'सच्चा प्यार मुश्किल से मिलता है. लेकिन जरूरी नहीं वो सच्चा प्यार आपके लिए सही हो'...नेटफ्लिक्स पर आई नई सीरीज 'मुसाफिर कैफे' यहीं दर्द बयां करती है. एक लव स्टोरी, जिसमें विक्रांत मैसी, महिमा मकवाना और वेदिका पिंटो लीड रोल में हैं, इस कहानी में इमोशंस, रोमांस और एंटरटेनमेंट का ऐसा डोज है, जो आपको अलग जर्नी पर लेकर जाता है. शो दिव्या प्रकाश दुबे की नॉवेल से इंस्पायर है. जानते हैं कैसी है ये सीरीज...
कहानी
चंदर (विक्रांत मैसी) एक सिंपल लड़का है. पहाड़ों में कैफे खोलना उसका ड्रीम है. शादी, बच्चे कर पहाड़ों पर अपनी लाइफ बिताना चाहता है. चंदर की मां उसकी शादी कराना चाहती है. उसे लड़कियों से मिलने को भेजती है. इस दौरान उसकी मुलाकात होती है सुधा (वेदिका पिंटो) से. सुधा से मिलने के बाद चंदर की बोरिंग लाइफ में एक्साइटमेंट का तड़का लगता है. सुधा जिंदादिल और बिंदास हैं. वो मोमेंट में जीना पसंद करती है. उसे शादी-बच्चे नहीं करने. उसे करियर में ऊंची उड़ान भरनी है.
कहानी में ट्विस्ट आता है जब एक दिन प्यार को छोड़ वो सपने पूरे करने निकल पड़ती है. वहीं दिल टूटने के बाद चंदर पहाड़ों में कैफे बनाने का अपना सपना पूरा करता है. उसकी जिंदगी में प्रीती (महिमा मकवाना) की एंट्री होती है. दोनों मिलकर मुसाफिर कैफे चलाते हैं. फिर एक दिन सुधा वापस आती है. क्या वो और चंदर फिर एक हो जाते हैं? क्या चंदर प्रीति को छोड़ देता है? ये जानने के लिए आपको सीरीज देखनी होगी.
क्यों देखें?
'मुसाफिर कैफे' की कहानी सिंपल है. इससे पहले भी ऐसी लव स्टोरीज आपने देखी होंगी. लेकिन इस साधारण की कहानी के साथ डायरेक्टर ने जो ट्रीटमेंट किया है, वो आपको शो से बांधे रखता है. चाहे वो सुधा-चंदर की मस्ती, प्यार, इमोशन हो या प्रीति का चंदर के लिए समर्पण. चंदर के रोल में विक्रांत ने फिर कमाल किया है. वो विक्रांत नहीं, चंदर नजर आते हैं. सुधा बनीं वेदिका इंप्रेसिव लगी हैं. इससे पहले उन्होंने ऑपरेशन रोमियो, गुमराह और निशांची में काम किया था. लेकिन सुधा का रोल उनकी वर्सटैलिटी को निखारता है. महिमा मकवाना हमेशा की तरह स्टनिंग लगी हैं. उनकी एक्टिंग में ठहराव दिखा. बाकी कलाकारों में आदिल हुसैन शाइन हुए. उनका किरदार छोटा था, फिर भी उन्होंने छाप छोड़ी.
सिनेमेटोग्राफी कमाल है. पहाड़ों की खूबसूरती को शानदार तरीके से दिखाया गया है. मुसाफिर कैफे रोमांस का डबल बोनांजा है, एक तरफ चंदर-सुधा का मॉर्डन रोमांस है, जो इंटेंस और पैशनेट है. वहीं चंदर-प्रीति का मैच्योर लव, जिसमें ओल्ड स्कूल लव स्टोरी का चार्म दिखता है. वो प्यार जिसमें कोई कंडीशन नहीं है. दोनों लव एंगल दिल को छूते हैं.
देखें ट्रेलर..
कहां हुई चूक?
सीरीज के गाने एवरेज हैं. कहानी शुरुआत में थोड़ी स्लो महसूस हो सकती है. स्टोरी का प्रेडिक्टेबल लगना भी इसे माइनस पॉइंट देता है. आपको कोई शॉकिंग मूवमेंट नहीं मिलने वाला है. अगर स्क्रीनप्ले थोड़ा और टाइट होता तो दमदार शो बन सकता था.
लेकिन थोड़ी-बहुत खामियों के साथ डायरेक्टर रुचिर अरुण की ये सीरीज दिल को छूती है. कहानी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी नहीं है, लेकिन फिर भी आपको रुला जाती है. आपके इमोशंस पर चोट करती है. सीरीज खत्म होने के बाद भी आपके दिलों दिमाग में घूमती है. अगर आपको हल्की फुल्की रोमांटिक कहानियां पसंद हैं, तो विक्रांत की सीरीज को बिंज वॉच किया जा सकता है.
हंसा कोरंगा