पहले सिर्फ बैकग्राउंड म्यूजिक था फिल्म 'हनुमान अंश' का ये गाना, फिर कंपोजर ने ऐसे किया कमाल

नीम करोली बाबा की जिंदगी पर आधारित फिल्म हनुमान अंश में सियावर रामचंद्र की जय गाना भी था, जो पहले एक गाने की तरह समझा नहीं जा रहा था. इसे बनाने वाले धीरेंद्र मुलकलवर ने बताया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ.

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कैसे बना हनुमान अंश फिल्म का ये गाना (Photo: ITGD) कैसे बना हनुमान अंश फिल्म का ये गाना (Photo: ITGD)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:36 AM IST

जब भगवान कोई चमत्कार करता है, तो उसपर विश्वास करना मुश्किल होता है. फिल्म हनुमान अंश, जिसने बॉक्स ऑफिस पर बेहद धीमी शुरुआत ली वो आज के समय में धुरंधर, एनिमल जैसी ब्लॉकबस्टर को भी पछाड़ चुकी है. अपने छठवें हफ्ते में भी फिल्म दमदार कलेक्शन कर रही है. बॉक्स ऑफिस पर तो आंकड़ा भी 200 करोड़ के पार जा चुका है. 

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हनुमान अंश फिल्म का अंडररेटेड गाना

हनुमान अंश फिल्म में कई चीजें लोगों को पसंद आईं, इसमें से एक इसके गाने भी थे. जिसमें सादगी और आध्यात्मिक, सभी प्रकार का मिश्रण था. इन गानों को धीरेंद्र मुलकलवर ने कंपोज किया था. फिल्म में उनका बनाया एक गाना सियावर रामचंद्र की जय भी है, जो लोगों को काफी पसंद भी आया. हालांकि ये गाना हकीकत में कभी बनने ही नहीं वाला था. 

धीरेंद्र ने न्यूज 18 संग बातचीत में बताया कि कैसे ये गाना बनाने का प्लान किया गया. उन्होंने कहा कि ये गाना एक ऐसे सीन के दौरान तैयार हुआ, जिसमें नीम करोली बाबा और क्रांतिकारी डॉ. भोसले नजर आते हैं. सीन में बाबाजी डॉ. भोसले से देश के लिए अपना काम जारी रखने को कहते हैं. साथ ही उन्हें एक कंबल देते हैं, ताकि वो अंग्रेज पुलिस से अपना भेष छिपा सकें.

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कैसे बना सियावर रामचंद्र की जय गाना?

धीरेंद्र को इसी सीन के म्यूजिक में देशभक्ति का जज्बा दिखाना था, लेकिन साथ ही उसमें आध्यात्मिक एहसास भी बनाए रखना था. इसलिए उन्होंने शुरुआत में एक म्यूजिक पीस बनाया, जो फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी को पसंद आया. लेकिन डायरेक्टर इसे और बेहतर बनाना चाहते थे. धीरेंद्र ने करीब 10-12 अलग-अलग तरीकों से इसे बनाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें वो सही भाव नहीं मिल पा रहा था. 

फिर उन्होंने वो सीन देखना ही बंद कर दिया. कंपोजर ने विजुअल्स के हिसाब से म्यूजिक बनाने की जगह सिर्फ इस बात पर ध्यान दिया कि सीन क्या कहना चाहता है. उन्होंने ढोल-ताशा और दूसरे भारतीय ताल वाद्य यंत्रों की मदद से एक रिदम तैयार की. धीरेंद्र बताते हैं, 'जैसे ही वो रिदम बनी, शब्द और धुन अपने आप आने लगे. सीता राम, सीता राम… और फिर सियावर रामचंद्र की जय वाला हिस्सा आया.'

जब उन्होंने इस म्यूजिक को सीन के साथ लगाया तो उन्हें लगा कि आखिरकार बात बन गई है. उन्होंने इसे विशाल को भेज दिया और जवाब का इंतजार करने लगे. करीब दो दिन तक विशाल की तरफ से कोई जवाब नहीं आया. बाद में जब वो खुद विशाल के ऑफिस पहुंचे, तो उन्हें समझ आ गया कि गाना लोगों को पसंद आ गया है. टीम ने इस म्यूजिक को ट्रेलर के साथ भी लगाकर देखा. जो चीज शुरुआत में सिर्फ बैकग्राउंड स्कोर का एक छोटा हिस्सा थी, वो बाद में एक पूरे गाने में बदल गई.

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