50 भाषा, 120 देश... AI को नकारा, वाराणसी के लिए SS राजामौली ने की बड़ी प्लानिंग

एसएस राजामौली ने AI के बजाय असली इंसानी आवाजों को चुना है, क्योंकि वे 120 देशों के दर्शकों तक पहुंचना चाहते हैं. फिल्ममेकर की योजना फिल्म को लगभग 50 भाषाओं में डब करने और 120 देशों में रिलीज करने की है.

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वाराणसी को लेकर राजामौली की प्लानिंग (Photo: x/@VaranasiMovie/@ssrajamouli) वाराणसी को लेकर राजामौली की प्लानिंग (Photo: x/@VaranasiMovie/@ssrajamouli)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:13 PM IST

इंडियन सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली अपनी अगली धमाकेदार फिल्म 'वाराणसी' को लेकर जबरदस्त चर्चा में हैं. महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे बड़े सितारों से सजी इस फिल्म को राजामौली एक या दो नहीं, बल्कि करीब 50 भाषाओं में और दुनिया के 120 से ज्यादा देशों में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं. 

दरअसल राजामौली ने वाराणसी की ग्लोबल रिलीज के लिए एक बेहद खास रवैया अपनाया है. आज के दौर में जहां कई मेकर्स डबिंग के लिए एआई (AI) तकनीक की ओर भाग रहे हैं, वहीं राजामौली ने साफ कर दिया है कि उनकी फिल्म में एआई-जनरेटेड (AI) या नकली आवाजों की कोई जगह नहीं होगी. वह हर भाषा के दर्शकों तक वही असली भावनाएं पहुंचाना चाहते हैं जो सेट पर कलाकारों ने महसूस की हैं.

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AI से बना ली दूरी 
मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, राजामौली नहीं चाहते कि जब फिल्म एक भाषा से दूसरी भाषा में डब हो, तो इसके मुख्य कलाकारों की एक्टिंग का असर जरा भी कम पड़े. उनके लिए डबिंग का मतलब सिर्फ कागजी डायलॉग्स का अनुवाद करना या केवल लिप-सिंक मिलाना भर नहीं है. उनका मानना है कि असली जादू आवाज के पीछे छिपे कैरेक्टर की भावना, उसके व्यक्तित्व और उसके इरादे में होता है.  इसके लिए उन्होंने AI से बनी या सिंथेटिक आवाजों को इस्तेमाल न करने का फैसला किया है.

फिल्म के शुरुआती झलकों में एआई के इस्तेमाल की खबरें उड़ी थीं, जिन्हें राजामौली ने सिरे से खारिज कर दिया था. उन्होंने इन अटकलों पर नाराजगी जाहिर करते हुए इन्हें 'अपनी कलात्मक प्रतिभा का बड़ा अपमान' करार दिया था. राजामौली का मानना है कि आवाज किसी भी एक्टर की परफॉर्मेंस का एक अहम हिस्सा होती है और इसे कोई मशीन रिप्लेस नहीं कर सकती. यही वजह है कि वे हर भाषा के वर्जन के लिए असली वॉइस आर्टिस्ट्स को ही चुनना चाहते हैं, जो अपनी आवाज के दम पर किरदार में जान फूंक सकें.

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1500 से अधिक वॉइस आर्टिस्ट्स के सैंपल
अपनी इस सोच को सही साबित करने के लिए राजामौली और उनकी टीम एक बहुत ही कठिन और बारीक प्रक्रिया से गुजर रही है. 'वाराणसी' के अलग-अलग भाषा वर्जनों के लिए सही आवाजों का चुनाव करने से पहले लगभग 1,500 से भी ज्यादा वॉइस आर्टिस्ट्स के काम का सैंपल लिया जाएगा. इतने सारे सैंपल्स की जांच के बाद ही तय किया जाएगा कि किस भाषा में कौन सी आवाज किरदार के भावों को पूरी सटीकता से पर्दे पर उतार सकती है.

'वाराणसी' की भव्य ग्लोबल रिलीज
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज के मामले में 'वाराणसी' भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल होने जा रही है. शाहरुख खान की 'पठान' (2023) और रामायण (2026) बाद 'वाराणसी' ऐसी भारतीय फिल्म बनेगी जो 120 से अधिक देशों के सिनेमाघरों में दस्तक देगी. यह फिल्म तेलुगु, हिंदी, तमिल, मलयालम और बंगाली के अलावा फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, अरबी, जापानी और कोरियाई जैसी कई प्रमुख विदेशी भाषाओं में भी डब की जाएगी. महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म 7 अप्रैल, 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में बड़े पर्दे पर रिलीज के लिए तैयार है.

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