मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए स्कूल का 'डरावना एक्सपेरिमेंट', डॉक्टर ने बताया कैसे बच्चों को रखें फोन से दूर

उत्तराखंड के खटीमा के आदर्श इंडिया मॉन्टेसरी स्कूल में बच्चों को मोबाइल फोन और स्क्रीन टाइम के नुकसान समझाने के लिए एक ऐसी एक्टिविटी कराई गई, जिसमें बच्चों को डराकर रोने तक के हालात बन गए. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में फोन की लत छुड़ाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए सही तरीके अपनाने की जरूरत है.

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 उत्तराखंड के स्कूल में बच्चे की आंख पर लाल रंग लगाया उत्तराखंड के स्कूल में बच्चे की आंख पर लाल रंग लगाया

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:56 AM IST

बच्चों में मोबाइल फोन की लत काफी खतरनाक हो रही है.बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए उत्तराखंड के खटीमा में  स्कूल में कराई गई एक एक्टिविटी अब चर्चा में है, एक्टिविटी का मकसद बच्चों को ज्यादा मोबाइल चलाने के नुकसान समझाना था, लेकिन तरीका ऐसा रहा कि कई बच्चे डरकर रोने  लगे. सवाल सिर्फ स्कूल की इस एक्टिविटी पर नहीं है, बल्कि यह भी है कि आखिर बच्चों में मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल इतना बढ़ क्यों रहा है और इसका उनकी सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?

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मामला ऊधम सिंह नगर के खटीमा के आदर्श इंडिया मॉन्टेसरी स्कूल का बताया जा रहा है. स्कूल में बच्चों को मोबाइल, गेमिंग और ज्यादा स्क्रीन टाइम से दूर रखने के लिए एक जागरूक किया जा रहा था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्टिविटी में एक बच्चे की आंखों पर एक ऐसी पट्टी बांध दी जिस पर लाल रंग लगा हुआ था. ये दिखने में ऐसा लग रहा था जैसे आंखों से खून आ रहा हो, स्कूल में बच्चों को ये बताया गया कि ये बच्चा ज्यादा फोन यूज करता था इस वजह से डॉक्टरों ने इसकी आंखें निकाल दी. ये सुनते ही बच्चे घबराकर रोने लगे और मोबाइल फोन इस्तेमाल न करने की बात कहते नजर आए. घटना के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के निर्देश दिए है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इस तरह के तरीके फोन की लत छुड़ाने के लिए अच्छे नहीं हैं, लेकिन बच्चों में फोन की बढ़ती लत एक बड़ा खतरा जरूर बन रही है. 

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भारत के बच्चों में बढ़ रहा है स्क्रीन टाइम

2025 में Indian Pediatrics में प्रकाशित एक रिसर्च में 3 महीने से 14 साल तक के 771 बच्चों का स्क्रीन टाइम देखा गया. बच्चों का औसत स्क्रीन टाइम करीब 2.62 घंटे प्रतिदिन था, जो तय पैरामीटर से काफी अधिक है. चिंता की बात यह है कि फोन के ज्यादा यूज से बच्चे वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो रहे हैं.

यह भी पढ़ें: पैरेंट्स सावधान! छोटे बच्चों को मोबाइल दिखाया तो बढ़ सकता है ऑटिज्म का खतरा, दिल्ली AIIMS की चेतावनी

क्या होता है वर्चुअल ऑटिज्म

छोटे बच्चों में खासकर 5 साल से कम उम्र में फोन का ज्यादा यूज करने के कारण ऑटिज्म जैसे लक्षण दिख रहे हैं, हालांकि ये कोई अलग मेडिकल टर्म नहीं है, लेकिन ऑटिज्म जैसे लक्षणों को कारण इसको वर्चुअल ऑटिज्म का नाम दिया गया है, गाजियाबाद के जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक विभग में डॉ. विपिनचंद्र उपाध्याय बताते हैं कि फोन के अधिक यूज की वजह से  बच्चा बात करते समय या सामने देखने पर आई-कॉंटेक्ट नहीं करना, फोन जैसी अजीब एक्टविटी करना जैसे लक्षण दिख रहे हैं. बीते 4 से 5 सालों में यह समस्या ज्यादा बढ़ी है. इससे बचाव जरूरी है.

यह भी पढ़ें: क्या है वर्चुअल ऑटिज्म, बच्चों के लिए कितना खतरनाक?

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वर्चुअल ऑटिज्म से कैसे बचें

बच्चों को फोन न दें क्योंकि 5 साल से छोटे बच्चों को फोन की जरूरत नहीं है

बच्चों से रोज बातचीत करें

उनको बाहर खेलने के लिए लेकर जाएं

अगर कोई लक्षण दिखे तो इलाज कराएं 

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