रणबीर कपूर की फिल्म 'रामायण' ग्रैंड स्केल पर बनी है. इसके हर किरदार और उसके काम पर लोगों की नजरें हैं. 4000 करोड़ में बनी इस रामायण का प्रेजेंटेशन, वीएफएक्स सब टॉप क्लास है. एक-एक ग्राफिक्स, सीन को तैयार करने में करोड़ों की रकम खर्ची गई है. लेकिन सालों पहले आई रामानंद सागर की सुपरहिट रामायण में ये सब तामझाम और भव्यता नहीं थी. लेकिन उसमें इमोशंस और सादगी कूट-कूटकर भरी थी. तभी तो आज भी उस जैसी नेक इरादों वाली रामायण नहीं बन पाई है.
1 शो में किए 11 रोल
वो भी दौर था जब अलग-अलग एक्टर पर पैसे खर्चने की बजाय मेकर्स एक ही कलाकार से कई सारे रोल करा लेते थे. प्रोडक्शन कॉस्ट और लिमिटेड बजट की वजह से ऐसा होता था. जूनियर कलाकारों को अलग-अलग गेटअप देकर कई किरदारों में दिखाया जाता था. इनमें सबसे दिलचस्प कहानी असलम खान की है. उन्होंने रामानंद सागर की रामायण में 1-2 नहीं बल्कि 11 अलग-अलग किरदार निभाए थे.
वो शो में समुद्र देव, संत तुकाराम, संत एकनाथ, राक्षस, सुग्रीव के जासूस, वानर सेना के सैनिक, निषादराज के सेनापति, राजा दशरथ के दरबार में दूत/मंत्री जैसे छोटे किरदारों में दिखे. इससे भी मजेदार जानकारी ये है कि अरुण गोविल (राम) की गैरमौजूदगी में राम के गेटअप में लॉन्ग शॉट वो ही देते थे.
शुरुआत में असलम को सिर्फ एक रोल के लिए बुलाया गया था. असलम ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वो समुद्र देव के किरदार की पहली चॉइस नहीं थे. लेकिन शूटिंग से ठीक पहले उस एक्टर के मना करने पर असलम को ये रोल मिला था. असलम ने भी ये मौका झट से लपका. उन्होंने इतना शानदार काम किया कि मेकर्स ने उन्हें रामायण में बैक टू बैक कई रोल ऑफर किए. अपने हर रोल को असलम ने शिद्दत से निभाया. उनका डेडिकेशन देखकर ही रामानंद सागर ने उन्हें अपने दूसरे शो में भी काम दिया. उन्होंने अलिफ लैला, श्रीकृष्णा, सूर्यपुत्र कर्ण, मशाल और हवाएं जैसे शोज किए.
आज कहां हैं असलम खान?
लेकिन इतना सारा काम करने के बाद भी असलम खान को इंडस्ट्री में सक्सेस नहीं मिली. धीरे-धीरे उन्हें काम मिलना कम हो गया था. इससे परेशान होकर 2002 में उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का फैसला कर लिया. आलम ये है कि आज वो इंडस्ट्री से गुमनाम हैं. वो एक्टिंग छोड़ चुके हैं. असलम ग्लैमर की दुनिया से दूर मार्केटिंग की नौकरी करते हैं.
जानकारी के अनुसार, वो यूपी के झांसी में मार्केटिंग की नौकरी करते हैं. इसी नौकरी से वो अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं. उनके दो बच्चे हैं. असलम की कहानी में निराशा है तो उम्मीद भी है. जो हर इंसान के लिए इंस्पायरिंग है. आज भले ही वो शोबिज से दूर हैं, लेकिन ये पक्की बात है कि रामानंद सागर की रामायण की सफलता उनके बिना अधूरी है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क