कैंसर के एक लाख वाले इंजेक्शन में निकला सिर्फ पानी, कैसे पता करें दवा असली है या नकली?

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन में दवा की जगह पानी मिलने का खुलासा किया है. जांच में पता चला कि ये नकली इंजेक्शन दिल्ली-एनसीआर से लेकर हैदराबाद तक 7 राज्यों में सप्लाई किए जा रहे थे, डॉक्टरों ने बताया कि असली दवा की पहचान कैसे करें.

Advertisement
असली कैंसर दवा की कैसे करें पहचान असली कैंसर दवा की कैसे करें पहचान

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

कैंसर आज भी एक जानलेवा बीमारी है. इसके इलाज में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. लेकिन क्या हो जब पता चले कि इसके इलाज में यूज होने वाले लाखों रुपये की दवाओं में केवल पानी मिला है. यह खुलासा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच में हुआ है. जांच में पता चला है कि मरीजों को कैंसर के जो एवालुमैब इंजेक्शन दिए जा रहे थे उनमें पानी भरा हुआ था. इनकी सप्लाई बड़े पैमाने पर की जा रही थी. दिल्ली- एनसीआर से लेकर हैदराबाद तक 7 राज्यों में फैले इस कथित रैकेट का भंडाफोड़ पुलिस ने किया है.

Advertisement

इस घटना के बाद ये सवाल मन में उठता है कि कैसे एक आम मरीज ये समझे कि उसको कैंसर के इलाज के लिए जो दवा दी जा रही है वह असली भी है या नहीं? ये जानने के लिए हमने कैंसर का इलाज करने वाले डॉक्टरों से बातचीत की है. डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर ट्रीटमेंट में कीमोथेरेपी से लेकर इम्यूनोथेरेपी में अलग- अलग दवाओं का यूज किया जाता है. दवा असली है या नहीं इसका कुछ तरीकों से पता किया जा सकता है.

कैसे पता करें कि दवा असली है या नकली

किसी भी दवा के शरीर में जाने के बाद उसका कुछ असर दिखता है, लेकिन क्या कैंसर की दवाओं में भी इसी तरीके से असली या नकली का पता चलता है?  इस सवाल का जवाब मैक्स हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजी विभाग में डॉ रोहित कपूर ने दिया है.

Advertisement

डॉ रोहित बताते हैं कि सिर्फ इलाज के बाद शरीर में होने वाले बदलाव देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि कैंसर की दवा असली है या नकली. उदाहरण के लिए कीमोथेरेपी की दवाओं के लगने के बाद मरीज को कमजोरी, बाल झड़ना  और  ब्लड काउंट कम होने जैसे लक्षण दिखते हैं. लेकिन इनका होना यह साबित नहीं करता कि दवा असली है. उसी तरह अगर किसी को साइड इफेक्ट नहीं हुए हैं तो इससे भी यह नहीं कहा जा सकता है कि दवा नकली है.

यह भी पढ़ें: कैंसर के एक लाख वाले इंजेक्शन में निकला सिर्फ पानी... कालाबाजारी के खेल पर खौफनाक खुलासा

बॉक्स, बैच नंबर और एक्सपायर डेट से चलता है पता

डॉ रोहित बताते हैं कि असली और नकली दवा की पहचान वायल बॉक्स, बैच नंबर और एक्सपायर डेट देखकर किया जाता है. दवा के डिब्बे के बाहर और अंदर वाली शीशी दोनों पर ही बैच नंबर और दवा की एक्सपायर डेट लिखी होती है. खास ध्यान ये देना होता है कि दवा के डिब्बे और शीशी दोनों पर ही बैच नंबर और एक्सपायर डेट हमेशा एक ही होनी चाहिए. यही असली दवा की एक बड़ी पहचान होती है.

ये भी ध्यान रखें कि दवा की पैकिंग, सील और प्रीटिंग में कोई गड़बड़ न दिखे. कुछ दवाओं पर क्यूआर कोड भी होता है. इसको चेक करें. यह भी देखें कि दवा किसी अच्छी और नामी फार्मेसी की है या किसी लोकल कंपनी की, हमेशा बड़ी फार्मेसी से ही दवा लाएं. दवा के वितरक को बैच नंबर + शीशी या बॉक्स फोटोग्राफ दिखाकर ये पूछ सकते हैं कि क्या इस दवा का बैच और एक्सपायरी असली हैं या नहीं. ये सब तरीके हैं जिससे पता चल सकता है कि दवा असली है या नकली. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: New Cancer therapy : सर्जरी के बाद दोबारा कैंसर फैलने से रोका जा सकेगा, आई नई वैक्सीन थेरेपी, ऐसे करेगी काम

ऑनलाइन दवा खरीद रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखें 

सफदरजंग अस्पताल में ऑन्कोलॉजी विभाग में डॉ मुकेश कुमार के मुताबिक, आजकल कुछ लोग ऑनलाइन भी दवाएं खरीद रहे हैं. लेकिन बिना रेगुलेशन वाली कुछ वेबसाइटें जो दवाएं बेचती हैं वे जो अपना पता या लैंडलाइन नंबर छिपाती हैं उनसे दवा खरीदने से बचें. अगर दवा ऑनलाइन खरीद भी रहे हैं तो उसका वेरिफिकेशन का हॉलमार्क या सर्टिफिकेट देखें और उसकी असलियत की जांच करें. दवा पर लिखी डिटेल में स्पेलिंग की गलतियों और खराब ग्रामर पर ध्यान दें. ऐसी वेबसाइटों से सावधान रहें जो अपना पता या लैंडलाइन नंबर नहीं दिखाती हैं. बिना प्रिस्क्रिप्शन के सिर्फ़ प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं देने वाली वेबसाइटों से सावधान रहें. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »