यूपी में सपा-कांग्रेस क्यों बनने चले हैं 'असली सनातनी'? BJP को दे पाएंगे टक्कर

उत्तर प्रदेश में होने वाला विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व की पिच पर लड़े जाने की कवायद तेज हो गई है. सपा और कांग्रेस खुद को सनातन बताने लगे हैं तो बीजेपी उन्हें हिंदू विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुट गई है. ऐसे में देखना है कि सनातन के पिच पर कौन किस पर भारी पड़ता है?

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यूपी की सियासत में सनातन बनने की जंग (Photo-ITG) यूपी की सियासत में सनातन बनने की जंग (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है.  बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने की कवायद में है तो कांग्रेस और सपा सत्ता में वापसी को बेताब हैं. ऐसे में यूपी की चुनावी पिच पर सिर्फ विकास, रोजगार और कानून व्यवस्था की गूंज नहीं बल्कि खुद को असली सनातनी बताने की होड़ मची हुई है. 

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बीजेपी ने हिंदुत्व के जरिए सियासी बुलंदी हासिल की है और सनातन की असली पैरोकार बताती रही है. बीजेपी के पारंपरिक कोर एजेंडे पर सपा और कांग्रेस ने भी दांव खेल दिया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि 'समाजवाद ही सनातन है' तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने 'आजतक पंचायत उत्तर प्रदेश' के कार्यक्रम में कांग्रेस हो असली सनातनी बताया. 
 
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा वैचारिक बदलाव साफ दिख रहा है. कांग्रेस और सपा अपने आपको सनातनी बताने की कोशिश कर रही है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी विपक्ष के इस बदले रूप को 'चुनावी ढोंग' और 'मौकापरस्ती' बताकर निशाने पर रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यूपी की राजनीति में सपा और कांग्रेस खुद को 'सनातनी' साबित करने में क्यों जुट गई हैं ? 

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यूपी की सियासत में सनातन बनने की होड़
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछले दिनों लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात किया. इस दौरान उन्होंने गौरक्षा से लेकर सनातन के मुद्दे पर चर्चा की फिर सपा प्रमुख ने ट्वीट कर लिखा, 'समाजवाद ही सनातन है'. इसके बाद सपा कार्यालय के बाहर लगी कई होर्डिंग में सनातन और समाजवाद को एक साथ जोड़ने वाली कोशिश दिखाई दी. होर्डिंग में लिखा गया है कि 'सनातन ही समाजवाद है'. 

सपा के साथ कांग्रेस ने भी अपना राजनीतिक एजेंडा बदल दिया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने आजतक पंचायत उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर बात करते हुए कहा कि कांग्रेस ने दबाव बनाया तो सरकार ने कार्रवाई की. हमारे जैसे व्यक्ति को हाउस अरेस्ट कर लिया गया, हम काशी नगरी से आते हैं. हमें भगवान राम की दर्शन नहीं करने दे रही थी. हमारे कार्यकर्ताओं के आगे झुकना नहीं पड़ा, हम सनातनी काशीवादी है. हम ही असली सनातनी हैं. 

बीजेपी के पिच पर खड़ी सपा और कांग्रेस
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अपने सियासी सिलेबस में बदलाव किया है. सेक्लुयर पॉलिटिक्स के साथ सनातन की सियासी केमिस्ट्री बनाने में जुटे हैं. बीजेपी के इस पारंपरिक कोर एजेंडे पर अब सपा और कांग्रेस भी पूरी ताकत से दांव खेल रही हैं. अखिलेश यादव का इटावा में भव्य 'केदारेश्वर महादेव मंदिर' का निर्माण करवाना हो या शंकराचार्य से मुलाकात. यही नहीं कांग्रेस नेताओं का खुद को बीजेपी से बड़ा रामभक्त और सनातनी साबित करना. 

