कुंवर विजय प्रताप सिंह ने छोड़ी विधायकी, पंजाब में दो दिन में AAP को तीसरा झटका

पंजाब में आम आदमी पार्टी को दो दिनों के भीतर तीसरा बड़ा झटका लगा है. अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व IPS अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले चेतन सिंह जौरामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ चुके हैं.

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कुंवर विजय प्रताप सिंह को AAP ने पहले ही सस्पेंड कर दिया था. (File Photo) कुंवर विजय प्रताप सिंह को AAP ने पहले ही सस्पेंड कर दिया था. (File Photo)

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:01 AM IST

पंजाब में आम आदमी पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है. दो दिनों में पार्टी के तीन विधायकों ने अलग-अलग तरीके से किनारा कर लिया है. अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने करीब 1 नवंबर को विधानसभा स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंपा.

इससे पहले समाना से विधायक चेतन सिंह जौरामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं.

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कुंवर विजय प्रताप सिंह पूर्व IPS अधिकारी हैं. वह पंजाब पुलिस में रहते हुए 2015 के बरगाड़ी बेअदबी और उससे जुड़े पुलिस फायरिंग मामलों की जांच से जुड़े रहे थे. इन्हीं मामलों में इंसाफ दिलाने के मुद्दे पर उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ी थी और आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे.

बेअदबी मामलों की जांच को लेकर सरकार से मतभेद

कुंवर विजय प्रताप सिंह के भगवंत मान सरकार से मतभेद शुरुआती दौर से ही सामने आने लगे थे. उन्होंने 2015 के बरगाड़ी बेअदबी और पुलिस फायरिंग मामलों में इंसाफ मिलने में देरी को लेकर सरकार की आलोचना की थी. जनवरी 2023 में उन्होंने विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था. जांच के सिलसिले में वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने और स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद उनके मतभेद और बढ़ गए थे.

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विजय प्रताप सिंह ने सरकार पर आम आदमी पार्टी के शुरुआती स्वराज के सिद्धांतों से भटकने का आरोप भी लगाया था. उनका कहना था कि पंजाब में अपराध, नशा, जबरन वसूली और गैंगस्टरवाद पर लगाम नहीं लग पा रही है. उन्होंने पार्टी और सरकार में गैंगस्टरों और उनके परिवारों के प्रभाव का भी आरोप लगाया था. 2025 में अमृतसर में जहरीली शराब से हुई मौतों और शराब माफिया के कथित प्रभाव का मुद्दा भी उठाया था.

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मजीठिया की गिरफ्तारी पर सवाल उठाने से बढ़ा विवाद

जून 2025 में अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तारी के बाद भी कुंवर विजय प्रताप ने सवाल उठाए थे. उन्होंने विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई को अनैतिक बताया था, हालांकि मजीठिया से उनके वैचारिक मतभेद भी रहे हैं.

AAP ने उनके बयानों को पार्टी विरोधी गतिविधि बताते हुए राजनीतिक मामलों की समिति के जरिए उन्हें पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था. अब उनके विधायक पद से इस्तीफे के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी के भीतर राजनीतिक संकट और चर्चा में आ गया है.

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