आजकल भारतीय सिनेमा में पौराणिक कहानियों और धार्मिक आस्था से जुड़ी फिल्मों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. दर्शक अपनी धर्म से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर देखना पसंद कर रहे हैं. यही वजह है कि अब केवल क्षेत्रीय सिनेमा या एनिमेशन स्टूडियो ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड के बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस भी इस बहती गंगा में हाथ धोने को तैयार हैं.
हनुमान अंश की सफलता के बाद अब खबर है कि लव-स्टोरी और फैमिली ड्रामा बनाने के लिए मशहूर करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस भी अब 'राधा और कृष्ण' की कहानी पर एक बड़ी फिल्म बनाने जा रहा है, जिसे फिल्म 'अवने श्रीमन्नारायण' के निर्देशक सचिन रवि डायरेक्ट करेंगे.
कैसी होगी करण जौहर की फिल्म?
रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म की कहानी में भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर कंस के वध तक का सफर दिखाए जाने की खबर है. यानी दर्शकों को कृष्ण के जीवन के एक बड़े हिस्से की झलक बड़े पर्दे पर देखने को मिलेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में रोमांस, इमोशन, ड्रामा और ट्रेजेडी का जबरदस्त मेल देखने को मिल सकता है.
गौरतलब है कि पिछले एक दशक में दर्शकों के मिजाज में काफी बदलाव देखने को मिला है. खासकर इंटरनेट और डिजिटल क्रांति के बाद आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, इतिहास और पहचान को नए सिरे से समझने की कोशिश कर रही है. कोरोना काल के दौरान जब टीवी पर 'रामायण' और 'महाभारत' का दोबारा प्रसारण हुआ, तो उसने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. इस घटना ने फिल्म मेकर्स की आंखें खोल दीं.
साउथ सिनेमा ने दिखाई नई राह
इस नए ट्रेंड को सबसे पहले दक्षिण भारतीय सिनेमा ने भांपा. तेलुगु, तमिल और कन्नड़ इंडस्ट्री ने अपनी लोककथाओं और पौराणिक पात्रों को आधुनिक दौर की तकनीक के साथ जोड़कर बड़े पर्दे पर उतारा. उन्होंने इन कहानियों को सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय पूरे देश के सामने 'पैन-इंडिया' फॉर्मेट में पेश किया. इसका नतीजा आज सबके सामने है.
'हनुमान अंश' की सफलता ने बदला नजरिया
हाल के दिनों में अगर किसी फिल्म ने पूरे ट्रेड विशेषज्ञों को चौंकाया है, तो वह है 'हनुमान अंश'. बेहद सीमित बजट में बनी इस फिल्म की कमाई ने बड़े-बड़े पंडितों को हैरान कर दिया. महज 2 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू लिया. इस फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि दर्शकों को खींचने के लिए सिर्फ बड़े सितारों का नाम काफी नहीं है. अगर कहानी में दम हो और उसे ईमानदारी से बनाया जाए, तो बिना किसी सुपरस्टार के भी इतिहास रचा जा सकता है.
हनुमान अंश पहली नहीं है. एनिमेशन भी युवा दर्शकों तक पौराणिक कथाओं को पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है. भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार पर आधारित 'महावतार नरसिम्हा ' कई भारतीय भाषाओं में रिलीज होने के बाद सिनेमाघरों में बड़ी सफलता साबित हुई थी. फिल्म ने भारत में 180 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की, जबकि ट्रेड रिपोर्ट के अनुसार इसकी दुनिया भर में कुल कमाई 300 करोड़ रुपये से ज्यादा रही.
वहीं गुजराती भक्तिपूर्ण ड्रामा 'लालो – कृष्ण सदा सहायते' ने साबित कर दिया कि बॉक्स-ऑफिस पर असर डालने के लिए किसी फिल्म को बड़े स्टार या बड़े बजट की जरूरत नहीं होती. लगभग 50 लाख रुपये के बजट में बनी यह फिल्म दुनिया भर में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली गुजराती फिल्म बन गई. लोगों के बीच इसकी जबरदस्त चर्चा और दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव ने इसे गुजराती सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक सफलता बना दिया.
भक्ति अब बना बिजनेस मॉडल?
ऐसा लगता है कि 'हनुमान अंश' के ब्लॉकबस्टर होने के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री की सोच बदल गई है. अब निर्माता-निर्देशक पौराणिक कहानियों को सिर्फ धार्मिक या भक्ति फिल्मों के दायरे में रखकर नहीं देख रहे. उन्हें समझ आ गया है कि यह एक ऐसा बड़ा बिजनेस मॉडल बन चुका है, जिसमें 500 से 1000 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने का दम है. यही वजह है कि अब छोटे-बड़े सभी मेकर्स अपनी फिल्मों के लिए धार्मिक एंगल जोड़ रहे हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क