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दरअसल, 2014 के बाद से उत्तर प्रदेश का राजनीति पैटर्न बदल गया है. देश और प्रदेश में अब बहुसंख्यक समाज केंद्रित राजनीति हो गई है और इस फॉर्मूला के जरिए ही बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है. यूपी में सिर्फ मुस्लिम वोटों के सहारे सरकार नहीं बनाई जा सकती है. इसीलिए सपा और कांग्रेस दोनों दल सनातन के पिच पर उतरकर बीजेपी को मात देने का है. सपा और कांग्रेस यह अच्छी तरह जानते हैं कि अगर उन पर 'एंटी-हिंदू' या 'तुष्टीकरण' का ठप्पा लग गया, तो हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण फिर से बीजेपी के पक्ष में हो जाएगा. इसलिए, वे खुद को बीजेपी से बड़ा और सच्चा सनातनी दिखा रहे हैं।

 'सॉफ्ट हिंदुत्व' VS 'कट्टर हिंदुत्व' की सियासत 
अखिलेश यादव का केदारनाथ की तर्ज पर इटावा में केदारेश्वर महादेव मंदिर बनवा रहे हैं, जिसका उद्घाटन सावन शिवरात्रि पर होने की उम्मीद है. इसके अलावा अखिलेश यादव ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से चार महीने में दो बार मुलाकात कर चुके हैं. पिछले दिनों अखिलेश के परिवार ने काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना और दर्शन किए. 

राम मंदिर में चंदा चोरी के मुद्दो को आक्रामक तेवर से अपना रखा है. इसी तरह से कांग्रेस की कमान यूपी में संभाल रहे अजय राय भी हिंदुत्व के पिच पर खड़े नजर आ रहे हैं. राम मंदिर में दर्शन करने गए और चंदा चोरी के मुद्दो पर सख्त तेवर अपना रखा है.  कांग्रेस और सपा के नेता अब यह नैरेटिव सेट करने में जुटे हैं कि बीजेपी ने भगवान राम और सनातन का राजनीतिकरण किया है, जबकि हम भगवान के सच्चे भक्त हैं. 

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वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के शीर्ष नेता हर मंच से याद दिला रहे हैं कि कैसे पिछली सरकारों में हिंदू त्योहारों पर बंदिशें लगाई जाती थीं और सपा सरकार में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं. बीजेपी और सीएम योगी खुलकर हिंदुत्व के दांव खेल रहे हैं और खुद को सच्चा सनातनी बताने में जुड़े हैं. इस तरह सनातन के जरिए हिंदुत्व वोटों को साधने का है, जिसके लिए हार्ड बनाम सॉफ्ट हिंदुत्व का एजेंडा सेट किए जाने लगा है. 

सपा-कांग्रेस का हिंदू वोटों को साधने का प्लान
सपा अब केवल मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण के भरोसे नहीं बैठना चाहती. सपा अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के साथ 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का दांव खेलकर बहुसंख्यक हिंदू आबादी को साधने की कवायग है. सपा यह बताने में जुटी है कि वो किसी एक मजहब की पार्टी नहीं है, बल्कि उसके नेता भी शिवभक्त और सनातनी हैं. वहीं कांग्रेस भी अपने नेताओं के मंदिर दौरों के जरिए यही नैरेटिव सेट कर रही है. 

उत्तर प्रदेश में लगभग 80 फीसदी आबादी हिंदू (सनातनी) है जबकि 20 फीसदी मुस्लिम वोट हैं. राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए इस बड़ी आबादी के एक बड़े हिस्से का समर्थन अनिवार्य है, बीजेपी जहां खुद को सनातन संस्कृति की रक्षक और पुनरुद्धारक के तौर पर पेश करती है, वहीं कांग्रेस और सपा अब यह साबित करने में जुटे हैं कि वे भी उतने ही आस्थावान हैं.  यूपी की राजनीति में 'सनातनी बनने की यह होड़' कोई आध्यात्मिक जागृति नहीं, बल्कि विशुद्ध वोट बैंक की इंजीनियरिंग है.

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बीजेपी अपनी जमीन बचाने और विपक्ष अपनी नई ताकत को बरकरार रखने के लिए 'सनातन' के नाम पर आमने-सामने हैं. आने वाले 2027 के चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी की जनता किस दल के 'सनातन कार्ड' पर भरोसा जताती है, लेकिन फिलहाल शह-मात का खेल जारी है. 

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