मादा भालू के हमले ने उजाड़ दिया परिवार, दो सगे भाई-बहन की मौत, तीसरी जिंदगी के लिए जंग लड़ रही

कांकेर जिले के मरकाटोला गांव में मादा भालू के हमले में दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी एक अन्य बहन गंभीर रूप से घायल हो गई. ग्रामीणों के अनुसार, एक दिन पहले भालू के शावक की मौत के बाद वह आक्रामक हो गई थी. करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद विशेषज्ञ टीम ने भालू को बेहोश कर काबू में किया.

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शावक की मौत के बाद आक्रामक हुई मादा भालू. (Photo: ITG) शावक की मौत के बाद आक्रामक हुई मादा भालू. (Photo: ITG)

गौरव श्रीवास्तव

  • कांकेर ,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:29 PM IST

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है. जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर मरकाटोला गांव में मादा भालू के हमले ने एक परिवार को उजाड़ दिया. भालू के हमले में दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी एक अन्य बहन गंभीर रूप से घायल हो गई. घायल महिला का इलाज कांकेर मेडिकल कॉलेज में चल रहा है. इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है और ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है.

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जानकारी के अनुसार, मरकाटोला गांव निवासी हलाल खोर जुर्री अपने खेत के पास बैठे हुए थे. इसी दौरान मादा भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया. अचानक हुए हमले से वह खुद को संभाल भी नहीं पाए और गंभीर रूप से घायल हो गए. हलाल खोर जुर्री की चीख सुनकर उनकी सगी बहन चमारोन बाई, जो स्कूल में रसोइया के रूप में काम करती हैं और उस समय स्कूल से लौट रही थीं, मौके पर पहुंचीं. उन्होंने अपने भाई को बचाने की कोशिश की. लेकिन मादा भालू ने उन पर भी हमला कर दिया.

भालू के हमले में वह भी गंभीर रूप से घायल हो गईं. दोनों भाई-बहन की आवाज सुनकर खेत में काम कर रही उनकी दूसरी बहन खोरीनबाई भी वहां पहुंच गईं. वह अपने भाई और बहन को बचाने की कोशिश कर ही रही थीं कि भालू ने उन पर भी हमला कर दिया. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं. घटना की जानकारी आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों ने गांव तक पहुंचाई. इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग को सूचना दी गई. वन विभाग और ग्रामीणों ने किसी तरह गंभीर रूप से घायल खोरीनबाई को वहां से निकालकर इलाज के लिए कांकेर मेडिकल कॉलेज भेजा.

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शवों के पास डटी रही मादा भालू, चार घंटे तक नहीं हो सका रेस्क्यू

घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती दोनों मृतकों के शवों को बाहर निकालने की थी. ग्रामीणों और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मादा भालू शवों के पास ही डटी रही और जैसे ही कोई व्यक्ति शवों के पास पहुंचने की कोशिश करता, वह हमला करने के लिए दौड़ पड़ती. इस कारण पुलिस, वन विभाग और ग्रामीण कई घंटों तक शवों को नहीं निकाल सके.

करीब चार घंटे बाद रायपुर से विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंची. टीम ने ट्रैंक्विलाइजर गन की मदद से मादा भालू को बेहोश किया. इसके बाद उसे सुरक्षित काबू में पाया गया. हालांकि भालू के हमले से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा भी सामने आया. जब वन विभाग की टीम बेहोश भालू को बाहर निकाल रही थी, तब कुछ ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर उसकी ओर बढ़ गए. पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने किसी तरह लोगों को शांत कराया. इसके बाद भालू को पिंजरे में बंद कर वहां से ले जाया गया. तभी दोनों मृतकों के शवों को भी मौके से हटाया जा सका.

बताया जा रहा है कि एक दिन पहले मादा भालू ने अपने ही शावक को नोचकर मार डाला था. इसकी सूचना मिलने पर वन विभाग ने शावक के शव को अपने कब्जे में ले लिया था. ग्रामीणों का मानना है कि शावक अपने पास नहीं मिलने के कारण मादा भालू आक्रामक हो गई और उसने लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया.

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एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पूरे गांव में पसरा मातम

एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों के इस हादसे का शिकार होने से पूरे मरकाटोला गांव में शोक का माहौल है. दो लोगों की मौत और एक महिला के गंभीर रूप से घायल होने से परिवार पूरी तरह टूट गया है. वहीं क्षेत्र में लगातार भालू और तेंदुए की गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल पकड़े गए भालू को कांकेर लाया गया है, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा.
 

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