ऐश्वर्या लक्ष्मी साउथ सिनेमा की जानी-मानी एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर हैं. वो मलयालम और तमिल फिल्मों में एक्टिव हैं. कुछ वक्त पहले एक्ट्रेस के रिवीलिंग आउटफिट पर काफी बवाल मचा था. कई लोगों ने उन्हें ट्रोल किया था. कई लोगों ने उनके कपड़ों पर सवाल उठाए थे. अब ऐश्वर्या ने हेटर्स को जवाब दिया है.
कपड़ों पर टारगेट हुई एक्ट्रेस
हाल ही के एक इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया कि वो एक इवेंट में काफी अनकंफर्टेबल महसूस कर रही थीं, क्योंकि फोटोग्राफर्स उनके चेहरे पर फोकस करने के बजाय अजीब एंगल से उनकी तस्वीरें क्लिक कर रहे थे. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर संस्कृति से जुड़ी बातें सिर्फ महिलाओं के क्लीवेज तक ही क्यों सीमित होकर रह जाती हैं.
रजनी हरिदास संग बातचीत में ऐश्वर्या लक्ष्मी ने कहा- फोटोग्राफर्स मेरे चेहरे पर ध्यान नहीं दे रहे थे. मुझे सच में बहुत अनकंफर्टेबल महसूस हुआ और जब आप असहज महसूस करते हैं, तो आपकी बॉडी लैंग्वेज भी बदल जाती है. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी पर्सनल बाउंड्रीज का उल्लंघन हुआ.
फोटोग्राफर्स ने पार की मर्यादा
एक्ट्रेस ने कहा कि सोशल मीडिया यूजर्स यह समझ गए थे कि वो अनकंफर्टेबल फील कर रही हैं, लेकिन वो यह नहीं समझ पाए कि वो कपड़ों की वजह से अनकंफर्टेबल नहीं थीं, बल्कि उन्हें ऐसा महसूस इसलिए हुआ था, क्योंकि इवेंट में मौजूद लोगों का बिहेवियर और कैमरे के एंगल आपत्तिजनक थे.
ऐश्वर्या लक्ष्मी ने कहा कि लोगों ने उनके आउटफिट पर सवाल उठाए. उन्होंने ट्रोल किया. एक्ट्रेस बोलीं- लोग कह रहे थे वो इतनी अनकंफर्टेबल क्यों हो रही हैं? वो अपनी नेकलाइन क्यों ढक रही हैं? अगर कपड़ों में इतनी अनकंफर्टेबल महसूस हो रही थी, तो ऐसी ड्रेस पहनी ही क्यों?
हेटर्स को एक्ट्रेस ने दिया जवाब
ट्रोल्स को जवाब देते हुए एक्ट्रेस ने कहा- क्या संस्कृति सिर्फ किसी महिला के क्लीवेज या उसके कपड़ों की लंबाई में ही होती है? यह हमारे बिहेवियर और चाल-चलन में भी होनी चाहिए न? उन्होंने आगे कहा- महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करने वाले लोगों पर कोई रोक-टोक नहीं लगाई जाती, लेकिन एक महिला से हमेशा यही उम्मीद की जाती है कि वो अपने कपड़ों और क्लीवेज को लेकर सावधान रहे.
ऐश्वर्या लक्ष्मी ने कहा कि पहले उन्होंने अपनी ट्रोलिंग को हंसकर टाल दिया था. 24 घंटों तक उन्होंने इसे सीरियसली से नहीं लिया था, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए और चर्चा बढ़ती गई, उनका रिएक्शन बदल गया.
एक्ट्रेस बोलीं- ट्रोलिंग शुरू होने के पहले 24 घंटों तक तो मैं इसपर हंसती रही. लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, जिस तरह से यह एक बड़े मुद्दे और बहस का रूप ले रहा था, उसने मुझे झकझोर कर रख दिया. हम अपनी जीडीपी (GDP) पर चर्चा क्यों नहीं कर सकते, या इस बात पर बात क्यों नहीं करते कि कितने बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ दिया जा रहा है? आखिर मेरे क्लीवेज को इतनी गंभीर और लंबी बहस का टॉपिक क्यों बनाया जा रहा है?
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क