थायरॉइड की बीमारी का असर केवल वजन के बढ़ने और घटन तक सीमित नहीं है. ये आंखों पर भी अटैक करता है. थायरॉइड की बीमारी से आंखों में सूजन,आंखों का बाहर निकलना, दो-दो दिखाई देना और गंभीर मामलों में रोशनी जाने तक का खतरा हो सकता है. अब दुनियाभर के विशेषज्ञों ने इसकी जांच और इलाज को लेकर एक नई गाइडलाइंस जारी की है. इसमें बताया गया है कि बीमारी की पहचान कैसे की जाए और अलग-अलग स्तर पर इलाज की क्या व्यवस्था होनी चाहिए.
इसको वर्ल्ड सोसाइटी ऑफ ऑप्थेलमिक प्लास्टिक रिकंस्ट्रक्टिव एंड एस्थेटिक सर्जरी (डब्ल्यूएसओपीआरएएस) और इंटरनेशनल थायराइड आई डिजीज सोसाइटी (आईटीईडीएस) ने तैयार किया है. इसको मेडिकल जर्नल ऑप्थेलमिक प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी में प्रकाशित किया गया है.
क्या है थायराइड आई डिजीज?
इस बारे में वर्ल्ड सोसाइटी ऑफ ऑप्थेलमिक प्लास्टिक रिकंस्ट्रक्टिव एंड एस्थेटिक सर्जरी के जनरल सेक्रेटरी डॉ. एके ग्रोवर ने Aajtak.in को बताया है. वह कहते हैं कि थायरॉइड आई डिजीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम आंखों के आसपास मौजूद मसल्स और टिश्यू को नुकसान करने लगता है. इसके कारण आंखों में सूजन, लालपन और जलन हो सकती है. कुछ मरीजों में आंखें बाहर की तरफ उभरने लगती हैं और दो-दो दिखाई देने लगता है.
जा सकती है आंखों की रोशनी
डॉ ग्रोवर ने बताया कि थायरॉइड आई डिजीज के मामले बढ़ रहे हैं. उनके पास भी इस तरह के केस आते हैं. इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है, लेकिन पुरुषों में आंखों की रोशनी जाने का रिस्क अधिक होता है. हाइपरथायरायडिज्म के मरीजों में इस बीमारी के होने की आशंका ज्यादा होती है. यानी जिनका थायरॉइड बढ़ा हुआ रहता है उनको इसका खतरा ज्यादा होता है. इस बीमारी के बचाव और पहचान के तरीकों को लेकर ही नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं.
नई गाइडलाइंस में क्या है?
नई गाइडलाइन में थायरॉइड आई डिजीज को तीन लेवल में बांटा गया है. इसमें पहला है बेसिक दूसरा इंटरमीडिएट और तीसरा एडवांस में बांटने की सिफारिश की गई है. नई गाइडलाइंस में दुनिया के अलग- अलग देशों में थायराॉइड आई डिजीज के मरीजों का इलाज उनकी बीमारी की गंभीरता के हिसाब से और उस देश में मौजूद स्वास्थ्य व्यवस्था के हिसाब से हो सके. यह भी है कि जरूरत पड़ने पर मरीज को किसी बड़े हॉस्पिटल में रेफर किया जा सकता है. डॉ. ग्रोवर ने बताया कि पुरानी गाइलाइंस में ऐसी व्यवस्था नहीं थी. नई गाइडलाइंस इसलिए लाई गई है ताकि मरीजों का बेहतर इलाज हो सके.
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मरीजों को क्या फायदा होगा?
इस नए ग्लोबल फ्रेमवर्क का सबसे बड़ा फायदा यह है कि थायराइड आई डिजीज की पहचान और इलाज पहले की तुलना में बेहतर हो जाएगा. मरीज की आंखों की जांच के साथ-साथ थायराइड हार्मोन, आंखों की रोशनी, डबल विजन और की जांच भी की जाएगी. जरूरत पड़ने पर CT, MRI और अन्य एडवांस जांच भी की जा सकती हैं.
अभिषेक पांचाल