वो 33 सीटें जिसके दम पर चिराग बिहार में किंगमेकर बनने का सपना देख रहे हैं? सामने RJD होगी

बिहार चुनाव में चिराग पासवान किंगमेकर बनने की कोशिश में हैं. चिराग का यह सपना सूबे की 33 विधानसभा सीटों पर टिका है, जहां सामने आरजेडी और महागठबंधन होंगे.

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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान

बिकेश तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2025,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

बिहार का सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) इलेक्शन मोड में है. नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग समेत तमाम आयोग और बोर्ड का पुनर्गठन कर टिकट के कई दावेदारों को एडजस्ट कर दिया है. इसे चुनाव के समय टिकट न मिलने के कारण बगावत की संभावनाओं को कम से कम करने का प्रयास बताया जा रहा है. वहीं, चिराग पासवान ने 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान और 70 सीटों के लिए दावेदारी कर सत्ताधारी गठबंधन की टेंशन बढ़ा दी है.

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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का यह चुनावी गोला किसके लिए घातक साबित हो सकता है? यह अलग विषय है, लेकिन उनकी रणनीति साफ है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग की कोशिश पिछले बिहार चुनाव में बन गई वोट कटवा वाली इमेज से बाहर निकलने, अपने पिता के समय का किंगमेकर वाला टैग वापस पाने की है. चर्चा में वह 33 सीटें भी आ गई हैं, जिनके दम पर चिराग पासवान बिहार चुनाव में किंगमेकर बनने का सपना देख रहे हैं. वह 33 सीटें कौन सी हैं?

किन सीटों के दम पर किंगमेकर बनेंगे चिराग?

चिराग पासवान और उनकी पार्टी बिहार की 33 सीटों के दम पर सूबे में सत्ता की चाबी अपने पास रखना चाह रही है. यही सीटें चिराग की बार्गेनिंग का बेस हैं और उनकी पार्टी के लिए अपनी मनचाही सीटें पाने की जादुई छड़ी भी. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि यही वह सीटें हैं, जिन्होंने नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जनता दल (यूनाइटेड) को 2005 के पहले विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक की सबसे खराब टैली पर ला पटका था. नीतीश की पार्टी 43 सीटें जीतकर तीसरे नंबर पर रही.

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बिहार चुनाव 2020 में चिराग की पार्टी ने एकला चलो का नारा देकर एनडीए में जेडीयू के कोटे वाली सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए थे. चिराग की पार्टी तब 137 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़कर केवल एक सीट ही जीत सकी, लेकिन 33 सीटों पर जेडीयू को सीधा नुकसान पहुंचाया. 28 सीटों पर एलजेपी उम्मीदवार को जेडीयू की हार के अंतर से अधिक वोट मिले थे. पांच सीटों पर तो एलजेपी उम्मीदवारों ने जेडीयू के कैंडिडेट को तीसरे नंबर पर धकेल दिया था. ऐसी सीटों की लिस्ट में रोहतास जिले की दिनारा से लेकर भागलपुर तक के नाम हैं.

... तो सामने होगी आरजेडी और महागठबंधन!
 
बिहार चुनाव नतीजे आने के बाद खुद नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के लिए चिराग पासवान की पार्टी को जिम्मेदार ठहराया था. जेडीयू के नेताओं का एक धड़ा इसके पीछे बीजेपी की साजिश तक बता रहा था और नीतीश के एनडीए से नाता तोड़ महागठबंधन के साथ जाने के पीछे भी यही थ्योरी बताई जाती है. लेकिन इस बार इन सीटों पर तस्वीर दूसरी होगी. चिराग अगर एकला चलो के फॉर्मूले पर बढ़ इन सीटों पर उम्मीदवार उतारते हैं तो सामने आरजेडी और उसकी अगुवाई वाला महागठबंधन होगा.

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इसे कुछ सीटों के पिछले नतीजे से भी समझा जा सकता है. रोहतास जिले की दिनारा विधानसभा सीट से 2020 के चुनाव में आरजेडी के विजय मंडल जीते थे. विजय की जीत का अंतर 8228 वोट रहा था और यहां चिराग की पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र सिंह 51 हजार 313 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे. जेडीयू के जय कुमार सिंह 27 हजार 252 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे.

यह भी पढ़ें: 'गठबंधन भरोसे पर चलता है, LJPR...', चिराग पासवान के बयान पर बोले जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार

इसी तरह भागलपुर सीट से कांग्रेस के अजीत शर्मा 1113 वोट के करीबी अंतर से जीते थे. अजीत को 65 हजार 502 वोट मिले थे और यहां बीजेपी के रोहित पांडेय 64 हजार 389 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे. तीसरे नंबर पर रहे एलजेपी के राजेश वर्मा कको 20 हजार 523 वोट मिले थे.

चिराग का सीट शेयरिंग प्लान क्या

चिराग पासवान अपनी पार्टी के लिए गठबंधन में 70 सीटों के लिए दावेदारी कर रहे हैं. हालांकि, उनका लक्ष्य 40 सीटें प्राप्त करना बताया जा रहा है. कहा तो यह भी जा रहा है कि चिराग 35 सीटों पर भी मान सकते हैं, लेकिन 33 से कम सीटों पर बात आई तो कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट की नौबत भी आ सकती है.

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फिलहाल, बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग के जिस संभावित फॉर्मूले की चर्चा है, उसके मुताबिक चिराग की पार्टी को 28 से 30 सीटें मिल सकती हैं. जेडीयू और बीजेपी, दोनों ही दल 102-102 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं. शेष 39 सीटों में ही चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को एडजस्ट किया जा सकता है.

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