लंबी उम्र जीने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स और एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट के पीछे भागना जरूरी नहीं है. नई चीजें सीखना, रोज एक्सरसाइज करना, मांसपेशियों को मजबूत रखना भी जरूरी है. इंडिया टुडे हेल्थवेल्थ समिट में अपोलो हॉस्पिटल्स के रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नवीन ज्ञानसेकरन ने लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए ऐसी ही आदतों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जीवन में बच्चे जैसी जिज्ञासा बनाए रखना जरूरी है.
डॉ. नवीन ने कहा कि नई भाषा सीखना, कोई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना या रोजमर्रा के कामों में छोटे बदलाव करना दिमाग को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है. उन्होंने कहा कि नई चीजें सीखने से दिमाग को अलग-अलग तरह की मानसिक चुनौतियां मिलती है. रिसर्च बताते हैं कि मानसिक रूप से एक्टिव रहना स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए फायदेमंद हो सकता है.
मांसपेशियां मजबूत तो बुढ़ापे में रहेंगे आत्मनिर्भर
डॉ. नवीन ने मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने पर जोर दिया. उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की मात्रा और ताकत घट सकती है. इस स्थिति को सारकोपीनिया कहते हैं. इससे चलने-फिरने, संतुलन बनाए रखने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो सकती है.
मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, संतुलित भोजन और पर्याप्त प्रोटीन जरूरी हैं. इसके साथ तेज चलना, साइकिल चलाना और बैडमिंटन जैसे खेल भी अच्छे हैं. एक्सरसाइज अपनी क्षमता के अनुसार करें और पर्याप्त आराम लें.
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शाकाहारी लोग विटामिन B12 पर दें ध्यान
डॉ. नवीन ने भारतीयों, खासकर शाकाहारी लोगों में विटामिन B12 की कमी पर ध्यान देने की सलाह दी. इसकी कमी से एनीमिया, थकान, हाथ-पैरों में झनझनाहट और नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से B12 की जांच और सप्लीमेंट लिए जा सकते हैं. आयरन और विटामिन D की खुराक भी कमी होने पर ही लेनी चाहिए.
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लंबी उम्र से ज्यादा जरूरी स्वस्थ उम्र
डॉ. नवीन ने कहा कि केवल 100 साल तक जीना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि 60 से 90 साल की उम्र तक स्वस्थ और आत्मनिर्भर रहना भी जरूरी है.
आजतक हेल्थ डेस्क