एक मजाक, सुअर का खून और बदला... Prime Video की 'कैरी' कितनी डरावनी?

कहानी का सबसे बड़ा आकर्षण उसका प्रॉम वाला सीन है. कैरी को लगता है कि शायद जिंदगी में पहली बार उसे सामान्य लड़की की तरह स्वीकार किया जा रहा है. वह प्रॉम में पहुंचती है, टॉमी रॉस के साथ वक्त बिताती है और फिर प्रॉम क्वीन चुनी जाती है. लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकती.

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कैसी है कैरी सीरीज? (Photo: ITG) कैसी है कैरी सीरीज? (Photo: ITG)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:47 PM IST

स्कूल का प्रॉम, सिर पर ताज और चारों तरफ तालियां. कैरी व्हाइट के लिए यह शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल हो सकता था. लेकिन अगले ही पल उसके सिर पर सुअर के खून से भरी बाल्टी उड़ेल दी जाती है. हंसी-मजाक के नाम पर की गई इस हरकत के बाद पूरा स्कूल कैरी के गुस्से की आग में घिर जाता है. स्टीफन किंग के मशहूर उपन्यास पर बनी प्राइम वीडियो की सीरीज ‘कैरी’ का यह सीन कहानी का सबसे यादगार मोड़ है. माइक फ्लानगन ने इस कहानी को नए दौर के हिसाब से ढाला है, जहां स्कूल की बुलिंग सिर्फ क्लासरूम तक नहीं रहती, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए हर किसी तक पहुंच जाती है. आठ एपिसोड की यह सीरीज एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो लगातार अपमान सहते-सहते एक दिन अपना आपा खो देती है. लेकिन सवाल है कि क्या इस बार कैरी की कहानी पहले जितना असर छोड़ पाती है?

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कैरी व्हाइट की जिंदगी आसान नहीं है. पिता की मौत के बाद वह स्कूल की दुनिया में कदम रखती है, लेकिन वहां उसे अपनापन मिलने के बजाय ताने और अपमान झेलने पड़ते हैं. घर पर मां मार्गरेट का सख्त अनुशासन है. धार्मिक मान्यताओं में डूबी मां, बेटी की जिंदगी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहती है. कैरी के पास न घर में खुलकर जीने की आजादी है, न स्कूल में चैन से रहने का मौका. इसी बीच उसके भीतर टेलीकिनेसिस की शक्ति जागने लगती है. इस शक्ति के जरिए वह बिना छुए चीजों को हिला सकती है और अपने आसपास की वस्तुओं को नियंत्रित कर सकती है. शुरुआत में यह क्षमता उसके लिए खुद एक रहस्य है, लेकिन धीरे-धीरे यही शक्ति उसके गुस्से और बदले का हथियार बन जाती है.

सुअर का खून और कैरी का खौफनाक बदला

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कहानी का सबसे बड़ा आकर्षण उसका प्रॉम वाला सीन है. कैरी को लगता है कि शायद जिंदगी में पहली बार उसे सामान्य लड़की की तरह स्वीकार किया जा रहा है. वह प्रॉम में पहुंचती है, टॉमी रॉस के साथ वक्त बिताती है और फिर प्रॉम क्वीन चुनी जाती है. लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकती. क्रिस हार्गेनसन और बिली नोलन की साजिश के तहत उसके ऊपर सुअर का खून डाल दिया जाता है. पूरे स्कूल के सामने कैरी का मजाक उड़ता है. उसके लिए यह सिर्फ एक शरारत नहीं, बल्कि उस अपमान का चरम है जिसे वह लंबे समय से सह रही है. इसके बाद उसकी शक्तियां बेकाबू हो जाती हैं. स्कूल में अफरातफरी मचती है, लोग मारे जाते हैं और जश्न देखते ही देखते खौफनाक मंजर में बदल जाता है. यह सीरीज का सबसे दमदार हिस्सा है, हालांकि इस कहानी से परिचित दर्शकों को पता है कि प्रॉम नाइट का अंजाम कितना भयावह होने वाला है.

कैरी सीरीज का एक सीन.

