'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' टेलीविजन का लोकप्रिय शो है. इस शो ने कई लोगों की जिंदगी बनाई और उन्हें पहचान दी. इस लिस्ट में तन्मय वेकारिया का नाम भी शुमार है. शो में उन्होंने बाघा का रोल निभाकर घर-घर पहचान बनाई.
तन्मय इंटरव्यू में बता चुके हैं कि एक समय पर वो 700 रुपये में अपना परिवार चलाया करते थे. काफी संघर्ष करने के बाद उन्हें 'तारक मेहता' में काम करने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
तन्मय को लोग उनके असली नाम से जानें ना जानें, लेकिन बाघा के रोल में बाखूबी जानते हैं. अब एक्टर ने निजी जिंदगी और करियर को लेकर बात की है. टाइम्स ऑफ इंडिया संग बातचीत में उन्होंने कहा कि लोग जब आपके किरदार के नाम से पहचानते हैं, तो धन्य महसूस होता है. इस इंडस्ट्री में आने का मुख्य मकसद काम करना था.
वो कहते हैं कि मुझे खुशकिस्मती महसूस होती है कि मैं ऐसे शो का हिस्सा हूं, जहां हर किरदार घर-घर में पहचाना जाता है. ये वैसा ही है जैसे फिल्म शोले. जब मैं यंग था तो मैंने भी गब्बर और सांबा को उनके किरदारों के नाम से जाना. असल नाम बाद में पता चला. इसी तरह हमारा शो भी है. लोग हर किरदार को स्क्रीन नेम से जानते हैं और ये एक बड़ी उपलब्धि है.
उन्होंने कहा कि मुझे लोग बाघा कहें, तो मुझे बुरा नहीं लगता. अगर बाघा है, तो तन्मय भी है. बाघा निभाने से मुझे बहुत सारा प्यार और पहचान मिली है. असल जिंदगी में मैं बाघा से बिलकुल अलग हूं. उसकी बॉडी लैंग्वेज, हेयरस्टाइल और बोलने का अंदाज सब अलग है. यही एक्टिंग की चुनौती और खूबसूरती है. हमारा भाग्य है कि हमें एक साथ दो जिंदगियां जीने को मिलती हैं. मेरे लिए बाघा के नाम से जाने जाना एक वरदान है.
तन्मय ने कहा कि वो घनश्याम नायक को याद करते हैं. उन्होंने कहा कि मैंने घनश्याम जी के साथ 10 साल बिताए. ट्रैवल के दौरान हम एक ही कमरा शेयर करते थे. कार्यक्रमों में साथ जाते थे और पिता-बेटे जैसा रिश्ता था.
उन्होंने कहा कि घनश्याम नायक के जाने के बाद जब टीम ने नए नट्टू काका की तलाश शुरू की, तो असित भाई ने मेरी राय मांगी. उन्होंने दो नाम बताए, जिनमें कि किरण भट भी शामिल थे. मैंने कहा कि किरण भट सबसे सही चुनाव हैं.
तन्मय ने राकेश बेदी के लिए कहा कि जब इंसान ईमानदारी से काम करता है, तो उसे सफलता जरूर मिलती है. 71 साल की उम्र में भी वो शानदार काम कर रहे हैं.
All Photos: Instagram @tanmayvekariaofficial