सरकारी खजाने पर सेंध, पुलिसकर्मियों ने सैलरी बढ़ाकर निकाले करोड़ों... AI ने पहुंचाया जेल

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में करीब 2 करोड़ रुपये के सैलरी घोटाले के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि एसपी कार्यालय के सैलरी सेक्शन में तैनात कॉन्स्टेबल गिरीश राय ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपनी और दो अन्य कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाकर सरकारी धन का गबन किया.

Advertisement
बस्तर मे सामने आया बड़ा सैलरी घोटाला. (Photo: Representational ) बस्तर मे सामने आया बड़ा सैलरी घोटाला. (Photo: Representational )

aajtak.in

  • बस्तर,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:49 PM IST

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस विभाग में करोड़ों रुपये के कथित सैलरी घोटाले का खुलासा हुआ है. करीब तीन साल तक सैलरी रिकॉर्ड में हेरफेर कर लगभग 2 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है. इस पूरे मामले का खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किए गए ऑडिट के दौरान हुआ.

Advertisement

एक एजेंसी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कॉन्स्टेबल गिरीश राय, राजकुमार कटलाम और हेमंत मैथ्यू के रूप में हुई है. गिरीश राय जगदलपुर स्थित पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के सैलरी सेक्शन में सहायक के तौर पर तैनात था, जबकि अन्य दोनों भी उसी कार्यालय में अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत थे.

बस्तर के एसपी शलभ कुमार सिन्हा के मुताबिक नियमित आंतरिक और बाहरी ऑडिट के दौरान सैलरी सेक्शन में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले. शुरुआती जांच में पता चला कि गिरीश राय सैलरी बिल प्रोसेस होने से पहले उसकी सॉफ्ट कॉपी में बदलाव कर अपनी और दो अन्य कॉन्स्टेबल की सैलरी अवैध रूप से बढ़ा देता था. पूछताछ के दौरान उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

पुलिस के अनुसार, अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच आरोपियों ने सरकारी खातों से करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक की राशि फर्जी तरीके से निकाली. जांच में यह भी सामने आया कि गिरीश राय ने कुछ अन्य कर्मचारियों की सैलरी भी लोन देने के बहाने बढ़ाई और बाद में अतिरिक्त राशि नकद वापस ले ली. ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर उनसे भी पूछताछ की जा रही है.

Advertisement

AI ऑडिट से हुआ खुलासा
अधिकारियों का कहना है कि पुलिस विभाग में लगातार ट्रांसफर, पोस्टिंग और कर्मचारियों की संख्या में बदलाव के कारण सैलरी खर्च में उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता था. इसी वजह से यह गड़बड़ी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई. हालांकि AI आधारित ऑडिट में सैलरी खर्च में असामान्य वृद्धि सामने आने के बाद पेरोल रिकॉर्ड की गहन जांच की गई, जिससे पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो गया.

मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. स्थानीय अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »