हर 10 में 4 लोगों में हाई ब्लड शुगर की समस्या, 40% ने बताया ज्यादा मानसिक तनाव, हेल्थ डाटा ने बढ़ाई चिंता

हाल के हेल्थ डेटा के अनुसार भारत में करीब 40% लोगों में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया है, जबकि लगभग 40% ने पिछले सप्ताह अपने मानसिक तनाव को बहुत ज्यादा बताया है. यह आंकड़े स्वास्थ्य जांच में आर्थिक स्थिति के प्रभाव को भी दर्शाते हैं, जहां उच्च आय वाले लोग फुल-बॉडी हेल्थ टेस्ट अधिक कराते हैं.

Advertisement
ब्लड शुगर बढ़ने से डायबिटीज ब्लड शुगर बढ़ने से डायबिटीज

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:34 AM IST

देश में डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़़ रही हैं, इसका अंदाजा हाल के हेल्थ डेटा से लगाया जा सकता है. डाटा के मुताबिक, देश में बड़ी संख्या में लोगों की ब्लड शुगर सामान्य से अधिक पाई गई है. वहीं करीब 40 फीसदी लोगों ने अपने शरीर में मानसिक तनाव का लेवल काफी ज्यादा बताया. आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि स्वास्थ्य जांच कराने के मामले में लोगों की आर्थिक स्थिति का बड़ा असर पड़ता है. 

Advertisement

Workforce Health Index 2026 के डाटा के मुताबिक, 10 में से लगभग 4 रिपोर्ट में बढ़ी शुगर आई है. कुल 7,088 लोगों के HbA1c टेस्ट रिपोर्ट में 38.7 फीसदी रिपोर्ट ऐसी थीं, जिनमें ब्लड शुगर का लेवल प्री-डायबिटीज या डायबिटीज पर था.  HbA1c एक तरह का ब्लड टेस्ट है, जिससे पिछले करीब 2-3 महीनों के दौरान शरीर में ब्लड शुगर के औसत स्तर का अंदाजा लगाया जाता है. इसलिए इस टेस्ट की रिपोर्ट व्यक्ति के लंबे समय के ब्लड शुगर कंट्रोल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है.

10 में 4 लोगों ने बताया ज्यादा मानसिक तनाव

ब्लड शुगर के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक और आंकड़ा सामने आया. कुल 7,346 लोगों में से 40.4 फीसदी लोगों ने पिछले एक सप्ताह में अपने शरीर में मानसिक तनाव लेवल बहुत ज्यादा बताया है. यानी बड़ी संख्या में लोगों ने खुद को काफी ज्यादा मानसिक तनाव महसूस किया है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: टीके के बाद पैरासिटामोल की जगह दे दी डायबिटीज की गोली, 5 बच्चे ICU में भर्ती

हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा किसे ज्यादा मिल रहा है?

आंकड़ों में यह भी सामने आया कि हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े दावों में कर्मचारियों की तुलना में उनके परिवार की हिस्सेदारी ज्यादा रही.
कुल दावों में 66.5 फीसदी परिवार के सदस्यों से जुड़े थे, जबकि कर्मचारियों से जुड़े दावों की हिस्सेदारी 33.5 फीसदी रही. यह आंकड़ा बताता है कि स्वास्थ्य बीमा का इस्तेमाल केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य भी बड़ी संख्या में कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: क्या पोहा खाने से शुगर लेवल बढ़ जाता है? डायबिटीज के मरीज खाएं या नहीं, AIIMS के डॉक्टर ने बताया

आय बढ़ी तो फुल-बॉडी हेल्थ टेस्ट भी बढ़ा

स्वास्थ्य जांच को लेकर आर्थिक स्थिति का बड़ा अंतर भी देखने को मिला. सालाना 3 लाख रुपये से कम आय वाले लोगों में केवल 15.6 फीसदी ने फुल-बॉडी डायग्नोस्टिक टेस्ट कराने की जानकारी दी. इसके मुकाबले 40 लाख रुपये या उससे अधिक सालाना आय वाले लोगों में यह आंकड़ा बढ़कर 54.3 फीसदी हो गया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »