शूटिंग से एक रात पहले हार्ट अटैक, रघुबीर यादव क्यों बोले- मैं 50 बार मरा हूं

हुंकार के डायरेक्टर करण कपाड़िया ने बताया कि जिस रात उन्हें कोर्टरूम में गवाही वाला सीन शूट करना था, उससे एक रात पहले ही रघुबीर यादव को हार्ट अटैक आ गया था.

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रघुबीर यादव ने क्या बताया (Photo: jioHotstar) रघुबीर यादव ने क्या बताया (Photo: jioHotstar)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

एक्टर रघुबीर यादव किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. वो अपनी अदाकारी से सभी को प्रभावित करते आए हैं. हाल ही में उनकी वेब सीरीज 'हुंकार: द रोर' चर्चा में हैं. लेकिन अब निर्देशक करण कपाड़िया संग बातचीत में यह पता चला कि रघुबीर यादव को सीरीज का एक इंटेंस कोर्टरूम सीन शूट करने से एक रात पहले हार्ट अटैक आ गया था.

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इस बातचीत में बिहाइंड द सीन पर बात करते हुए करण कपाड़िया ने बताया कि रघुबीर यादव को यह सीन शूट करने से एक रात पहले हार्ट अटैक आया था और उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया था. इस बातचीत में ही रघुबीर ने सीरीज में 'बापजी' के अपने किरदार में ढलने के बारे में बात की.

उन्होंने यह भी बताया कि किसी परफॉर्मेंस का सबसे दमदार पल अक्सर अंदर से आता है ना कि किसी ऐसी चीज से जिसे एक्टर जानबूझकर बनाने की कोशिश करता है. बिड़ला स्टूडियोज के पेज से शेयर किए गए विशेष 'सीन ब्रेकडाउन' में एक्टर और करण ने कोर्टरूम सीक्वेंस को लेकर चर्चा की.

रघुबीर यादव ने क्या बताया

डायरेक्टर करण ने बताया कि जिस रात कोर्टरूम में गवाही वाले सीन की शूटिंग होनी थी, उससे एक रात पहले रघुबीर को हार्ट अटैक आ गया था. एक्टर ने इस घटना का जिक्र थोड़े मजाकिया अंदाज में करते हुए कहा कि इस सीन ने मुझे झकझोर दिया. इसकी तुलना में मुझे उस हार्ट अटैक में मजा आ रहा था. 

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जब करण ने पूछा कि उन्होंने इस सीन के लिए सही आवाज कैसे खोजी? तो रघुबीर ने कहा कि उन्होंने इसे बनाने के लिए जानबूझकर कोशिश नहीं की थी. शब्द और भावनाएं अंदर से आईं, जो उनके किरदार के उस समय के हालात से जुड़ी थीं.

उन्होंने कहा, 'मैंने इसे बिल्कुल भी नहीं बनाया. यह अपने आप अंदर से निकलकर आई. इसे बनाने की कोई जरूरत ही नहीं थी.' जब उनसे पूछा गया कि क्या किरदार के दुख का असर उनके डायलॉग बोलने के तरीके पर पड़ा, तो उन्होंने जवाब दिया, 'हां, क्योंकि मैं अभी-अभी अपने बेटे का अंतिम संस्कार करके लौटा था.'

इसके बाद करण ने पूछा कि क्या 'बापजी' का कबूलनामा सच्चे पछतावे से आया था या यह अपने आसपास के लोगों को बरगलाने की एक सोची-समझी चाल थी? उन्होंने पूछा, 'क्या उस पल आपको ऐसा नहीं लगा कि यह उसकी एक सोची-समझी चाल थी? क्या आपको सच में ऐसा महसूस हुआ कि उसने जो किया है, उसकी वजह से आप दर्द में हैं?'

रघुबीर ने समझाया कि अगर 'बापजी' जानबूझकर स्थिति को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश कर रहे होते, तो उन्हें जरूर पता चल जाता. उन्होंने कहा, 'अगर यह कोई सोची-समझी चाल होती, तो मैं उनके शब्दों से समझ जाता कि वे स्थिति को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.'

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कोर्टरूम का सीन कैसे शूट किया?

करण चाहते थे कि दर्शक यह देखें कि मीनू रावत (अनीत पड्डा) की गवाही का कोर्टरूम में मौजूद सभी लोगों पर, खासकर बापजी पर क्या असर पड़ता है. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने पहले किरदार के क्लोज-अप शॉट्स लिए और फिर धीरे-धीरे फ्रेम को बड़ा करते गए, ताकि वहां मौजूद बाकी लोगों के रिएक्शन भी कैद हो सकें. 'मैं उनके जज्बातों को दिखाने के लिए हमेशा उनके काफी करीब जाता था. जब उनकी भावनाएं पूरी तरह सामने आ जातीं, तब मैं कैमरा पीछे खींचने लगता था, ताकि वह एहसास कोर्टरूम में मौजूद हर इंसान तक पहुंच सके- वकीलों से लेकर पुलिस अधिकारी और जज तक.'

कोर्टरूम का सीन देखना बहुत मुश्किल है, जिसमें मीनू रावत उस डर के बारे में बताती हैं जिसमें वह जी रही हैं. वह बताती हैं कि न्याय की इस लड़ाई ने उनके परिवार पर कितना बुरा असर डाला है. उनकी गवाही ने रघुबीर यादव और करण कपाड़िया दोनों को गहराई से प्रभावित किया. उन्होंने माना कि शूटिंग खत्म होने के काफी समय बाद तक भी यह सीन उनके जहन पर छाया रहा.

इस एक्सपीरियंस के बारे में बात करते हुए रघुबीर ने कहा, 'सच कहूं तो, इसे करते समय मैं कम से कम 50 बार तो मर ही गया था.' कपाड़िया ने बताया कि एडीटिंग के दौरान इस सीक्वेंस को 100 से 200 बार देखने के बाद भी, इसे दोबारा देखना उनके लिए मुश्किल था. 

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डायरेक्टर ने माना कि इस सीन को देखकर वे पूरी तरह भावुक हो जाते थे, चाहे उन्होंने इसे कितनी ही बार क्यों न देखा हो. उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि ऐसे इंसान को तो बस मर जाना चाहिए. सच कहूं तो, इस पूरे सीन को देखते हुए मैं कई बार अंदर से मर चुका हूं.'

उन्होंने आगे कहा, 'हर बार, मेरी प्रतिक्रिया एक जैसी ही होती है.' उन्होंने बताया कि उस गवाही ने उन्हें कितना गहरा असर पहुंचाया. 'हां, और वह जिस तरह के शब्द कहती है... उस पल ऐसा लगता है कि मानो धरती फट जाए और आप उसमें समाकर खत्म हो जाएं और आप कर ही क्या सकते हैं? ऐसा नहीं है कि मैं ही अकेले इस दर्द से गुजर रहा था. वह किरदार भी इससे गुजर रहा था, और मैं उसके साथ-साथ उस दर्द को महसूस कर रहा था.'

'हुंकार: द रोर' के बारे में

'हुंकार: द रोर' छह एपिसोड का एक हिंदी कोर्टरूम ड्रामा और सोशियो-थ्रिलर है. कहानी 17 साल की मीनू रावत (अनीत पड्डा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु, सुनील चाकोसी (जिन्हें 'बाप जी' के नाम से जाना जाता है) पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाती है. न्याय की लड़ाई लड़ते हुए, उसे उस गुरु के अपने अनुयायियों पर पड़े प्रभाव और एक ऐसी व्यवस्था का सामना करना पड़ता है, जहां आस्था, सत्ता और लोगों की धारणाएं मिलकर सच को दबाने की कोशिश करती हैं.

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