फैक्ट चेक: फिल्मी कैरेक्टर को बताया जा रहा इंसान और जानवर का पहला सफल हाइब्रिड

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर इंसान-जानवर के हाइब्रिड की नहीं बल्कि एक फिल्मी किरदार वुल्फ पप है. इस काल्पनिक किरदार को कैरेक्टर आर्टिस्ट जेयर्ड क्रिशेव्सकी ने बनाया था.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
ये इंसान और जानवर के पहले सफल हाइब्रिड की तस्वीर है.
सच्चाई
ये तस्वीर एक काल्पनिक किरदार ‘वुल्फ पप’ की है, जिसका डिजाइन ‘ज्यूपिटर एसेंडिंग’ नाम की फिल्म के लिए 2013 में तैयार किया गया था.

ज्योति द्विवेदी

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST

पैने नाखूनों और सारे शरीर पर उगे बालों वाले अनोखे बच्चे की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. कहा जा रहा है कि ये दुनिया का पहला सफल इंसान और जानवर का हाइब्रिड है.

 और  पर काफी लोग इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर इंसान-जानवर के हाइब्रिड की नहीं बल्कि एक फिल्मी किरदार ‘वुल्फ पप’ है. इस काल्पनिक किरदार को कैरेक्टर आर्टिस्ट जेयर्ड क्रिशेव्सकी ने बनाया था.

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क्या है सच्चाई

वायरल फोटो को रिवर्स सर्च करने से ये हमें  नाम की वेबसाइट में मिली. यहां दी गई जानकारी के मुताबिक ये ‘वुल्फ पप’ नाम का एक किरदार है जिसे यूएस के कैरेक्टर आर्टिस्ट जेयर्ड क्रिशेव्सकी ने 2013 में की डिजाइन किया था.

जेयर्ड ने 23 मई 2015 को वायरल तस्वीर अपने  पर पोस्ट की थी. साथ ही कैप्शन लिखा था, “‘वुल्फ पप’ किरदार की डिजाइन मैंने ‘ज्यूपिटर एसेंडिंग’ नाम की फिल्म के लिए तैयार की थी. हालांकि ये दृश्य बाद में फिल्म से डिलीट हो गया, पर इसकी कल्पना फिल्म में एक्टर चैनिंग टेटम द्वारा निभाए गए किरदार के जन्म को दर्शाने के लिए की गई थी.” चैनिंग ने  में एक ऐसे शिकारी की भूमिका निभाई थी जिसके शरीर में जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिये अनुवांशिक बदलाव किए गए थे.

वेबसाइट  के मुताबिक जेयर्ड क्रिशेव्सकी फिल्म ‘ज्यूपिटर एसेंडिंग’ से बतौर कॉन्सेप्ट आर्टिस्ट जुड़े थे. फिल्म ‘ज्यूपिटर एसेंडिंग’ 2015 में रिलीज हुई थी.

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अब ये तो साफ हो गया कि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर इंसान-जानवर के हाइब्रिड की नहीं है. लेकिन ये बात सच है कि दुनिया में लंबे समय से ऐसा हाइब्रिड बनाने की कोशिशें चल रही हैं. इसी साल अप्रैल में कुछ अमेरिकी और चीनी वैज्ञानिकों ने मिलकर  तैयार किया था. इससे पहले इंसान-सुअर और इंसान-भेड़ के हाइब्रिड बनाने की कोशिशें हो चुकी हैं. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के प्रयोग सफल होते हैं तो अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में काफी मदद मिलेगी.

हालांकि इस किस्म के प्रयोगों को बहुत सारे विशेषज्ञ नैतिक रूप से गलत और  भी मानते हैं. उन्हें लगता है कि इस तकनीक से जो बच्चे जन्मेंगे, उनकी कोई मां नहीं होगी और वो पूरी तरह से वैज्ञानिकों के रहमो-करम पर निर्भर होंगे. कुछ लोग ये भी मानते हैं कि इस तरह के प्रयोग पशुओं से दुर्व्यवहार की श्रेणी में आते हैं.

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