जानिए क्या है अनुच्छेद 324, जिसके तहत बंगाल में समय से पहले EC ने रोका चुनाव प्रचार

उप चुनाव आयुक्त चंद्रभूषण कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि देश के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब आयोग को चुनावी हिंसा के मद्देनजर किसी चुनाव में निर्धारित अवधि से पहले चुनाव प्रचार रोकना पड़ा हो.

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चुनाव आयोग ने बंगाल में चुनाव प्रचार का समय घटाया (ANI) चुनाव आयोग ने बंगाल में चुनाव प्रचार का समय घटाया (ANI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2019,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

चुनाव आयोग ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में 19 मई को होने वाले अंतिम चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार पर गुरुवार रात 10 बजे के बाद से रोक लगा दी है. देश में पहली बार अनुच्छेद 324 का उपयोग करते हुए चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया. चुनाव प्रचार को वास्तव में शुक्रवार शाम पांच बजे समाप्त होना था लेकिन राज्य में समय से पहले ही इस पर रोक लगा दी गई है.

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चुनाव आयोग ने यह फैसला बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के तहत की गई बैठक में लिया. इस बैठक में आयोग की तीन सदस्यीय समिति ने हिस्सा लिया. अधिकारियों ने बताया कि चुनाव आयोग ने संभवतः पहली बार अनुच्छेद 324 का उपयोग करते हुए प्रचार रोकने का निर्णय लिया. हालांकि आयोग का यह भी कहना था कि यह मौका भले पहला हो लेकिन अंतिम नहीं क्योंकि कानून के उल्लंघन और हिंसा को देखते हुए और शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए ऐसे फैसले आगे भी लिए जा सकते हैं.

उप चुनाव आयुक्त चंद्रभूषण कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि देश के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब आयोग को चुनावी हिंसा के मद्देनजर किसी चुनाव में निर्धारित अवधि से पहले चुनाव प्रचार रोकना करना पड़ा हो. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में आठ राज्यों की 59 सीटों पर 19 मई को होने वाले मतदान में पश्चिम बंगाल की नौ सीटें भी शामिल हैं. पूर्व निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार इस चरण के मतदान से 48 घंटे पहले, 17 मई को शाम पांच बजे से चुनाव प्रचार थम जाएगा लेकिन पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए आयोग ने राज्य में निर्धारित अवधि से एक दिन पहले, 16 मई को रात दस बजे से किसी भी प्रकार का चुनाव प्रचार रोक दिया है. यह रोक राज्य की सभी नौ सीटों पर 19 मई को शाम पांच बजे मतदान पूरा होने तक जारी रहेगा.

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चंद्रभूषण कुमार ने साफ किया कि मंगलवार को कोलकाता में समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के बाद राज्य में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर चुनाव आयोग ने गंभीर नाराजगी जताते हुए यह कार्रवाई की है. उन्होंने कहा, ‘यह संभवत: पहला मौका है जब आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत इस तरह की कार्रवाई करनी पड़ी हो.’

इस बीच आयोग ने राज्य में आईएएस अधिकारी (रिटा.) अजय नायक को विशेष पर्यवेक्षक और पुलिस सेवा के रिटायर अधिकारी विवेक दुबे को विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया है. इसके अलावा आयोग ने आईपीएस अधिकारी और पश्चिम बंगाल की खुफिया शाखा सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक राजीव कुमार को सेवा मुक्त कर केंद्रीय गृह मंत्रालय भेज दिया है. उन्हें 16 मई को सुबह दस बजे तक मंत्रालय को रिपोर्ट करने को कहा गया है. साथ ही आयोग ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य को भी हटा कर उनका प्रभार राज्य के मुख्य सचिव को सौंपने का आदेश दिया है.

इससे पहले केंद्रीय पुलिस पर्यवेक्षक विवेक दुबे ने बुधवार को कहा कि बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसक झड़प के मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गई है. मंगलवार को यहां पथराव, तोड़फोड़, बंगाल के समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने और गाड़ियों को आग लगाने की सूचनाएं मिलीं. दुबे ने पत्रकारों से कहा कि चुनाव आयोग कॉलेज स्ट्रीट पर हिंसा के मामले में कदम उठाएगा. उन्होंने कहा कि मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, पहले जांच पूरी होने दें. कलकत्ता यूनिवर्सिटी कैंपस और विद्यासागर कॉलेज में मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस की छात्र इकाई और बीजेपी के कार्यकताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई थी. घटना में तीन बाइकों को आग के हवाले कर दिया गया और दोनों ही तरफ से कई लोग झड़प में घायल हो गए.

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