देश में स्वाइन फ्लू के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं. राजधानी दिल्ली से लेकर कर्नाटक तक ये वायरस फैला हुआ है. अस्पतालों की ओपीडी में खांसी- जुकाम और बुखार वाले मरीज आ रहे हैं. कुछ मरीजों को सांस लेने में परेशानी भी हो रही है. इनको अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है. डॉक्टरों ने बताया है कि मौसम में बदलाव और कम होती इम्यूनिटी के कारण स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं. इस वायरस के तीन कैटेगरी के मरीज हैं. इसमें तीसरी कैटेगरी वालों को सबसे ज्यादा खतरा है.
स्वाइन फ्लू इन्फूएंजा ए वायरस का एक प्रकार है. इसमें अधिकतर मरीजों में लक्षण सामान्य खांसी- जुकाम और बुखार वाले होते हैं. मरीजों के लक्षणों के आधार पर इनको तीन कैटेगरी में बांटा गया है. गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन विभाग में यूनिट हैड डॉ. सतीष कौल ने इस बारे में बताया है.
डॉ. सतीश बताते हैं कि स्वाइन फ्लू के मरीजों A, B और C कैटेगरी में बाटा गया है. इनमें कैटेगरी A जो है वे हल्के लक्षण वाले मरीज हैं. इनको इसमें खांसी, जुकाम, शरीर में दर्द और हल्का बुखार जैसे लक्षण होते हैं. ज्यादातर मरीज 3 से 5 दिनों में सामान्य इलाज और आराम से ठीक हो जाते हैं. ऐसे मामलों में आमतौर पर जांच या किसी एंटीवायरल दवा की जरूरत नहीं होती है.
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कैटेगरी B – ज्यादा रिस्क वाले मरीज
अगर तेज बुखार हो और मरीज गर्भवती हो या उसे डायबिटीज, हार्ट के रोग जैसी कोई बीमारी हो, तो डॉक्टर की सलाह से Oseltamivir (Tamiflu) शुरू की जा सकती है. इसके लिए जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी नहीं होता है. दवा खाने से आराम मिल सकता है. इस दौरान ये भी ध्यान रखें कि बाहर भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचें. हाथ धोकर भोजन करें और किसी संक्रमित मरीज के पास न जाएं. डॉ. सतीश कहते हैं कि अगर इस कैटेगरी के मरीज समय पर अपना इलाज शुरू कर देते हैं तो लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है.
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कैटेगरी C – गंभीर लक्षण के मरीज
डॉ सतीष बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ सीने में दर्द की परेशानी, सांस लेने में दिक्कत या खांसी में खून आना जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो ये गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं. ऐसे मरीजों को तुरंत अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह से एंटीवायरल इलाज जल्द शुरू किया जाना चाहिए.अच्छी बात यह है कि 5% से भी कम मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचते हैं. फिर भी सावधानी जरूरी है. अगर सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार के लक्षण बढ़ने लगें या सांस लेने में परेशानी हो, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लें और सही इलाज शुरू करवाएं.
आजतक हेल्थ डेस्क