बंगाल चुनाव: ECI ने जारी की दूसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट, आंकड़ों पर सस्पेंस बरकरार

West Bengal Vidhan Sabha Chunav 2026: बंगाल में चुनाव आयोग ने SIR के तहत दूसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी कर दी है, लेकिन इसमें शामिल और हटाए गए नामों का कोई डेटा साझा नहीं किया गया. वेबसाइट पर लिस्ट अपलोड होने के बावजूद तकनीकी गड़बड़ी के कारण आंकड़े एक्सेस नहीं हो पाए. इससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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दूसरी वोटर लिस्ट आई, मगर डेटा एक्सेस नहीं हो पाया (Photo: ITG) दूसरी वोटर लिस्ट आई, मगर डेटा एक्सेस नहीं हो पाया (Photo: ITG)

तपस सेनगुप्ता / इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 28 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:19 AM IST

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. चुनाव आयोग ने शुक्रवार रात स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के तहत दूसरी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर दी, लेकिन इसमें कितने नाम जोड़े गए और कितने हटाए गए, इस पर आयोग ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है.

बूथवार लिस्ट 27 मार्च की रात करीब 11:30 बजे EC की वेबसाइट पर डाली गई, लेकिन जो पेज नाम जोड़ने या हटाने की जानकारी देते हैं वे "तकनीकी खराबी" के चलते खुल ही नहीं सके.

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आयोग के एक अधिकारी ने सिर्फ इतना कहा कि दूसरी लिस्ट प्रकाशित हो गई है, इससे ज्यादा कुछ नहीं बताया जा सकता.

इससे पहले सोमवार को जारी पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट पर भी आयोग ने कितने नाम हटाए और कितने मामले निपटाए गए इसका कोई आंकड़ा नहीं दिया था, जिसकी चारों तरफ से आलोचना हुई थी.

कितने बड़े पैमाने पर हुई है छंटनी?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की गणना प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल 58 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए. इसकी वजह मृत्यु, पलायन, डुप्लीकेट एंट्री और गायब पते बताए गए. इससे बंगाल के कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई.

यह भी पढ़ें: West Bengal Vidhan Sabha Chunav 2026: सैलरी नहीं, सम्मान की लड़ाई... बंगाल में DA क्यों बन गई BJP का सियासी हथियार

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28 फरवरी को जारी पोस्ट-SIR रोल में यह संख्या और घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ी ऊपर रह गई. इस लिस्ट में 60 लाख से ज्यादा नाम अभी भी न्यायिक जांच की श्रेणी में हैं.

चुनाव कब होंगे?

बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को काउंटिंग होगी. ऐसे में लाखों वोटरों का भविष्य अभी भी अधर में है और आयोग की चुप्पी उनकी बेचैनी और बढ़ा रही है.

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