युवाओं को घेर रहा घुटनों का दर्द, इस उम्र के बीच ज्यादा रिस्क

घुटनों का दर्द, जिसे कभी बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, अब 30 और 40 की उम्र के युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है. शोध बताते हैं कि बढ़ता मोटापा और कम उम्र में इंटेस स्पोर्ट्स एक्टिविटी इस समस्या की सबसे बड़ी वजहें हैं.

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युवाओं में बढ़ रही घुटने की समस्या (Photo: ITGD) युवाओं में बढ़ रही घुटने की समस्या (Photo: ITGD)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

घुटने का दर्द, जिसे कभी बढ़ती उम्र की एक निशानी माना जाता था और ये अक्सर हमारे सामने दादी-नानी को होता था. लेकिन अब 30 और 40 की उम्र के युवाओं को ये तेजी से घेर रहा है. दुनिया भर में हो रहीं कई रिसर्च इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह अब सिर्फ बुढ़ापे की समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह युवा पीढ़ी को भी तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है.

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क्यों युवाओं के घुटने हो रहे खराब

रिसर्च में इसके पीछे दो बड़े कारण बताए गए हैं जिनमें एक है मोटापा और दूसरा है कम उम्र में खेले गए हाई इंटेसिटी गेम्स. यानी किसी ने अगर कम उम्र में बहुत हाई इंटेसिटी गेम्स खेले या एक्सरसाइज की तो ऐसे लोगों को भविष्य में घुटनों की दिक्कत और दर्द का सामना ज्यादा करना पड़ सकता है. 

वहीं, मोटापा आजकल के दौर की एक सामान्य समस्या है. खराब खानपान, एक्सरसाइज की कमी और घंटों तक दफ्तर में बैठकर काम करने से युवाओं के बीच तेजी से मोटापा बढ़ रहा है. मोटापे की वजह से शरीर का वजन सीधे घुटनों पर पड़ता है जिससे उन पर दबाव बढ़ता है और आपके घुटनों में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं.

रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

'ऑस्टियोआर्थराइटिस एंड कार्टिलेज' में प्रकाशित इस अध्ययन से पता चला है कि रिसर्च के दौरान 30 साल की उम्र के आधे से ज्यादा लोगों में जोड़ों के नुकसान के शुरुआती लक्षण दिखाई दिए. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जीवनशैली में बदलाव न करने पर ये दिक्कत ऑस्टियोआर्थराइटिस का रूप ले सकती है जिससे कई लोगों को दर्दनाक परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ सकता है. यह इतना गंभीर हो सकता है कि उन्हें अपनी उम्र के बीच में ही समय से पहले घुटने के हिस्से बदलवाने पड़ सकते हैं.

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क्या कहती है रिसर्च
फिनलैंड की एक oulu university की टीम ने इस रिसर्च के लिए 297 लोगों का अध्ययन किया और इस दौरान उन्होंने पाया कि 30 वर्ष की आयु तक 50% से ज्यादा लोगों के घुटनों में कार्टिलेज का हल्का-फुल्का नुकसान हो चुका था जो गंभीर बात है. 

एक चौथाई लोगों में पिंडली-जांघ के जोड़ में भी कई दिक्कतें पाई गई और कई लोगों में हड्डी के उभार दिखाई दिए. ये शुरुआती बदलाव हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के साथ जुड़े हुए थे जो चिंता का विषय है क्योंकि मोटापा अब पूरी दुनिया की एक बड़ी आबादी को प्रभावित कर रहा है.

रिसर्च में सामने आया कि ज्यादा वजन उठाने से घुटनों पर दबाव बढ़ता है जिससे उनका घिसाव तेज हो जाता है. एनवाईयू ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में ऑर्थोपेडिक सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. रैन श्वार्जकोफ के अनुसार, यह लगातार तनाव समय के साथ कार्टिलेज के टूटने का कारण बन सकता है. एक बार कार्टिलेज गायब हो जाने पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता है, जिसके बाद आपको जीवनभर दर्द या फिर विकलांगता भी झेलनी पड़ सकती है.

खेलों में लगने वाली चोटें इस रिस्क को बढ़ाती हैं

अमेरिका समेत कई देशों में स्कूल और कॉलेज में हाई इंटेसिटी वाले खेल खेले जाते हैं. श्वार्जकोफ ने बताया कि ये हाई इंटेस एक्टिविटीज अक्सर घुटने की दर्दनाक चोटों का कारण बन सकती है जो इलाज के बावजूद उम्र के साथ बिगड़ती जाती है. इस बीच अगर कोई इंसान पहले से ही मोटापे से जूझ रहा है और ऊपर से उसे चोटें लग गईं तो इससे उसे ऑस्टियोआर्थराइटिस होने की संभावना और बढ़ा जाती है.

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घुटने की समस्याओं से कैसे बचें
विशेषज्ञ घुटनों की कंडीशन खराब होने पहले ही उसे रोकने की जरूरत पर जोर देते हैं. जोड़ों पर दबाव कम करने के लिए हेल्दी वजन मेंटेन रखना सबसे जरूरी है. घुटनों के आसपास की मांसपेशियों, खासकर क्वाड्स और हैमस्ट्रिंग को मजबूत करने से आपकी दिक्कत कम हो सकती है.

बैठे-बैठे काम करने वाले लोगों को रोजाना कम से कम एक घंटा फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए, साथ ही बीच-बीच में टहलने और स्ट्रेचिंग के लिए ब्रेक भी लेने चाहिए. आपको हैरानी होगी लेकिन सही जूते पहनना और शुरुआती देखभाल जिसमें फिजियोथेरेपी या आर्थ्रोस्कोपी जैसी चीजें शामिल हैं वो भी गंभीर नुकसान को टाल सकती हैं या रोक सकती हैं.

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