आज के दौर में और खतरनाक कैरी की कहानी

माइक फ्लानगन ने पुरानी कहानी में सोशल मीडिया का पहलू जोड़ा है. कैरी की जिंदगी को लेकर अफवाहें फैलती हैं, वीडियो वायरल होते हैं और ऑनलाइन बदमाशी स्कूल की दीवारों से बाहर निकल जाती है. किसी लड़की की बेइज्जती अब कुछ बच्चों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरी दुनिया उसके निजी पलों को तमाशे की तरह देख सकती है. यह बदलाव कहानी को आज के दर्शकों के करीब लाता है. हालांकि, कुछ जगह सोशल मीडिया वाला ट्रैक कहानी को जरूरत से ज्यादा फैलाता भी है. कैरी की कहानी का मूल तनाव उसके अकेलेपन और उसके साथ होने वाले अपमान में है. जब सीरीज इसी पर टिकी रहती है, तब ज्यादा असर करती है.

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समर एच. हॉवेल को कैरी के किरदार में देखना अच्छा लगता है. वह कैरी के किरदार को सिर्फ डरी-सहमी लड़की बनाकर नहीं छोड़तीं. उनके अभिनय में दोस्ती की चाह, लोगों के बीच जगह बनाने की कोशिश और लगातार अपमान सहने की थकान दिखाई देती है. यही वजह है कि प्रॉम में उसके साथ होने वाली घटना का असर महसूस होता है. सामंथा स्लोयन ने मां मार्गरेट के किरदार में सख्ती और डर को उभारा है. मां-बेटी के रिश्ते में प्यार से ज्यादा नियंत्रण नजर आता है और कैरी की घुटन का एक बड़ा कारण यही है. सहायक कलाकार भी स्कूल के उस माहौल को बनाने में मदद करते हैं, जहां किसी को परेशान करना बच्चों के लिए मनोरंजन बन जाता है.

कैरी सीरीज का पोस्टर.

पुरानी ‘कैरी’ से कितनी अलग है नई सीरीज?

स्टीफन किंग का उपन्यास 1974 में आया था और 1976 में ब्रायन डी पाल्मा की फिल्म ने कैरी की कहानी को हॉरर सिनेमा में खास पहचान दिलाई. नई सीरीज उस परिचित कहानी को आठ एपिसोड में विस्तार देती है. कैरी के आसपास के किरदारों को ज्यादा समय मिलता है और कहानी मूल घटनाओं से आगे बढ़ने की कोशिश करती है. लेकिन यही विस्तार इसकी कमजोरी भी बनता है. कुछ हिस्से खिंचे हुए लगते हैं और कई बार ऐसा महसूस होता है कि कहानी को जितना लंबा बनाया गया है, उतने कंटेंट की जरूरत नहीं थी. प्रॉम वाला सीन दमदार है, मगर वहां तक पहुंचने में सीरीज हमेशा अपनी पकड़ बनाए नहीं रखती.

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देखें या छोड़ दें?

‘कैरी’ की कहानी आज भी असरदार है, क्योंकि इसमें डर सिर्फ अलौकिक शक्तियों से नहीं पैदा होता. एक लड़की का लगातार अपमानित होना और फिर उसका बेकाबू हो जाना कहानी को भावनात्मक आधार देता है. सुअर के खून वाला प्रॉम सीन सीरीज की सबसे बड़ी खूबी है और समर एच. हॉवेल ने कैरी के किरदार को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की है. लेकिन आठ एपिसोड में फैली कहानी कई जगह धीमी पड़ती है. अगर आपको स्टीफन किंग की कहानियां और साइकोलॉजिकल हॉरर पसंद है, तो इसे देख सकते हैं. अगर आप तेज रफ्तार और लगातार चौंकाने वाले दृश्यों की उम्मीद कर रहे हैं, तो कुछ हिस्से आपको खींचे हुए लग सकते हैं. कुल मिलाकर, ‘कैरी’ एक जानी-पहचानी हॉरर कहानी की नई पेशकश है, जिसमें दमदार पल हैं, लेकिन कसावट थोड़ी और होती तो असर ज्यादा गहरा होता.

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