बच्चे की सांस की नली में फंस गया था बड़ा चुंबक, डॉक्टरों ने बिना सर्जरी के 3 MM के छोटे मैग्नेट से निकाला बाहर

कोलकाता के मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में छह साल के बच्चे की सांस की नली में फंसा बड़ा चुंबक बिना सर्जरी के निकाला गया. डॉक्टरों ने 3 मिमी के छोटे चुंबक की मदद से यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया, जिससे बच्चे की जान बच गई.

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सांस की नली से निकाला चुंबक सांस की नली से निकाला चुंबक

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

कोलकाता में एक छह साल के बच्चे की सांस की नली में बड़ा चुंबक फंस गया था. इससे उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी, मामला इतना गंभीर था कि बच्चे की जान भी जा सकती थी, लेकिन डॉक्टरों ने महज 3 मिलीमीटर के छोटे चुंबक की मदद से सांस की नली में फंसे बड़े चुंबक को बाहर निकाल लिया गया. बिना सर्जरी के बड़े चुंबक को निकालने से बच्चे की जान बच गई. अब बच्चा धीरे- धीरे ठीक हो रहा है. 

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यह मामला कोलकाता के मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का है. अस्पताल के ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने यह मुश्किल ऑपरेशन किया.बच्चे के माता-पिता उसे सांस लेने में परेशानी होने पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे. जांच में पता चला कि बड़ा चुंबक बच्चे की सांस की नली में फंस गया है था. ऐसे में बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही थी. इसको देखते हुए जल्द से जल्द चुंबक को निकालना जरूरी था. 

पहली कोशिश में नहीं निकल पाया चुंबक

डॉक्टरों ने पहले बच्चे की हालत संभाली और फिर ब्रॉन्कोस्कोपी के जरिए चुंबक निकालने की कोशिश की. ब्रॉन्कोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एक पतली नली और कैमरे की मदद से सांस की नली के अंदर देखा जाता है और वहां फंसी चीजों को बाहर निकाला जाता है. लेकिन चुंबक का आकार बड़ा और बनावट अलग थी. वह सांस की नली में मजबूती से फंसा हुआ था. उसे बाहर निकालना संभव नहीं हो पाया.

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3 MM के छोटे चुंबक ने कर दिया कमाल

इसके बाद डॉक्टरों ने एक अलग तरीका अपनाया. उन्होंने 3 मिलीमीटर लंबा एक छोटा, खास आकार का चुंबक तैयार किया. इस चुंबक को ब्रॉन्कोस्कोपी में इस्तेमाल होने वाले फोर्सेप्स के सिरे पर लगाया गया. इसके बाद सांस की नली के सामने की तरफ एक छोटा रास्ता बनाया गया, जिसे ट्रेकियोस्टॉमी कहते हैं, इसी रास्ते से उपकरण अंदर पहुंचाकर बड़े चुंबक को बाहर निकाला गया. चुंबक बाहर निकलने के बाद बच्चे के दोनों फेफड़ों तक हवा जाने लगी. इसके बाद उसे पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां बच्चों के डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है. इस प्रक्रिया में ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. सौमेंद्रनाथ बंद्योपाध्याय और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. देबाशीष घोष समेत डॉक्टरों की टीम शामिल रही. 

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डॉक्टरों का कहना है कि  बच्चों को छोटे चुंबक और ऐसी चीजों वाले खिलौनों से दूर रखना चाहिए. अगर बच्चे के गले में कुछ फंसने, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या अचानक आवाज बदलने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल ले जाएं. 

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