एक नई दवा आखिरी स्टेज के पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों के जिंदा रहने के समय को दोगुना कर सकती है. पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों पर हुई रिसर्च के बाद यह दावा किया गया है. इस रिसर्च को 'द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन'में प्रकाशित किया गया है. रिसर्च से यह साबित हुआ है कि दवा कीमोथेरेपी से भी ज्यादा फायदेमंद है. फिलहाल आखिरी स्टेज के पैंक्रियाटिक कैंसर मरीजों के लिए पांच साल का सर्वाइवल रेट केवल 13-14% है, यह दवा इसको 28 फीसदी तक कर सकती है.
पैंक्रियाटिक कैंसर पेट के पीछे मौजूद एक ऑर्गन जिसे पैंक्रियास कहते हैं उसमें होता है. यह अंग पाचन रस और इंसुलिन बनाता है. इस अंग में अगर कैंसर हो जाए तो इसको पैंक्रियाटिक कैंसर कहते हैं.
डाराक्सोनरासिब है दवा का नाम
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी डिज़ीज़ रिसर्च ग्रुप के मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. एंड्रयू हेंडिफर इस रिसर्च के सह लेखक है. उन्होंने कहा कि इस नई दवा का नाम डाराक्सोनरासिब है. यह दवा पहली ऐसी दवा है जो पैंक्रियास की सेल्स में कैंसर पैदा करने वाले म्यूटेशन जिसको KRAS कहते हैं उसको ही टारगेट करती है. इससे कैंसर को काबू करने में मदद मिलती है.
पैंक्रियाटिक कैंसर के 92% मामलों में KRAS म्यूटेशन जिम्मेदार
डॉ. एंड्रयू हेंडिफ़र के मुताबिक, पैंक्रियाटिक कैंसर के 92% मामलों में KRAS म्यूटेशन पाए जाते हैं. आम तौर पर, KRAS जीन सेल की ग्रोथ के लिए "ऑन-ऑफ" स्विच की तरह काम करते हैं. म्यूटेट हुए KRAS जीन "ऑन" पोज़िशन में अटके रहते हैं और ऐसा सिग्नल भेजते हैं जिससे कैंसर सेल्स बेकाबू होकर बंटने और बढ़ने लगती हैं, जिससे कैंसर बन जाता है.
यह भी पढ़ें: कैंसर के हर मरीज का रिकॉर्ड रखना क्यों जरूरी हो गया है? इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा
कीमोथेरेपी से ज्यादा फायदेमंद है दवा
पैंक्रियास कैंसर के लिए कोई टारगेटेड ट्रीटमें को अभी तक मंजूरी नहीं है, और लंबे समय से इसमें कोई खास तरक्की नहीं हुई है. सिर्फ़ अलग-अलग कीमोथेरेपी कॉम्बिनेशन ही तैयार किए हैं, और वे भी बहुत ज़्यादा असरदार नहीं हैं. यह नया ट्रीटमेंट कीमोथेरेपी से कहीं ज़्यादा बेहतर है. आम तौर पर, जब हम पैंक्रियाटिक कैंसर में सर्वाइवल (जीवित रहने की दर) में सुधार के बारे में सोचते हैं, तो हम 25% सुधार की बात करते हैं. इस दवा ने असल में एडवांस्ड बीमारी वाले मरीज़ों के जीवित रहने की दर को दोगुना कर दिया.
डॉ. एंड्रयू हेंडिफ़र के मुताबिक, उनके पास ऐसे मरीज हैं जिन्होंने ट्रायल में हिस्सा लिया था और वे अभी भी जीवित हैं, जो कि एक अनोखी बात है क्योंकि पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों के लिए पांच साल का सर्वाइवल रेट सिर्फ़ 13%-14% है. अगर FDA इस दवा को मंज़ूरी दे देता है, तो बहुत मुमकिन है कि यह एडवांस्ड पैंक्रियाटिक कैंसर के लिए इलाज का नया स्टैंडर्ड बन जाए और पहली लाइन के ट्रीटमेंट के तौर पर यह दवा कीमोथेरेपी की जगह ले ले.
यह भी पढ़ें: Prostate Cancer के इलाज में नई उम्मीद, सिर्फ कैंसर वाली जगह का होगा इलाज, पूरा प्रोस्टेट नहीं निकालना पड़ेगा
यह खोज कैंसर विज्ञान को कैसे बदलेगी?
यह इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी कामयाबी है. अब तक, इस कैंसर से बचाव के लिए वैज्ञानिकों का ध्यान ऐसी इम्यून थेरेपी पर रहा है. वैज्ञानिक ऐसी थेरेपी पर काम कर रहे हैं जो ट्यूमर को शरीर के इम्यून सिस्टम के खिलाफ ज़्यादा कमजोर बना सकें, और ऐसे नए कीमोथेरेपी कॉम्बिनेशन खोजने पर भी काम चल रहा है, लेकिन ये दवा इस कैंसर के इलाज में एक उम्मीद की किरण बन सकती है. अगर इसको मंजूरी मिली तो यह मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होगी.
आजतक हेल्थ डेस्क