कर्नाटक चुनाव कार्यक्रम लीकेज पर जांच रिपोर्ट में लीपापोती ज्यादा

कमेटी की नज़रों में वो तो तुक्का था जो सही साबित हो गया. एक जगह तुक्का निशाने पर लगा और दूसरी जगह वह गलत साबित हुआ. रिपोर्ट में कहा गया कि पहले भी मीडिया अनुमान लगाता रहा है. इसमें कुछ नया नहीं है. इसलिए कुछ न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी तुक्का ही थी. उसमें मतदान की तारीख तो सही निकली पर मतगणना की तारीख गलत.

Advertisement
सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 12:25 AM IST

चुनाव आयोग की सात सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में लीकेज के पुख्ता सबूत नहीं मिले. पांच दिन देरी से शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा से ऐन पहले मीडिया में आई जानकारी को कमेटी ने लीकेज नहीं बल्कि अनुमान माना है.

कमेटी की नज़रों में वो तो तुक्का था जो सही साबित हो गया. एक जगह तुक्का निशाने पर लगा और दूसरी जगह वह गलत साबित हुआ. रिपोर्ट में कहा गया कि पहले भी मीडिया अनुमान लगाता रहा है. इसमें कुछ नया नहीं है. इसलिए कुछ न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी तुक्का ही थी. उसमें की तारीख तो सही निकली पर मतगणना की तारीख गलत.

Advertisement

चुनाव कार्यक्रम के लीकेज पर बवाल होने के बाद जांच के लिए आयोग ने एक कमेटी बनाई. कमेटी ने चुनाव आयोग की ओर से चुनावी कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा से पहले चुनावी कार्यक्रम के सोशल मीडिया और चैनल पर प्रसारित करने वालों से जवाब तलब किया.

कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं, पत्रकारों, मीडिया घरानों से जानकारी इकट्ठा की लेकिन नतीजा वही आया जिसका अंदेशा था. यानी तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय!

कमेटी ने रिपोर्ट में ज़िक्र किया है कि भविष्य में गोपनीयता का सिस्टम ज़्यादा मज़बूत किए जाने के लिए होने वाले उपायों पर कमेटी आयोग के साथ अलग से चर्चा करेगी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »