क्या सिर्फ सूंघकर ही इंसानों में कैंसर का पता लगा सकते हैं कुत्ते? रिसर्च में जानें जवाब

बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी कुत्तों की सूंघने की क्षमता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जोड़कर कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए एक नई तकनीक विकसित कर रही है. इस रिसर्च में क्या सामने आया है इस बारे में जानते हैं.

Advertisement
कैंसर की पहचान कैंसर की पहचान

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

कैंसर की बीमारी का इलाज इस बात पर डिपेंड करता है कि उसका पता कब चला है. अगर शुरुआती स्टेज में ही बीमारी की जानकारी मिल जाए तो मरीज के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है. इसी दिशा में अब एक दिलचस्प तकनीक पर काम हो रहा है, जिसमें कुत्तों की सूंघने की क्षमता का इस्तेमाल कैंसर के संकेत पहचानने के लिए किया जा रहा है. बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी कुत्तों के सुंघने की क्षमता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से डेटा में बदलने की कोशिश कर रही है.

Advertisement

इस रिसर्च का फेज-2 ट्रायल सफल रहा है. इसको जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (जेसीओ) में प्रकाशित किया गया है. अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि ऐसा कैसे हो सकता है? AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, कैंसर समेत कुछ बीमारियों के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. इन बदलावों की वजह से सांस, पसीने या शरीर से निकलने वाले स्मैल का पैटर्न बदल सकता है. इंसान की नाक तो इनको नहीं पहचान पाती है, लेकिन रिसर्च में कहा गया है कि कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से कई गुना ज्यादा होती है, यही वजह है कि वैज्ञानिक लंबे समय से कुत्तों की मदद से अलग-अलग बीमारियों के संकेत पहचानने पर शोध कर रहे हैं. 

यह भी पढ़ें: क्या बायोप्सी कराने से फैल जाता है कैंसर? ये डर कितना सही, बता रहे हैं डॉक्टर

Advertisement

बेंगलुरु में कैसे हो रही है ट्रेनिंग?

बेंगलुरु की कंपनी करीब 15 कुत्तों के साथ इस तकनीक पर काम कर रही है. इनमें लैब्राडोर और दूसरे प्रशिक्षित कुत्ते शामिल हैं, इन्हें मरीजों के सैंपल में मौजूद खास गंध के पैटर्न को पहचानने की ट्रेनिंग दी जाती है. इस प्रक्रिया में मरीज को करीब 10 मिनट तक एक कॉटन मास्क में सांस लेने के लिए कहा जाता है. इसके बाद मास्क को सील करके लैब में भेजा जाता है. मरीज का सीधे कुत्तों से संपर्क नहीं होता है. कुत्ते सैंपल को सूंघकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दे सकते हैं. कोई कुत्ता फीडर की तरफ दौड़ता है, कोई रुक जाता है तो कोई सैंपल को पंजे से छूता है. इन प्रतिक्रियाओं को सेंसर और AI सिस्टम रिकॉर्ड करता है.

यह भी पढ़ें: Colon cancer symptoms: खाना खाने के बाद पेट में दर्द होना, कहीं ये कोलन कैंसर तो नहीं?

रिसर्च में क्या सामने आया?

कंपनी के मुताबिक, कर्नाटक के छह अस्पतालों में 1,500 से ज्यादा लोगों को शामिल करके किए गए एक रिसर्च में सात  प्रकार के कैंसर की पहचान में 90 फीसदी से ज्यादा सफलता हासिल हुई. हालांकि, इस आंकड़े को कैंसर की पक्की जांच समझना सही नहीं होगा. कैंसर विशेषज्ञों ने भी इसे शुरुआती और बेहद अच्छा संकेत बताया है.

Advertisement

रिसर्च में यह तकनीक प्रभावी साबित होती है, तो इसे शुरुआती के एक एडिशनल टूल के रूप में अच्छा माना जा सकता है. इससे कैंसर की शुरुआत में पहचान हो सकती है. हालांकि अभी ये सिर्फ फेज 2 ट्रायल है. इसमें आगे के ट्रायल होना बाकी है. तभी माना जाएगा कि ये रिसर्च सफल है या नहीं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »