अप

हालांकि पिछले कई वर्षों में जम्मू-कश्मीर से ऐसी कई रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया कि इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया. ऐसे मामलों में खासकर आंखों में गंभीर चोट लगने की घटनाएं दर्ज की गईं. जम्मू-कश्मीर के बाहर भी पेलेट गन इस्तेमाल किए जाने के आरोप पहले भी सामने आए हैं. जनवरी और फरवरी 2024 में हरियाणा के अंबाला जिले में शंभू बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान कुछ किसानों ने दावा किया था कि उन्हें पेलेट गन से चोट लगी है. किसानों ने अपने शरीर पर ऐसे निशान भी दिखाए थे जिन्हें उन्होंने पेलेट जैसी चोट बताया था.

हालांकि हरियाणा पुलिस ने उस समय कहा था कि उसने केवल अंतिम विकल्प के रूप में रबर बुलेट का इस्तेमाल किया था और पेलेट गन चलाने के आरोपों से इनकार किया था. कुछ रिपोर्टों में वर्ष 2023 के दौरान मणिपुर में भी पेलेट गन इस्तेमाल किए जाने के दावे किए गए थे. हालांकि जम्मू-कश्मीर के बाहर ऐसे आरोप बहुत कम सामने आए हैं और अधिकतर मामलों में इन पर विवाद रहा है.

20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास हुए प्रदर्शन के बाद सामने आए दावे इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि यदि ये सही साबित होते हैं तो राष्ट्रीय राजधानी के बीचोंबीच आम नागरिकों के पेलेट गन से घायल होने का यह एक दुर्लभ मामला होगा. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस घटना में कुल कितने लोग पेलेट से घायल हुए. एक ओर कई प्रदर्शनकारी अपने मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर पेलेट इंजरी का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस और पीआईबी इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं.
 

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