पैरेंट्स सावधान! छोटे बच्चों को मोबाइल दिखाया तो बढ़ सकता है ऑटिज्म का खतरा, दिल्ली AIIMS की चेतावनी

दिल्ली AIIMS की एक नई स्टडी ने माता-पिता को चौंका दिया है, एक्सपर्ट के अनुसार, एक साल से कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में 3 साल तक ऑटिज्म जैसे लक्षण दिखने का खतरा बढ़ जाता है. जानें बच्चों के दिमागी विकास पर मोबाइल के असर और एक्सपर्ट की सलाह.

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छोटे बच्चों को स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए. (PHOTO:ITG/AI) छोटे बच्चों को स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए. (PHOTO:ITG/AI)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:43 PM IST

आजकल के बच्चे भी बड़ों की तरह ही मोबाइल, टैबलेट और टीवी देखते हैं, उनके हाथ टीवीका रिमोट, फोन, और टैबलेट देखना तो जैसे अब मामूली बात हो गई है. उम्र से पहले ही बच्चों ने अपनी दुनिया इन चीजों में बना ली है और आलम यह है कि बच्चे बिना मोबाइल के खाना नहीं खा रहे हैं, रोते हैं तो उनको चुप करवाने के लिए फोन देना पड़ रहा है. इन सबकी वजह से घरवालों को भी मजबूरी में उनके हाथों में फोन थमाना पड़ रहा है. 

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अब तक तो माता-पिता बच्चों के ज्यादा स्क्रीन टाइम की वजह से उनकी आंखों को लेकर परेशान हो रहे थे, लेकिन अब दिल्ली AIIMS की नई स्टडी तो पैरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है. दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) की इस नई स्टडी में बताया गया है कि बहुत कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में ऑटिज्म जैसे लक्षणों से जुड़ा हो सकता है. 

AIIMS के बाल न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च के मुताबिक, जिन बच्चों को एक साल की उम्र से पहले ज्यादा स्क्रीन दिखाई गई, उनमें तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म से जुड़े संकेत ज्यादा देखने को मिले. एक्सपर्ट का कहना है कि 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना बेहतर है. 

क्या होता है ऑटिज्म? 

ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है, जो बच्चे के सामाजिक व्यवहार, बातचीत और सीखने के तरीके को इफेक्ट करती है. ऐसे बच्चे आंखों में कम देखते हैं, अपने नाम पर जल्दी रिएक्शन नहीं देते, बोलने में देरी हो सकती है या वे कुछ हरकतें बार-बार दोहराते हैं, जैसे हाथ फड़फड़ाना या पंजों के बल चलना.

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डॉक्टरों का कहना है कि स्क्रीन खुद अकेली वजह नहीं है, लेकिन दिक्कत यह है कि स्क्रीन बच्चों के जरूरी ह्यूमन एक्सपीरियंस की जगह ले लेती है. लाइफ के शुरुआती सालों में बच्चे को चेहरे के एक्सप्रेशन, आवाज, बातचीत, खेल और स्पर्श की जरूरत होती है. यही चीजें उसके दिमाग की ग्रोथ में सबसे अहम रोल निभाते हैं.

एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चे की जिंदगी के पहले 1000 दिन सबसे जरूरी होते हैं, क्योंकि इस दौरान दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है.अगर इसी समय सही माहौल मिले तो बच्चा बेहतर तरीके से सीखता और बढ़ता है,लेकिन अगर उसका समय ज्यादा स्क्रीन के साथ बीते, तो ग्रोथ पर असर पड़ सकता है.

पैरेंट्स को रखना चाहिए इन बातों का ध्यान

छोटे बच्चों के माता-पिता को कुछ शुरुआती संकेतों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए. अगर बच्चा आंखों में नहीं देखता, नाम पुकारने पर जवाब नहीं देता, बोलने में देरी हो रही है या पहले सीखी चीजें भूलने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. एक और जरूरी बात यह है कि वैक्सीन और ऑटिज्म के बीच कोई कनेक्शन नहीं पाया गया है. यह बात कई ग्लोबल रिसर्च में साफ हो चुकी है.

बच्चों के लिए क्या है जरूरी

बच्चों के लिए सबसे जरूरी इंसानी जुड़ाव, प्यार और बातचीत है. स्क्रीन की जगह कहानियां, खेल और परिवार के साथ समय बिताना उनके दिमागी विकास के लिए कहीं ज्यादा फायदेमंद है.

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