मिजोरम लोकसभा सीटः इस बार फिर कांग्रेस मारेगी बाजी या निर्दलीय का होगा कब्जा?

मिजोरम लोकसभा सीट पर पहले चरम में 11 अप्रैल को मतदान होंगे. इसके बाद 23 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मिजोरम लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के सांसद चुने गए थे. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी रॉबर्ट रोमानिया रोयते को 6 हजार 154 वोटों से हराया था.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

राम कृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 4:50 PM IST

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में पहले चरण में 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होंगे और नतीजे 23 मई 2019 को आएंगे. इससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सीएल रुआला इस सीट से सांसद चुने गए थे.

पर्वतीय राज्य मिजोरम साल 1987 को भारत का 23वां राज्य बना था. साल 1972 में केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले तक यह असम का एक जिला था. साल 1942 में पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम लागू होने पर मिज़ोरम केंद्रशासित राज्य बन गया था.

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इसके बाद साल 1986 में भारत सरकार और मिज़ो नेशनल फ़्रंट के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत  20 फरवरी 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था.

यह राज्य पूरब व दक्षिण में म्यांमार और पश्चिम में बंग्लादेश के बीच स्थित है. यह सामरिक दृष्टि से बेहद अहम राज्य हैं. मिज़ोरम को प्राकृतिक सौंदर्य अनोखा वरदान प्राप्त है. मिजोरम शब्द का स्थानीय मिजो भाषा में अर्थ है- पर्वतनिवासीयों की भूमि. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मिजोरम लोकसभा सीट से सीएल रुआला ने जीत दर्ज की थी.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

इस लोकसभा सीट में साल 1972 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी संगलियना को जीत मिली थी. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार को हराया था. शुरुआती 3 लोकसभा चुनावों में यहां से किसी पार्टी के उम्मीदवार को जीत नहीं मिली थी और निर्दलीय प्रत्याशी बाजी मारते रहे.

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इस सीट पर अब तक 11 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से पांच बार कांग्रेस पार्टी और पांच बार निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली. इसके अलावा साल 2004 के लोकसभा चुनाव में विजय नेशनल फ्रंट को पहली बार जीत मिली थी.

यहां के मतदाता या तो कांग्रेस पार्टी को चुनते हैं या फिर निर्दलीय प्रत्याशी उनकी पसंद होते हैं. हालांकि यहां पर मिजो नेशनल फ्रंट का भी प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व नहीं है. मोदी लहर में भी यहां भारतीय जनता पार्टी को जीत नहीं मिल पाई.

समाजिक तानाबाना

मिजोरम को केरल के बाद सबसे ज्यादा साक्षरता वाला राज्य माना जाता है. इसकी राजधानी आइजोल है. मिजोरम में 19वीं सदी में ब्रिटिश मिशनरियों का अच्छा खासा प्रभाव था, जिसके चलते यहां पर ज्यादातर मिजो लोग ईसाई धर्म को मानते हैं. मिजोरम में 40 सदस्यीय विधानसभा है.

साल 2018 की विधानसभा चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट को 26 सीटों, कांग्रेस को पांच, भारतीय जनता पार्टी को एक और निर्दलीयों को 8 सीटों पर जीत मिली थी. इसके बाद मिजो नेशनल फ्रंट ने सूबे में सरकार बनाई. फिलहाल यहां पर मिजो नेशनल फ्रंट की सरकार है और जोरामथंगा यहां के मुख्यमंत्री हैं.

इस राज्य में राज्यसभा की भी एक सीट है. मिजोरम लोकसभा सीट पर कुल 7 लाख 2 हजर 170 वोटर हैं. इनमें से पुरुष वोटरों की संख्या 3 लाख 11 हजार 147 है.

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साल 2014 का जनादेश

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मिजोरम लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के सीएल रुआला सांसद चुने गए थे. उन्होंने 2 लाख 10 हजार 485 वोट यानी 46.33 फ़ीसदी मत हासिल किए थे. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी रॉबर्ट रोमानिया रोयते को 6 हजार 154 वोटों से हराया था. इस चुनाव में निर्दलीय रोयते को 2 लाख 4 हजार 331 वोट मिले थे.

साल 2014 के चुनाव में यहां 4 लाख 26 हजार 706 वोट पड़े थे. इस सीट में कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट का अच्छा खासा प्रभाव है. साल 1971 से लेकर अब तक कांग्रेस को इस सीट पर 5 बार जीत मिल चुकी है. साल 2014 के चुनाव में यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

मिजोरम लोकसभा सीट से सांसद सीएल रुआला का जन्म 25 दिसंबर 1935 को राज्य के लवांगतलाई जिले के चावन्हू गांव में हुआ था. रुआला ने कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से बीए और बीटी की डिग्री हासिल की. उन्होंने शिलांग के एडमंड कॉलेज में भी पढ़ाई की. उनके परिवार में पत्नी के अलावा पांच बेटे हैं.

सीएल रुआला ने संसद के कुल 301 सत्रों में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने 5 सवाल पूछे और दो बहसों में मौजूद रहे. उन्होंने सांसद निधि से अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 21 करोड़ 21 लाख खर्च किए हैं. यहां रुआला बेहद लोकप्रिय नेता हैं. वो साल 2014 में दूसरी बार सांसद चुने गए.

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