विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में 15% से ज़्यादा जोड़ों को इनफर्टिलिटी (बांझपन) की समस्या होती है.हालांकि अब मेडिकल साइंस की वजह से पिछले कुछ सालों में इनफर्टिलिटी के इलाज में काफी तरक्की हुई है. लाखों लोगों के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजशन (IVF) ने बच्चे पैदा करने का एक रास्ता खोल दिया है. हालांकि फायदों के बावजूद, IVF से पैदा होने वाले बच्चों की लंबे समय की सेहत को लेकर भी सवाल उठे हैं. बड़े पैमाने पर हुई महामारी-संबंधी स्टडीज में पाया गया है कि इन बच्चों में बाद की जिंदगी में कुछ खास तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का रिस्क नॉर्मल तरीके से होने वाले बच्चों की तुलना में अधिक हो सकता है. यह दावा एक रिसर्च में किया गया है.
अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी' में छपी एक हालिया स्टडी में यह जांच की गई कि क्या IVF के दौरान भ्रूण को होने वाला तनाव जीनोम के भीतर कुछ DNA की गति को बदल सकता है, जिससे इस प्रक्रिया से पैदा होने वाले बच्चों में लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खता बढ़ सकता है. रिसर्च में ये पता चला कि नेचुरली कंसीव हुए बच्चों की तुलना में, IVF से कंसीव हुए बच्चों के जीनोम में LINE-1 DNA की कुल मात्रा अधिक थी. आमतौर पर हमारा DNA एक ही जगह पर रहता है, लेकिन LINE-1 उस परिवार का हिस्सा है जो इंसानी जीनोम को बदल सकते हैं. ये जंपिंग जीन्स होते हैं जो खुद की कॉपी बना सकते हैं और उन कॉपीज को नई जगहों पर डाल सकते हैं.
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'जंपिंग जीन्स'क्या हैं इससे सेहत पर क्या असर होता है
जंपिंग जीन्स को वैज्ञानिक भाषा में ट्रांसपोजेबल एलिमेंट्स कहा जाता है .जंपिंग जीन्स डीएनए के ऐसे टुकड़े होते हैं जो हमारे जीनोम में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूम (कूद) सकते हैं या अपनी कॉपी बना सकते हैं. हर इंसान का डीएनए का लगभग 45% से 50% हिस्सा इन्हीं जंपिंग जीन्स से मिलकर बना है, लेकिन इनका असर अच्छा और बुरा दोनों हो सकता है. ये शरीर में बदलाव और विकास में मदद करते हैं, जिससे नई खूबियां पैदा हो सकती हैं जब ये डीएनए में गलत जगह पर जाकर बैठ जाते हैं, तो यह जीन के सामान्य काम को रोक देते हैं, जिससे म्यूटेशन होता है और कई आनुवंशिक बीमारियां हो सकती हैं.
आईवीएफ के दौरान इन जपिंग जीन्स का गलत जगह पर जाने का रिस्क होता है, जिससे होने वाले बच्चों को बीमारियों का रिस्क होता है.अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने नॉर्मल बच्चों और आईवीएफ से होने वाले बच्चों में बीमारियों के रिस्क को देखा, तो पता चला कि आईवीएफ से होने वाले बच्चों में मेटाबॉलिक बीमारियों , दिल की बीमारियों, न्यूरोसाइकियाट्रिक और कैंसर के विकास से जुड़े जीन्स की ज़्यादा मात्रा मिली थी. हालांकि ये एक शुरुआती रिसर्च है. इसका ये मतलब नहीं है कि आईवीएफ से होने वाले बच्चों को ये परेशानी होगी ही. IVF प्रक्रिया बांझपन से जूझ रहे कपल्स के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है.
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क्या होता है आईपीएफ
आईवीएफ एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है, जिसका यूज उन कपल के लिए किया जाता है जिनको नेचुरल तरीके से बच्चा कंसीव नहीं होता है. इसे आम भाषा में 'टेस्ट ट्यूब बेबी' प्रक्रिया भी कहा जाता है. बीते कुछ सालों में भारत में आईवीएफ कराने वाले कपल की संख्या काफी बढ़ी है. शहरी इलाकों मे लगातार खुल रहे नए- नए आईवीएफ सेंटर इस बात का प्रमाण है कि बांझपन की समस्या कितनी बढ़ रही है और लोग कैसे लोग अब बड़ी संख्या में आईवीएफ का सहारा ले रहे हैं.
आजतक हेल्थ डेस्क